

- मुरेरगढ़ का रहस्य, रोमांच और श्रद्धा का अद्भुत हिल स्टेशन
- जनकपुर का मुरेरगढ़ःइतिहास,आस्था और शैलचित्रों की जीवित विरासत
- मुरेरगढ़ की पहाडि़यां बोलती हैं इतिहास, मुस्कुराती है प्रकृति
- जनकपुर का मुरेरगढ़ हिल स्टेशन के साथ-साथ रहस्य,रोमांच और आस्था का जीवंत संगम…
- रामायण कालीन संस्कृति से जुड़ा अनुपम स्थल,जहां इतिहास,प्रकृति और विश्वास एक-दूसरे में घुलते हैं…
-राजन पांडेय-
एमसीबी,14 दिसंबर 2025
(घटती-घटना)।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का जनकपुर केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि रामायण काल, मिथिला संस्कृति और माता सीता से जुड़ी आस्था का जीवंत प्रतीक है, इसी जनकपुर अंचल में स्थित मुरेरगढ़ आज भी अपने भीतर इतिहास, रहस्य, रोमांच और आध्यात्मिक चेतना को संजोए हुए है, लगभग 2000 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह पहाड़ी एमसीबी जिले की सबसे ऊँची चोटी मानी जाती है और प्राकृतिक हिल स्टेशन के रूप में अपनी अलग पहचान रखती है।
बता दे की मुरेरगढ़ कोई साधारण पहाड़ी नहीं है, यह वह स्थान है जहां रामायण काल की आस्था, आदिमानव की कला, रियासतकाल का इतिहास और प्रकृति की अनुपम सुंदरता एक साथ मौजूद हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इतना कुछ होने के बावजूद मुरेरगढ़ आज भी सरकारी उपेक्षा, प्रशासनिक उदासीनता और नीतिगत सुस्ती का शिकार बना हुआ है,जनकपुर अंचल में स्थित मुरेरगढ़ की पहाडि़यां सिर्फ पत्थर और जंगल नहीं हैं,बल्कि वे सभ्यता की जीवित किताबें हैं, यहां मिले प्रागैतिहासिक शैलचित्र बताते हैं कि जब आधुनिक समाज का जन्म भी नहीं हुआ था,तब आदि मानव इन पहाडि़यों में जीवन,कला और संघर्ष को रंगों में उकेर रहा था। सवाल यह है कि क्या यह धरोहर सिर्फ शोध-पत्रों और फाइलों तक सीमित रहने के लिए है? मुरेरगढ़ के शिखर पर मौजूद प्राचीन किले के अवशेष आज भी यह संकेत देते हैं कि यह क्षेत्र कभी सामरिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा होगा, लेकिन आज वही किला खंडहर बनकर खड़ा है मानो पूछ रहा हो कि क्या इतिहास की कीमत सिर्फ तब तक है, जब तक वह पर्यटन पोस्टर में फिट बैठे? स्थानीय लोग इस पर्वत को सिद्ध बाबा पर्वत के नाम से पूजते हैं, महाशिवरात्रि, नवरात्रि और दीपावली जैसे पर्वों पर यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, आस्था आज भी जीवित है, लेकिन सवाल यह है कि क्या आस्था के भरोसे ही किसी धरोहर को छोड़ दिया जाना चाहिए? क्या सुरक्षा, रास्ता,साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाएं देना भी अब चमत्कार की श्रेणी में आ गया है? पर्यटन की दृष्टि से मुरेरगढ़ में वह सब कुछ है, जो किसी हिल स्टेशन को चाहिए ऊंचाई, हरियाली, गुफाएं, जलस्रोत, रहस्य और इतिहास। फिर भी यह स्थान पर्यटन मानचित्र पर सिर्फ इसलिए पीछे है क्योंकि दृष्टि का अभाव है,संसाधनों का नहीं, छत्तीसगढ़ सरकार एक ओर पर्यटन बढ़ाने की बात करती है, दूसरी ओर मुरेरगढ़ जैसे स्थलों को सिर्फ संभावना कहकर छोड़ देती है, सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि शैलचित्रों और प्राकृतिक संरचनाओं का कोई ठोस संरक्षण तंत्र नहीं है, न सुरक्षा, न निगरानी, न वैज्ञानिक संरक्षण। यदि यही हाल रहा, तो आने वाली पीढि़यां मुरेरगढ़ को देखने नहीं, बल्कि सिर्फ उसके बारे में पढ़ने को मजबूर होंगी, अब सवाल यह नहीं है कि मुरेरगढ़ में क्या है सवाल यह है कि सरकार और प्रशासन क्या करना चाहते हैं? यदि मुरेरगढ़ को आज भी नजरअंदाज किया गया, तो यह सिर्फ एक पर्यटन अवसर की नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी की हार होगी, इतिहास बार-बार मौका नहीं देता और जो समाज अपनी धरोहरों को नहीं सहेजता, वह भविष्य में पहचान के संकट से जूझता है।
स्थान एवं पहुँच…जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ से दूरी
लगभग 105 किलोमीटर,पहुँच मार्ग केल्हारी,चुटकी,भंवरखोह मुरेरगढ़ जिलाः मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (छत्तीसगढ़) दुर्गम लेकिन रोमांचक रास्तों से होकर जब कोई मुरेरगढ़ की चोटी पर पहुँचता है, तो नीचे फैली हरियाली और ऊपर खुला आकाश मन को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।
गौरवशाली इतिहास की गवाही देता किला
मुरेरगढ़ पर्वत शिखर पर स्थित प्राचीन किले के अवशेष इसके गौरवशाली अतीत की मूक गवाही देते हैं। पर्यटन एवं पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार यह किला संभवतः रियासतकाल में बालंदशाह राजा द्वारा निर्मित गढ़ी रहा होगा, आज यह किला भले ही भग्न अवस्था में है, लेकिन इसके अवशेष यह बताते हैं कि यह स्थल कभी सैन्य और प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा होगा।
प्रकृति की अनुपम देन
मुरेरगढ़ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक संरचना है पहाड़ी में बनी प्राकृतिक गुफाएं, वर्षभर जलयुक्त रहने वाला प्राचीन कुआं, पुराने तालाब, गुफाओं से निकलने वाला मीठा और पीने योग्य जल, चारों ओर फैली घनी हरियाली और शांति, यह सब मिलकर मुरेरगढ़ को प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं बनाते।
आस्था का केंद्र सिद्ध बाबा पर्वत
स्थानीय जनमानस में मुरेरगढ़ को सिद्ध बाबा पर्वत के नाम से जाना जाता है। यहां महाशिवरात्रि, नवरात्रि, दीपावली के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर दीप प्रज्वलन और पूजा-अर्चना करते हैं। पर्वत शिखर पर स्थापित त्रिशूल और ध्वज इस स्थान की आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक महत्व को दर्शाते हैं। लोगों की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुरादें पूरी होती हैं।
आदिमानव की कहानी कहते शैलचित्र
मुरेरगढ़ और जनकपुर क्षेत्र की पहाडि़यों में प्रागैतिहासिक शैलचित्र पाए जाते हैं, जो इस स्थल को और भी विशिष्ट बनाते हैं विशेष रूप से कोहबाहुर शैलाश्रय में मिले शैलचित्र लाल गेरू से निर्मित,हिरण,भैंसा, छिपकली जैसे वन्यजीवों के चित्र आदिमानव के शिकार,जीवनशैली और पर्यावरण को दर्शाते दृश्य ये शैलचित्र मध्यपाषाण काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक मानव सभ्यता की यात्रा को दर्शाते हैं और छत्तीसगढ़ की समृद्ध पुरातात्विक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
पर्यटन की अपार संभावनाएं
मुरेरगढ़ नेचर टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, हेरिटेज टूरिज्म तीनों के लिए अत्यंत उपयुक्त स्थल है, यदि यहां सड़क,सुरक्षा,ठहराव और मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाए,तो यह स्थान छत्तीसगढ़ के प्रमुख हिल स्टेशनों में गिना जा सकता है।
भविष्य की दिशा
जिला प्रशासन द्वारा मुरेरगढ़ पर्यटन स्थल की विस्तृत जानकारी छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल को प्रेषित की जा चुकी है,आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित होने के बाद यह स्थल स्थानीय रोजगार, पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था,सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा दे सकता है।
जरूर आइए…मुरेरगढ़ आइए…
जहां इतिहास बोलता है,प्रकृति मुस्कुराती है और आस्था सजीव हो उठती है….
फीचर/पर्यटन स्टोरी
छत्तीसगढ़ का अनछुआ हिल स्टेशन — मुरेरगढ़
मुरेरगढ़ः इतिहास की चुप्पी और प्रकृति की पुकार
पर्यटन मानचित्र पर चमकने को तैयार मुरेरगढ़
जहां हर चट्टान एक कथा है — मुरेरगढ़
रहस्य और रोमांच
मुरेरगढ़ की पहाडि़यों में छिपे रहस्य और सभ्यता के निशान
गुफाओं, किलों और शैलचित्रों का अद्भुत संसार — मुरेरगढ़
2000 फीट की ऊँचाई पर बसा आस्था और रोमांच का केंद्र
जहां सिद्ध बाबा की आस्था और आदिमानव की कला आज भी जीवित है…
शैलचित्रों में कैद आदिमानव,पहाडि़यों में बसती आस्था
आस्था-केंद्रित
सिद्ध बाबा पर्वतः आस्था, विश्वास और शक्ति का संगम
मुरेरगढ़ — जहां श्रद्धा शिखर पर पहुंचती है…
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