-शमरोज खान-
सूरजपुर 12 सितम्बर 2025 (घटती-घटना)। जिले में स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा को ताक पर रखकर मेडिकल वेस्ट के खुले में निपटान का मामला सामने आया है, रिंग रोड किनारे बड़ी मात्रा में खतरनाक जैव चिकित्सा कचरा मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है,,यहां इस्तेमाल की गई दवाइयां, इंजेक्शन, खून से सने ग्लव्स, कॉटन, पट्टियां, प्रेगनेंसी और मलेरिया टेस्ट किट, यहां तक कि एचआईवी जांच किट भी खुले में पड़ी मिली हैं, यह स्थिति न केवल आम नागरिकों बल्कि पर्यावरण और पशुओं के लिए भी खतरनाक साबित हो रही है। राहगीर बदबू और गंदगी से परेशान होकर नाक बंद करके गुजरने को मजबूर हैं, वहीं, आसपास घूम रहे मवेशी इस खतरनाक कचरे को खाते हुए देखे गए हैं, जिससे उनके बीमार होने का खतरा भी बढ़ गया है, यह स्थिति साफ दर्शाती है कि जिले में मेडिकल वेस्ट के निपटान को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
नियमों के अनुसार, मेडिकल वेस्ट को सुरक्षित रूप से संग्रहित कर सरगुजा जिले स्थित अधिकृत बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल सेंटर में भेजा जाना चाहिए, ताकि इसका वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से निपटान किया जा सके, लेकिन जिले के कई अस्पताल और निजी क्लीनिक इस व्यवस्था का पालन नहीं कर रहे हैं, जानकारी के अनुसार, कई संस्थानों ने वर्षों से डिस्पोजल सेंटर को मेडिकल वेस्ट भेजना बंद कर दिया है, जिससे यह कचरा अब खुले में फेंका जा रहा है, स्थानीय लोगों ने इस मामले को लेकर प्रशासन से शिकायत की है और जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है, उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही से महामारी फैल सकती है, लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि आखिर इतनी मात्रा में मेडिकल वेस्ट खुले में कैसे आ गया और संबंधित अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी, इस पूरे मामले पर सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से मिली है, उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी तत्काल जांच करवाई जाएगी, साथ ही जो भी व्यक्ति या संस्था इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाई जाएगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी डॉ. पैकरा ने यह भी स्वीकार किया कि खुले में मेडिकल वेस्ट फेंकने से संक्रमण फैलने की आशंका अत्यंत बढ़ जाती है और यह जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है, सूरजपुर में सामने आया यह मामला यह दिखाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी खामी है। यह जरूरी हो गया है कि जिला प्रशासन इस दिशा में तत्काल कदम उठाए, दोषियों को चिन्हित करे और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो, इसके लिए कठोर व्यवस्था लागू करे, साथ ही आम लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है, ताकि वे ऐसे मामलों की जानकारी समय रहते प्रशासन तक पहुंचा सकें।
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