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सूरजपुर@महिला बाल विकास मंत्री के क्षेत्र में विकास को लेकर ग्रामीण अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

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सूरजपुर,26 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। सुशासन तिहार के दौरान गांव के विकास कार्यों की आवश्यकता अनुसार मांग की गई थी पर मांग पूरी न होने पर सुशासन तिहार के विरुद्ध ही 72 दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर ग्रामीण बैठे हुए हैं,सुशासन तिहार पर जब विकास कार्यों की मांग पूरी नहीं हुई तब पंच लाल जी व ग्रामीण विकासकार्य कराने के लिए हड़ताल का सहारा लिया और 16 मई 2025 से वह हड़ताल पर बैठे हैं पर आश्वासन के भरोसे हड़ताल खत्म करना चाह रहे लोग इसमें अभी तक असफल हैं वहीं एसडीएम ने तो धमकी के सहारे हड़ताल पर बैठे लोगों को हटाने का प्रयास किया पर उसके बाद भी हड़ताल पर बैठे लोग नहीं हटे एसडीएम की धमकी को लेकर शिकायत भी की गई पर इस हड़ताल को खत्म करने के लिए कोई भी ठोस पहल नहीं हो रही,सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि यह हड़ताल महिला बाल विकास मंत्री के विधानसभा के एक गांव में हो रहा है जहां महिला बाल विकास मंत्री अपने खेतों में काम करने को लेकर सुर्खियों में रही पर अपने विधानसभा क्षेत्र में विकासकार्य ना होने से जो हड़ताल पर बैठे हैं उनके लिए उनका ध्यान नहीं गया,अब उन्हें मंत्री अपने क्षेत्र की समस्या दूर करने के लिए लोगों ने बनाया है या फिर अपने खेतों में ही काम करने के लिए अब यह सवाल उठने लगा है, यदि खेतों में ही काम करना था तो मंत्री बनने की आवश्यकता क्या थी? जबकि लोगों ने उनको अपना प्रतिनिधित्व माना है और आपको विधायक बनाया था पर क्षेत्र में ऐसी स्थिति कहीं न कहीं आपके कार्यप्रणाली पर सांवलिया निशान लगता है।
बता दे की 26 जुलाई 2025 को छत्तीसगढ़ सुशासन तिहार के विरुद्ध 72 वाँ दिन अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी,अब 10 जुलाई 2025 से एसडीएम भैयाथान के विरुद्ध जारी रहेगा हड़ताल पानी,बिजली,सड़क,पुलिया, सामुदायिक भवन,वन अधिकार पट्टा,सोलर पंप, ड्यूल पंप इत्यादि का मांग आवेदन के माध्यम से सुशासन तिहार मे किया गया है जिसको न देने की धमकी दिया गया, धमकी देने वालों पर भी होना चाहिए करवाई की गई मांग पूरा होने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगा, ग्राम सपहा थाना चांदनी जिला सूरजपुर के ग्रामीणों कहा कहना है की छत्तीसगढ़ सरकार मूलभूत सुविधाओं को पूरा करती है या आंख में पट्टी बांधकर सुशासन तिहार उत्सव के साथ मनाटी है? जनता भी यह सब देखना चाहती है, एसडीएम भैयाथान के द्वारा लिंक कोर्ट बिहरपुर में हड़ताल खत्म करने की बात कही गई हड़ताल खत्म न करने पर धमकी दिया गया,कि कोई विकास कार्य सपहा के लिए नहीं शासन देगा, जिससे हड़तालकर्ताओ की भावनाओं को आहत करते हुए ठेस पहुंचाया गया है,जिसकी शिकायत माननीय महामहिम राष्ट्रपति एवं छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल महोदय मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य को कर कर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है,ग्रामीणों का कहना है की जब छत्तीसगढ़ शासन के पास कुछ भी नहीं है तो आवेदन क्यों मंगवाए और मंगा करके धमकी दे रहा है,आम आदमी जैसे जी रहा था वैसे जी रहा था तो क्या जरूरत पड़ी सिविर लगाने की सरकार को? इसलिए निमंत्रण देकर थाली परोस कर थाली में कुछ नहीं दिया है आम जनता का अपमान किया,सरकार हड़ताल समय में संशोधन किया गया है जो धान का रोपा और खेती-बाड़ी मजदूरी करना पड़ रहा है जिस कारण से उपस्थिति निर्धारित से समय कम और आगे पीछे हो सकता है लेकिन हड़ताल निरंतर जारी रहेगी ऐसा ग्रामीणों का कहना है, 15 अगस्त 2025 तक मांग पूरा नहीं होने पर आने वाला 15 अगस्त को आजाद होने का जश्न स्वतंत्रता ना मना कर जिन लोगों ने अंग्रेजों के चले जाने के बाद भी 75 -76 वर्षों से गुलाम बना कर ग्राम पंचायत सपहा को मूलभूत सुविधाओं जैसे अधिकारों से वंचित रखा, देश के प्रधानमंत्री,छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री सरगुजा के सांसद भटगांव क्षेत्र के विधायक एवं जिला पंचायत सदस्य जनपद सदस्य ग्राम पंचायत सरपंच का पुतला ग्रामीण दहन करेगे एक साथ, वर्तमान सरकार एवं जनता द्वारा चुने गए जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने मिलकर आज भी गुलामी की जंजीर में बांधकर हड़तालकर्ताओं के पंचायत को रखा गया है, सुशासन जश्न नहीं सरकार मान रही है अपनी कुशासन छिपाना चाह रही है इसका प्रमाण गांव की स्थिति साबित कर रही है, इसका संदेश पूरे दुनिया और देश को सोशल मीडिया के माध्यम से पहुंचाया गया और आगे भी पहुंचाया जाएगा, कम संख्या देखकर भ्रमित ना हो शोषित वंचित पीडि़त लोगों भी समर्थक हैं,15 अगस्त 2025 से पूरे छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार एवं वादा खिलाफी के विरुद्ध गांव गांव अभियान चला कर लोगों को एकजुट करते हुए लोगों की हक की लड़ाई लड़ी जाएगी जहां पर विकास की आवश्यकता है वहां विकास होना चाहिए,एक बार पुनः सदियों से गुलाम बनाए गए लोगों को उनको एहसास कराया जाएगा की 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता शोषित पीडि़त वंचित परिवार को नहीं मिली है जबकि विदेशी अंग्रेज शोषित वंचित पीडि़त परिवार को आजादी देख कर चले गए,लेकिन केंद्र और राज्य शासन प्रशासन और सत्ता में बैठे लोगों के द्वारा जबरदस्ती का स्वतंत्रता दिवस हम लोगों से मनवाया जा रहा है,जिन लोगों ने शोषित वंचित पीडि़त किया है मात्र उन्हें स्वतंत्रता मिली है और वही लोग स्वतंत्रता मानेंगे हम लोग आज भी गुलाम हैं और आज भी गुलामी की जीवन जी रहे हैं गांव गांव के लोगों को आजाद होने तक यह धरना प्रदर्शन जारी रहेगा ऐसा हड़तालकर्ताओं का कहना है।


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