प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण-पत्र पर बवाल तेज,हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं, आदिवासी समाज ने आंदोलन की चेतावनी दी…

-विशेष रिपोर्ट-
रायपुर/सूरजपुर/बलरामपुर,02 नवंबर 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाणपत्र को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है, आदिवासी समाज ने इसे कथित रूप से फर्जी एवं कूटरचित प्रमाण-पत्र बताते हुए प्रशासन से प्रमाण-पत्र निरस्त करने की मांग की है, वहीं, कार्रवाई में देरी पर समाज ने आंदोलन की चेतावनी दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार,आरोप है कि विधायक पोर्ते का जाति प्रमाण-पत्र बिना वैधानिक आधार और अधूरे दस्तावेजों के जारी किया गया था,आरोप लगाया गया है कि प्रमाणपत्र जारी करते समय न तो विधायक और न ही उनके पिता के मूल जातीय दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे,स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज होने के बाद हुई प्रशासनिक जांच में भी दस्तावेजों की कमी सामने आई,अम्बिकापुर अनुविभागीय अधिकारी एवं परियोजना कार्यालय द्वारा भी आवश्यक प्रमाणिक दस्तावेजों के अभाव की पुष्टि की गई है।
राजनीतिक तापमान बढ़ा,विधायक पक्ष मौन
इस मुद्दे को लेकर प्रतापपुर व आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है,स्थानीय संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने कहा कि यह मामला सिर्फ जाति प्रमाणपत्र का नहीं, बल्कि आदिवासी अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है,वहीं,विधायक पक्ष की ओर से अब तक इस प्रकरण पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अगले चरण पर सबकी निगाहें…
अब समूचे क्षेत्र की निगाहें जिला प्रशासन और सत्यापन समिति की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं,यदि प्रमाण-पत्र निरस्त होता है तो इसका प्रभाव विधायक की सदस्यता पर भी पड़ सकता है,वहीं,प्रमाण-पत्र वैध ठहराए जाने की स्थिति में विरोधी पक्ष अगली कानूनी लड़ाई की तैयारी में जुटा है।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं…
आदिवासी समाज द्वारा दायर याचिका पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने 17 जून 2025 को आदेश जारी करते हुए जिला एवं राज्य स्तरीय सत्यापन समिति को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि,आदेश के चार माह बीत जाने के बाद भी प्रमाण-पत्र निरस्तीकरण की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ी है,जिससे समाज में नाराज़गी बढ़ गई है।
सत्यापन समिति की कार्यवाही और अनुपस्थिति का सवाल
जिला स्तरीय सत्यापन समिति ने इस संबंध में 28 अगस्त, 15 सितंबर और 29 सितंबर 2025 को नोटिस जारी कर विधायक से दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा था,सूत्रों के अनुसार, समिति की सुनवाई में विधायक की अनुपस्थिति दर्ज की गई,जिसे आदिवासी समाज ने जांच से बचने का प्रयास बताया है।
फर्जी प्रमाण-पत्र से चुनाव लड़ने’ का आरोप
आदिवासी समाज का आरोप है कि कथित रूप से गलत जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीट से चुनाव लड़ना सच्चे आदिवासियों के अधिकारों का हनन है,समाज ने इसे राजनीतिक धोखाधड़ी करार देते हुए कहा कि इससे पूरे आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
आदिवासी समाज का अल्टीमेटम
आदिवासी समाज ने प्रशासन को 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है,समाज ने स्पष्ट कहा है कि यदि इस अवधि में प्रमाण-पत्र निरस्त नहीं किया गया, तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन की शुरुआत करेंगे, संगठनों ने यह भी चेताया है कि आंदोलन के दौरान यदि कोई अप्रिय स्थिति बनती है, तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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