- पत्रकार ने पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा को शिकायत कर अपने जान के खतरे की जताई आशंका,कहा सुपारी दिए जाने की बात आ रही है सामने
- पुलिस से आत्म सुरक्षा के संबंध में पत्रकार ने की मांग,जिससे है उन्हें जान का खतरा उसका नाम शिकायत में किया है



-शमरोज खान-
सूरजपुर,25 सितम्बर 2025 (घटती-घटना)। जिले के एक पत्रकार ने पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा से अपने लिए सुरक्षा की मांग की है,पत्रकार ने शिकायत सहित निवेदन पत्र प्रस्तुत कर पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा से अपनी जान की सुरक्षा की मांग तहसीलदार के गुर्गों से कराने की मांग की है जिस शिकायत सह आवेदन पत्र में इस बात का उल्लेख है कि तहसीलदार सत्य आधारित खबरों से जो उनकी दोषपूर्ण कार्य प्रणालियों की खबरें हैं से नाराज होकर खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार से नाराज हैं और वह अब पत्रकार को सबक सिखाने के लिए अपने गुर्गों से धमकी दिलवा रहे हैं साथ ही सुपारी देकर पत्रकार की जान भी लेने का वह प्रयास कर रहे हैं ऐसी सूचना मिली है।
बता दें कि पत्रकार राजस्व विभाग और तहसीलदार की लगातार कमियों आधारित खबरें प्रकाशित कर रहा था और जो सत्य आधारित भी हैं से ही तहसीलदार नाराज हैं,वैसे अब गुंडे मावलियों की ही तरह यदि शासकीय अधिकारी कर्मचारी भी व्यवहार करने लगेंगे वैसा ही उनका आचरण व्यवहार हो जाएगा तो समझा जा सकता है कि एक पत्रकार के लिए सुरक्षा की कितनी आवश्यकता होगी जो सत्य आधारित खबरें प्रकाशित करता है,शासकीय अधिकारी होकर भी अपने गुर्गों से धमकी दिलवाना और पत्रकार को जान से मारने सुपारी जैसी व्यवस्थाएं करना गुंडे मवालियों का ही काम होता है जो अब तहसीलदार करते नजर आ रहे हैं जैसा कि शिकायत में पत्रकार ने आरोप लगाया है। जिले में पदस्थ रहे एक तहसीलदार जो वर्तमान में कोरिया जिले में पदस्थ हैं कि कार्यप्रणाली कैसी थी यह जगजाहिर हो चुका है,पैसे के लिए अपने ईमान से समझौता या उसे ही बेचने का काम करने वाले तहसीलदार की ऑडियो भी वायरल हुई है जिसमें वह पैसे लेकर फैसले की सहमति भी बता रहे हैं और कैसे पैसे के दम पर वह ज्यादा काम करते हैं कैसे किसी प्रकरण को वह नई दिशा में मोड देते हैं यह वह बतला रहे हैं। तहसीलदार अपने ही कारणों से अपनी दोषपूर्ण कार्यप्रणालियों से ही निलंबित भी हुए थे और उन्हें बाद में जिले से बाहर अलग जिले में पदस्थापना मिल सकी थी। पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा अब पत्रकार को सुरक्षा प्रदान करने हेतु पुलिस अधिकारियों को निर्देशित करते हैं कि नहीं यह देखने वाली बात होगी वहीं यह एक विडंबना भी कही जाएगी कि जिस अधिकारी को कानून व्यवस्था के लिए दंडाधिकारी जैसे पद पर नियुक्त किया गया है वह वेतन मात्र से परिवार का पालन पोषण नहीं कर पा रहा है और वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए गैर कानूनी या अवैध तरीके से पैसा कमाने में लगा है और इस काम में बाधा उत्पन्न करने वाले सत्य को उजागर करने वाले पत्रकारों को भी वह अपने प्रभाव और गलत तरीके से कमाए गए पैसे से डराना-धमकाना और उनकी जान भी लेने की कोशिश कर रहा है और जो चिंतनीय स्थिति है,तहसीलदार पद न्याय से जुड़ा पद है जिस पर बैठे व्यक्ति से हर आम व्यक्ति की उम्मीद जुड़ी रहती है कि वह जरूरत पड़ने पर अन्याय होने पर उनसे न्याय प्राप्त कर सकेगा लेकिन यहां कम से कम एक तहसीलदार के मामले में ऐसा नजर नहीं आ रहा है जो फैसला तब करता है जब उसे पैसा मिलता है। फैसले में लाभ उद्देश्य उसकी ऐसी मानसिकता बन चुकी है कि वह एक मामले में जमीन ही हथिया चुका है। ऐसे अधिकारियों को लेकर अब जागरूकता की भी जरूरत है जिन्हें शासन से प्राप्त वेतन अपने बाल बच्चों के पेट भरने के लिए कम पड़ रहा है और जो ऐशो आराम के लिए अपने अब कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं,ऐसे मानसिकता वाले अधिकारियों को चिन्हांकित कर उन्हें सेवा से बर्खास्त किए जाने की आवश्यकता है।
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