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कोरिया/पटना@सचिव द्वारा अपने सगे संबंधी और रिश्तेदारों के नाम से फर्जी बिल लगाकर आहरण करने की शिकायत जनदर्शन में पर कार्यवाही अभी तक नहीं

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-रवि सिंह-
कोरिया/पटना,29 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था और इस व्यवस्था को कायम रखने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से पंचायत स्तर पर चुनाव संपन्न कराए जाते हैं। निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपने कार्यों का निर्वहन सुचारू रूप से कर सकें,इसलिए पंचायत स्तर पर सचिव की नियुक्ति की जाती है। जिसका मुख्य कार्य निर्वाचित जनप्रतिनिधि के कार्यों में सहयोग करना,समस्त दस्तावेजी कार्यों को संपन्न करना,लिखा पढ़ी के कार्यों को क्रियान्वित करना और शासन तथा पंचायत के बीच में समंजन स्थापित करना होता है। परंतु जब वही नियुक्त पंचायत सचिव जब अपने आप को पंचायत का सर्वे सर्वा समझने लगे और ग्रामीण जनता के सुविधाओं के लिए तथा निर्माण कार्यों के लिए प्राप्त राशि को भ्रष्टाचार के माध्यम से स्वयं का हक समझने लगे, तो निश्चय ही विकास जमीन स्तर से कोसों दूर होता चला जाता है। और जिस उद्देश्य से पंचायती राज व्यवस्था की कल्पना की गई है,उसके निहित उद्देश्यों की पूर्ति नहीं हो पाती। आमतौर पर यह देखा गया है कि वर्तमान में पंचायत में पदस्थ सचिव अपने निजी हित को सर्वोपरि मानकर चलते हैं,और लिखा पढ़ी तथा कार्यवाही से परे हटकर निर्माण कार्यों के ठेकेदारी,कमीशन खोरी और फर्जी बिल आहरण के लिए स्वयं के सगे संबंधी और रिश्तेदारों के तथाकथित फर्मों के माध्यम से पंचायत को कमाई के जरिया बना लिए। जहां सरपंच कमजोर बुद्धिजीवी वर्ग या कम पढ़ा लिखा है, वहां सचिव अपनी पूरी मनमानी चलाते हैं, जहां ऐसी दाल नहीं गलती,उस पंचायत में सरपंच को प्रलोभन देकर और उसे झांसे में रखकर अपने मनमानी क्रियाकलाप को अंजाम देते हैं।
अधिकांश पंचायत का है यही हाल, नहीं खुलता कभी पंचायत भवन। बिना ग्राम सभा और पंचायत के प्रस्ताव के आहरण हो रहे बिल
अधिकांश ग्राम पंचायत में पंचायत भवन या तो खुलती नहीं या तो नाम मात्र के लिए खुल रहे हैं। सचिव केवल यदा कदा औपचारिकता निभाने के लिए पंचायत में आते हैं। जबकि पंचायत के लिए स्पष्ट निर्देश है कि पंचायत भवन सदैव खुलना चाहिए और सारे क्रियाकलाप पंचायत भवन में ही क्रियान्वित होने चाहिए। बावजूद इसके सचिवों की मनमानी से शासन के दिशा निर्देश भी ठंडे बस्ते में है। प्रस्ताव से लेकर कार्यों के क्रियान्वयन की मीटिंग और राशि आहरण की सारी प्रक्रिया बंद कमरे से संचालित हो रही है। विशेष ग्राम सभा और किसी शिविर के आयोजन पर औपचारिकता निभाने के लिए पंचायत भवनों का केवल उपयोग होता है। इसकी पूरी जिम्मेदारी पंचायत में पदस्थ सचिवों पर आयद होती है। प्रस्ताव और बिलों पर या तो फर्जी दस्तखत कर दिए जाते हैं,या लोगों का मुंह बंद करने के लिए उनके समक्ष थोड़ा प्रलोभन दे दिया जाता है।
सचिव द्वारा अपने सगे संबंधी और रिश्तेदारों के नाम से फर्जी बिल लगाकर आहरण करने की शिकायत जनदर्शन में
ताजा मामला ग्राम पंचायत पूटा का है,जहां पहले सरपंच और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर कलेक्टर जनदर्शन के माध्यम से वर्तमान पदस्थ सचिव रामकुमार राजवाड़े के क्रियाकलापों के कारण स्थानांतरण की मांग की। जनदर्शन में शिकायत देने के बाद भी वर्तमान पदस्थ सचिव रामकुमार राजवाड़े का स्थानांतरण तो नहीं हुआ, परंतु बेहद गंभीर आरोप ग्राम पंचायत के सरपंच, निर्वाचित पंच, और ग्रामीणों ने सचिव रामकुमार राजवाड़े पर लगाते हुए जनदर्शन में पुनः शिकायत दर्ज कराई है। और शिकायत पर जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। यह सर्वविदित है कि ग्राम पंचायत के निर्माण कार्य एवं अन्य मदों में खर्च की गई राशि का आहरण पंचायत के निर्वाचित सरपंच और पदस्थ सचिव स्वयं अपने सगे संबंधियों, निकट के रिश्तेदारों के फर्म के माध्यम से बिल लगाकर आहरण नहीं कर सकते। परंतु ग्राम पंचायत पुटा के सरपंच, पंच और ग्रामीणों ने वर्तमान पदस्थ सचिव रामकुमार राजवाड़े पर गंभीर आरोप लगाते हुए जनदर्शन में आवेदन दिया है कि सचिव ने अपने बेटे के फर्म के नाम से विभिन्न कार्यों की राशि का आहरण किया है, और कई ऐसे फर्मो के फर्जी बिल सामग्रियों के भुगतान के लिए लगाए गए हैं, जो मार्केट रेट से कई गुना अधिक है। पंचायत के विकास निधि के भ्रष्टाचार के यह आरोप बेहद गंभीर हैं और निश्चय है इसकी जांच कर उचित कार्यवाही होनी चाहिए। परंतु जनदर्शन में आवेदन देने के अब तो बाद भी किसी प्रकार की जांच ना होना आने वाले समय में भ्रष्टाचार को और बढ़ावा देने जैसा है।
अधिकांश पंचायत में सचिवों ने पंचायत स्तर पर काम करने के लिए कमीशन पर तय कर लिए हैं ठेकेदार
बैकुंठपुर विकासखंड के अधिकांश पंचायत में पदस्थ सचिवों ने पंचायत को मोटी कमाई का जरिया बनाने के लिए पंचायत में होने वाले विकास कार्यों और निर्माण कार्यों में काम करने के लिए कमीशन युक्त ठेकेदारों को चिन्हित कर लिया है। और एजेंसी भले ही ग्राम पंचायत हो, निर्माण कार्य इन्हीं ठेकेदारों द्वारा करवाये जा रहे हैं। क्योंकि निर्माण कार्यों की राशि की बंदरबांट की जानी है, अतः ऊपर से लेकर नीचे तक कमीशन खोरी के चलते गुणवत्ता तो सोचनीय विषय हो गई है। पंचायत में स्थिति इतनी गंभीर है कि ग्रामीण जनता के निजी हित के लिए स्वीकृत कार्य जैसे आवास,डबरी पशु शेड में भी भारी भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है। स्थिति तो यहां तक गंभीर है कि कई निर्माण कार्य हुए नहीं है, और सचिवों के देखरेख में पूरा पैसा कागजों में निर्माण कार्य दिखाकर आहरण किया जा चुका है। भ्रष्टाचार में सचिवों के लिप्त होने के कारण निर्माण कार्यों की सामग्री अधिकांश स्थानों पर गुणवत्ताविहीन देखा जाना सामान्य बात हो गई है।
पंचायत चुनाव के बाद अधिकांश सचिवों के स्थानांतरण की गुहार लगा रहे निर्वाचित जनप्रतिनिधि और ग्रामीण जन
पंचायत में पदस्थ सचिवों का कार्य केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की कागजी कार्यवाही को और लिखा पढ़ी को संपन्न करना होता है। परंतु अब सचिव स्वयं निजी लाभ के लिए राजनीति में उतरकर पहले चुनाव प्रभावित करते हैं, बाद में विकास कार्यों को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि विगत पंचायत चुनाव के संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधि कलेक्टर से लेकर स्थानीय विधायक और बड़े अधिकारियों तक वर्तमान में पदस्थ पंचायत सचिव के स्थानांतरण की गुहार लगा रहे हैं। क्योंकि नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को पंचायत के कार्यों में भ्रष्टाचार का सीधा प्रयास सचिवों द्वारा करना रास नहीं आ रहा। अब देखने वाली बात यह है कि जनप्रतिनिधियों के आवेदनों निवेदनों पर क्या और कब कार्यवाही होती है। परंतु यह भी होना चाहिए कि समय-समय पर पंचायत सचिवों के प्रभार और कार्य स्थल में स्थानांतरण होने से कमीशनखोरी और ? भ्रष्टाचार की जड़ गहरी नहीं हो पाएंगी और आम जनता को विकास कार्यों का प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा।


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