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सूरजपुर@ नयनपुर राइस मिल हादसा : संचालक की लापरवाही से गई तीन मजदूरों की जान

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  • मशीनों के कंपन से ढही जर्जर दीवार,औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी
  • नयनपुर औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों का आक्रोश,चक्का जाम कर किया बड़ा आंदोलन
  • तीन मजदूरों की मौत के बाद फूटा गुस्सा,पूर्व जिला पंचायत सदस्य पंकज तिवारी के नेतृत्व में उठीं जनहित की मांगें…
  • नयनपुर औद्योगिक क्षेत्र में मौत का कारोबार
  • राइस मिल में दीवार ढहने से 3 मजदूरों की मौत,1 गंभीर
  • लापरवाही, प्रदूषण और प्रशासनिक चुप्पी के खिलाफ फूटा मजदूरों का गुस्सा, चक्का जाम तक पहुंचा आक्रोश


-शमरोज खान-
सूरजपुर,14 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)।
नयनपुर औद्योगिक क्षेत्र एक बार फिर मजदूरों के लिए कब्रगाह साबित हुआ, कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित मित्तल राइस मिल में बुधवार सुबह करीब 10 बजे हुए भयावह हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था, मिल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी तीनों की पोल खोलकर रख दी, मिल के भीतर काम के दौरान अचानक एक दीवार ढह गई, जिसके नीचे दबकर तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई,जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया।
नयनपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित राइस मिल में हुआ हादसा अब केवल एक ‘दुर्घटना’ नहीं, बल्कि राइस मिल संचालक की सीधी लापरवाही का मामला बनता जा रहा है, मिल में काम कर रहे तीन मजदूर जर्जर और कमजोर दीवार के नीचे दबकर मारे गए,जबकि यह पहले से स्पष्ट था कि वहां भारी मशीनें संचालित होती हैं और लगातार तेज वाइब्रेशन होता रहता है,स्थानीय लोगों और मजदूरों का साफ कहना है कि जिस दीवार के गिरने से यह हादसा हुआ,वह उच्च कोटि की नहीं थी,न ही उसे औद्योगिक मानकों के अनुरूप मजबूत बनाया गया था,सवाल यह है कि जब दीवार की मजबूती संदिग्ध थी,तो उसी स्थान पर भारी और कंपन पैदा करने वाली मशीनें आखिर किसकी अनुमति से चलाई जा रही थीं?
कमजोर दीवार + भारी मशीन = मौत का इंतजाम
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,राइस मिल में जिस दीवार को खड़ा किया गया था,वह न तो मानक सामग्री से बनी थी,न उसमें पिलर या सपोर्ट था,न ही कंपन को सहने की कोई तकनीकी व्यवस्था की गई थी,इसके बावजूद उसी दीवार के पास बड़े पैमाने पर मशीनें चलाई जा रही थीं। मशीनों के लगातार कंपन से दीवार पर दबाव बढ़ता गया और अंततः वह भरभराकर गिर पड़ी। दीवार के नीचे काम कर रहे मजदूरों को बचने का कोई मौका तक नहीं मिला और तीन जिंदगियां मौके पर ही खत्म हो गईं।
संचालक की जिम्मेदारी से कोई नहीं बच सकता
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पता था कि मशीनों का वाइब्रेशन ज्यादा है,तो कमजोर दीवार वहां क्यों बनाई गई? औद्योगिक क्षेत्र में बिना सुरक्षा मानकों के निर्माण की अनुमति किसने दी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह हादसा पूरी तरह से राइस मिल संचालक की घोर लापरवाही का परिणाम है। अगर समय रहते दीवार की गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया होता,अगर औद्योगिक सुरक्षा नियमों का पालन किया गया होता तो आज तीन मजदूर जिंदा होते।
औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा या सिर्फ मुनाफा?
नयनपुर जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह की कमजोर और जर्जर दीवार का होना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है, क्या यहां मजदूरों की जान से ज्यादा मुनाफा जरूरी है? सुरक्षा नियम केवल कागजों तक सीमित हैं? यह हादसा बताता है कि कई उद्योगों में सुरक्षा को खर्च और मजदूर को उपभोग की वस्तु समझा जा रहा है,अब सवाल कार्रवाई का मजदूरों और स्थानीय लोगों की मांग है कि इस मामले में राइस मिल संचालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या जैसी कड़ी धाराओं में मामला दर्ज हो,औद्योगिक क्षेत्र की सभी इमारतों और मशीनों की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए,दोषियों को मुआवजे तक सीमित न रखते हुए कानूनी सजा दी जाए नयनपुर की यह घटना एक चेतावनी है यदि आज भी जिम्मेदारों को नहीं घेरा गया,तो कल फिर किसी दीवार के नीचे मजदूरों की लाशें मिलेंगी।
मौत का मंजर
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान वेद सिंह, बोल सिंह और विफल के रूप में हुई है। गंभीर रूप से घायल मजदूर सुरेंद्र को जिला अस्पताल सूरजपुर में भर्ती कराया गया है,जहां उसकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है,प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,हादसा इतना अचानक था कि मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुछ ही सेकंड में जिंदा लोग मलबे में तब्दील हो गए।
प्राकृतिक हादसा नहीं,खुली लापरवाही…
स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई प्राकृतिक दुर्घटना नहीं,बल्कि मिल प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही का नतीजा है,जानकारी के अनुसार, मिल के अंदर करीब 8 फीट ऊंची दीवार खड़ी कर पार्टिशन बनाया जा रहा था बिना पिलर,बिना इंजीनियरिंग सलाह, बिना किसी सुरक्षा मानक के धान से चावल अलग करने की प्रक्रिया के दौरान उस पार्टिशन में चावल और कोढ़ा भरता गया, जिससे दीवार पर अत्यधिक दबाव बना। ऊपर से मशीनों के तेज वाइब्रेशन ने दीवार को कमजोर कर दिया और आखिरकार दीवार ढह गई,सवाल यह है कि क्या मजदूरों की जान इतनी सस्ती है कि बिना सुरक्षा के उन्हें काम पर झोंक दिया जाए?
प्रशासन हर बार ‘जांच’ तक ही क्यों?
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। मलबे में और मजदूरों के दबे होने की आशंका के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया,हादसे की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर और एसएसपी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया, प्रशासन ने एक बार फिर वही रटा-रटाया बयान दिया जांच की जा रही है,लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई होगी,लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है क्या नयनपुर में पहली बार मजदूर मरे हैं? क्या पहले की मौतों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई?
मुआवजा या मुंह बंद करने की कोशिश?
राइस मिल प्रबंधन ने मृत मजदूरों के परिजनों को एक-एक लाख रुपये और घायल मजदूर को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है, मजदूरों का साफ कहना है कि यह मुआवजा नहीं,हमारी आवाज दबाने की कोशिश है,परिवारों का कहना है कि न कोई स्थायी नौकरी, न बीमा, न सुरक्षा और मौत के बाद कुछ पैसों से जिम्मेदारी खत्म करने की परंपरा अब बर्दाश्त नहीं होगी।
मौत के बाद फूटा जनाक्रोश,चक्का जाम
तीन मजदूरों की मौत के बाद नयनपुर औद्योगिक क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में मजदूर, ग्रामीण, सरपंच और उपसरपंच सड़कों पर उतर आए और चक्का जाम कर दिया,आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जिला पंचायत के पूर्व सदस्य पंकज तिवारी के पहुंचते ही आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया,पंकज तिवारी ने दो टूक कहा नयनपुर औद्योगिक क्षेत्र में मजदूर नहीं, बल्कि मौत पैदा की जा रही है। यदि प्रशासन जनहित की मांगें पूरी करने में असमर्थ है तो उग्र आंदोलन की जिम्मेदारी भी प्रशासन की होगी
मजदूरों की प्रमुख मांगें
सभी उद्योगों की नियमित और सख्त जांच
औद्योगिक क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त किया जाए
मजदूरों के लिए 10 बिस्तरीय अस्पताल
सभी मजदूरों का अनिवार्य पंजीयन और बीमा
औद्योगिक अपशिष्ट और गंदे पानी को नदी में छोड़ने पर तत्काल रोक
पूर्व में दुर्घटनाग्रस्त मजदूरों को मुआवजा और पुनर्वास

प्रदूषण से बीमारी…लापरवाही से मौत…
नयनपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण की हालत यह है कि स्थानीय लोग खेती नहीं कर पा रहे,उड़ती धूल से बच्चे सांस की बीमारी से पीडि़त, गंदा पानी नदी में छोड़ने से मवेशियों के सामने पेयजल संकट लेकिन न उद्योग मालिकों को फर्क पड़ता है, न प्रशासन को।
पुलिस बल तैनात,तनाव बरकरार…
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, प्रशासन ने एक माह के भीतर विभिन्न विभागों के माध्यम से जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या मजदूरों की मौत के बाद भी नयनपुर में सब कुछ “सामान्य” हो जाएगा?
क्या जांच की फाइलें भी मलबे में दब जाएंगी?
नयनपुर की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की सामूहिक विफलता है जहां मजदूर की जान की कीमत एक दीवार से भी कम समझी जाती है।


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