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बलरामपुर/रामानुजगंज@कहा से आ रहा आरटीओ विभाग के उप निरीक्षक आसांभर के पास इतना पैसा की पत्नी के नाम खरीदा जा रहा है बेशकीमती जमीन?

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-न्यूज़ डेक्स-
बलरामपुर/रामानुजगंज,29 सितम्बर 2025 (घटती-घटना)। आरटीओ विभाग में क्या इतनी ऊपरी कमाई है कि कोई कर्मचारी कम समय में कई करोड़ों का आसामी बन सकता है? ऐसा प्रश्न इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि आरटीओ विभाग में आरक्षक पद से भर्ती हुए वर्तमान में उप निरीक्षक पद पर पदस्थ उत्तरप्रदेश छत्तीसगढ़ राज्य सीमा चेकपोस्ट धनवार पर कार्यरत कर्मचारी ने कम समय की नौकरी में कई करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली है जो जानकारी बतौर सामने आई है,उप निरीक्षक ने यह संपत्ति अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी है और बताया जाता है सूत्रों द्वारा की यह मात्र प्रारंभिक जानकारी है सूत्रों के अनुसार संपत्ति और अधिक भी हो सकती है जिसमें चल अचल नकद संपत्तियां शामिल मिल जाएंगी, आरटीओ उप निरीक्षक की पत्नी भी क्या किसी शासकीय विभाग में कार्यरत हैं या किसी बड़े व्यापार का वह संचालन करती हैं? ऐसी कोई स्पष्ट जानकारी सूत्रों द्वारा तो नहीं बताई जा रही है,सूत्रों के अनुसार वह गृहणी मात्र हैं ऐसे में सवाल यह उठता है कि करोड़ों की चल अचल संपतियों का अर्जन आरटीओ उप निरीक्षक इतने जल्द समय में कैसे कर ले गए और यह कैसे इतने कम समय में संभव हो सका?
बताया जाता है कि हाल ही में आरटीओ उप निरीक्षक ने कोरिया जिले के पटना तहसील क्षेत्र के ग्राम महोरा में 6 करोड़ की बेशकीमती जमीन खरीदी है और यह जमीन कागजों में भले कम दाम पर खरीदी जानी बताई गई है लेकिन इसकी खरीदी 6 करोड़ की लागत में हुई है, यह जमीन राष्ट्रीय राज्यमार्ग से लगी हुई है और इस जमीन की खरीदी बिक्री दो माह से भी कम समय में दो बार हुई है,जमीन पहले विवादित थी मुकदमा चला और जीतने वाले ने जब कब्जा लेना चाहा तब जमीन को लेकर खूनी संघर्ष की स्थिति बनी वहीं जमीन राष्ट्रीय राज्यमार्ग से लगी होने के कारण वह भी 9 एकड़ के लगभग जमीन होने के कारण जमीन की कीमत असमान छूने वाली थी, इसलिए इस जमीन पर विवाद देखा गया, विवाद के निपटारे के लिए बताया जाता है कि जमीन को पहले एक भूमाफिया ने पहले अपने अधिकार में लिया और जब वह सभी पक्षों को संतुष्ट कर कब्जा करने में सफल हो गया जिसके बाद जमीन आरटीओ उप निरीक्षक को मिल सकी। इस जमीन के लिए 6 करोड़ जैसी बड़ी रकम नकद चुकाई गई भले ही इससे बहुत कम की राशि रजिस्ट्री में दर्शाई गई।
रायपुर के मोवा में, अंबिकापुर के फंडूदिहाड़ी में और अंबिकापुर के ही भगवानपुर में भी अपनी पत्नी के नाम पर महंगी जमीन खरीदी कहा से आया पैसा?
बताया जाता है कि आरटीओ उप निरीक्षक यह बेशकीमती जमीन अपनी पत्नी के नाम ले सकें इसलिए ही पहले इस विवादित जमीन में भूमाफिया की एंट्री हुई और बाद में जमीन आरटीओ उप निरीक्षक को मुंह मांगे दाम देने पर मिल सकी। आरटीओ उप निरीक्षक के द्वारा यह कोई पहली जमीन खरीदी गई ऐसा नहीं है, सूत्रों के अनुसार वह लगातार बेशकीमती जमीन खरीदते जा रहे हैं जो उनकी पत्नी के नाम पर वह खरीद रहे हैं। रायपुर के मोवा में अंबिकापुर के फंडूदिहाड़ी में और अंबिकापुर के ही भगवानपुर में भी इन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर महंगी जमीन खरीदी है यह सूत्रों के द्वारा दी जा रही जानकारी है, वहीं सूत्रों के अनुसार यदि पूरी सच्चाई यदि सामने आएगी लोग अचंभित हो जायेंगे की किस तरह आरटीओ बैरियर पर कार्यरत एक उप निरीक्षक जल्द अरबपति बनने की तैयारी कर रहा है, अब तक जो जमीन खरीदी गई है आरटीओ उप निरीक्षक की पत्नी के नाम से उसकी कीमत ही कई करोड़ों में है और यह सभी जमीन कम दाम पर खरीदी दर्शा कर खरीदी गई है। वैसे अभी कोरिया जिले में ही कई अन्य जमीनों का सौदा होने वाला है यह भी बतलाया जा रहा है जो कभी भी आरटीओ उप निरीक्षक की पत्नी के नाम पर दर्ज हो सकती है। कम समय में वह भी शासकीय नौकरी में रहते हुए इतनी संपत्ति वेतन मात्र से अर्जित कर पाना नामुमकिन है इसके लिए कई अन्य रास्ते तय किए गए हैं ऐसा सूत्रों का कहना है।
क्या आरटीओ विभाग के उप निरीक्षक महंगी जमीनों के शौकिन है?
वैसे शासकीय विभागों में भ्रष्टाचार चरम पर है और सुशासन जैसा विषय भ्रष्टाचार मामले में लागू नजर नहीं आता वहीं यदि सतर्कता विभाग को लेकर बात की जाए तो वह भी चीर निद्रा में लीन है वह सोया हुआ है जिससे आज संपत्ति अर्जित करने के मामले में शासकीय कर्मचारियों ने बड़े बड़े व्यवसायियों को भी पछाड़ दिया है। आरटीओ उप निरीक्षक जिसने कुछ समय में ही बहुत बड़ी और बेशकीमती संपत्ति अपनी पत्नी के नाम से खरीदी है उनके विषय में उनके ही एक विभाग के कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बतलाया कि साहब के जलवे विभाग से भी हैं और बाहर से भी हैं वह किसी शहर को ही खरीदने की हैसियत रखते हैं बस उन्हें मौके की तलाश रहती है और वह मौके की तलाश में रहते भी हैं। महंगी जमीनों का उनका शौक ऐसा होना बताया जाता है कि किसी भी जमीन के मामले में वह दुगने की बोली लगाते हैं जिसके बाद अन्य बोली लगाने वाले चुपचाप चले जाते हैं और ऐसा ही कोरिया जिले की जमीन खरीदी का मामला है जहां एक माह में ही दुगनी बोली लगाकर उन्होंने जमीन अपनी पत्नी के नाम कर ली।
तीन करोड़ में बिकी थी कोरिया जिले की जमीन,एक माह में ही 6 करोड़ देकर आरटीओ उप निरीक्षक ने जमीन पत्नी के नाम किया:सूत्र
सूत्रों की माने तो कोरिया जिले की एक जमीन हाल ही में 3 करोड़ में बिकी थी,जमीन विवादित थी फैसले के बाद कब्जा मुकदमा जितने वाला नहीं कर पा रहा था वहीं जमीन आरटीओ उप निरीक्षक को पसंद थी जो बताया जा रहा है वहीं जमीन तब एक भूमाफिया को लेनी पड़ी जिसने दोगुने कीमत पर पुनः जमीन आरटीओ उप निरीक्षक की पत्नी के नाम की जो पहले से ही तय सौदा था। बताया जाता है कि 6 करोड़ में जमीन खरीदी गई और नामांतरण और अन्य कागजी कार्यवाही इतनी तेजी से हुआ कि किसी को कानों कान हवा तक नहीं लगी। आरटीओ उप निरीक्षक ने उक्त जमीन अपनी पत्नी के नाम से खरीदी है ऐसा दावा है। इस जमीन के कीमत की बात करें तो पहले इस जमीन को लेकर कई सौदे हुए लेकिन बोली लगाने आने वालों ने विवाद सुनकर जमीन से किनारा किया वहीं तब जमीन में एक भूमाफिया की एंट्री हुई जो प्रायोजित एंट्री बताई जा रही है जिसने जमीन ली और फिर 3 करोड़ में ली गई जमीन को उसने 6 करोड़ में आरटीओ उप निरीक्षक की पत्नी के नाम कर दिया।
कोरिया जिले की महोरा की जमीन 6 करोड़ में खरीदने की जानकारी के बाद आरटीओ उप निरीक्षक का नाम सामने आया
कोरिया जिले के महोरा ग्राम की जमीन 6 करोड़ में बिकी यह जानकारी जब सामने आई तब यह जानने लोग उत्साहित नजर आए कि आखिर किसने एक माह में ही जमीन की दोगुनी कीमत देकर जमीन खरीद ली,जमीन 3 करोड़ में पहले एक माह बिकी और जब दोबारा सौदा 6 करोड़ में हुआ लोगों को आश्चर्य हुआ और वह खरीदने वाले का नाम जानने आतुर हुए,बताया जाता है कि यही आतुरता आरटीओ उप निरीक्षक तक की पहचान जानने कारगर हुई,एक आरटीओ उप निरीक्षक इतना बड़ा आसामी होगा लोगों ने सोचा नहीं था और जब आरटीओ उप निरीक्षक के बारे में लोगों ने और अधिक पता करने का प्रयास किया तो यही पाया कि वह किसी बड़े शहर को भी खरीदने का माद्दा रखता है,वैसे यह जानकारी सूत्रों द्वारा प्रदान की गई जानकारी है।
क्या आरटीओ विभाग और राज्य सीमा बैरियर पर है अथाह कमाई,क्या राज्य सीमा पर अवैध तस्करी से भी होती है कमाई?
एक आरटीओ उप निरीक्षक की पत्नी के नाम से कई करोड़ों की जमीन खरीदी की जानकारी जब सूत्रों ने बतलाई तब यह सवाल उठाना भी लाजमी है कि क्या आरटीओ विभाग और राज्य सीमा के उसके बैरियर पर अथाह कमाई है,क्या राज्य सीमा पर अवैध तस्करी को छूट देकर पैसे कमाए जा रहे हैं। सवाल इसलिए भी क्योंकि जिस आरटीओ उप निरीक्षक की पत्नी के नाम पर कोरिया जिले में जमीन खरीदी गई 6 करोड़ में वह एक मात्र जमीन नहीं है उसकी पत्नी के नामपर, अंबिकापुर में ही शहर में उसकी पत्नी के नाम पर लगभग 61 डिसमिल भगवानपुर में और लगभग 16 डिसमिल जमीन शहर के फूदुंडिहारि में भी जमीन खरीदी गई है वहीं राजधानी रायपुर के मोवा में भी लगभग 9 डिसमिल जमीन खरीदी गई है, सभी जमीन मुंह मांगे दाम से ज्यादा दाम देकर खरीदी गई है यह भी सूत्रों का कहना है। अब इस तरह लगातार यदि कोई शासकीय कर्मचारी जमीन मंहगे खरीदता रहेगा तो सवाल विभाग पर भी खड़े होंगे जो हो रहे हैं कि क्या आरटीओ विभाग में इस स्तर की कमाई है खासकर राज्य सीमा जांच नाके पर की कोई कर्मचारी अरबपति भी बन सकता है।
तहताकथित आरटीओ उप निरीक्षक के पास हैं अन्य भी अथाह संपत्तियां,जांच होने पर हो सकता है बड़ा खुलासा
सूत्रों की माने तो यह खुलासा एक छोटा खुलासा है,आरटीओ उप निरीक्षक जिसने कोरिया जिले में एक माह पूर्व 3 करोड़ में बिकी जमीन को अपनी पत्नी के नाम पर 6 करोड़ में खरीद लिया है कि यदि संपत्तियों की जांच की जाए तो अथाह संपत्तियां उसने अर्जित कर रखी हैं इस बात का खुलासा हो सकता है। बताया जा रहा है कि उक्त आरटीओ उप निरीक्षक की पत्नी के नाम और भी संपत्तियां खरीदी गईं हैं और सभी बेशमिकती हैं। सूत्रों के अनुसार जांच आवश्यक इसलिए भी है क्योंकि आखिर इतना पैसा एक आरटीओ उप निरीक्षक के पास कहां से आ रहा है जो राज्य सीमा बॉर्डर पर इसलिए तैनात है जिससे अन्य राज्यों से होने वाली तस्करी अवैध गतिविधि रोकी जा सके। क्या राज्य सीमा पर आरटीओ उप निरीक्षक गड़बड़ी कर रहा है और इसलिए ही वह अच्छे पैसे कमा रहा है इसकी जांच अब शासन को करनी चाहिए?


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