- 1 साल बाद सूरजपुर का दूसरा ठग संजीत अग्रवाल हुआ गिरफ्तार
- करोड़ों रुपए लोगों से ठक्कर फरार था संजीत शेयर मार्केट के नाम पर लिया था पैसा 90 दिन में डबल करने दी थी गारंटी
- दैनिक घटती घटना ने सूरजपुर के दो ठगों को लेकर पहले ही अंदेशा जताया था और एक पहले से ही जेल में है अब दूसरा भी जेल में रहेगा
- सितंबर 2024 में पहली बार संजीत अग्रवाल के खिलाफ 40 लाख के ठगी की हुई थी शिकायत,पर नहीं हो पाई थी गिरफ्तारी
- क्या दो ठगों के चक्कर में इस तरह फंसे लोग की हो गए कंगाल?
- ठगों ने कर्मचारियों से भी करवाया एक ठगी एक महीने में चार बैंकों से दिलवाया लोन
- शासकीय कर्मचारियों ने बैंक से कर्ज लेकर ठगों को सौंपा लाखों…नहीं पटा पा रहे अब बैंकों का वह कर्ज
- शेयर मार्केटिंग के आड़ में संजीत ने किया करोड़ों की ठगी…
- संजीत अग्रवाल ने इम्तियाज़ खान से ठगा 40 लाख…संजीत के पिता व भाई भी थे ठगी में शामिल

-शमरोज खान-
सूरजपुर, 23 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। अशफ़ाक उल्लह सूरजपुर जिले में सबसे बड़ा ठग था उसके बाद दूसरा ठग संजीत अग्रवाल निकला, जबकि अशफ़ाक उल्लाह की गिरफ्तारी 10 महीने पहले हो गई थी पर संजीत पुलिस की गिरफ्तार से बाहर था शिकायत के एक साल बाद पुलिस ने संजीत अग्रवाल को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है बताया जा रहा है कि संजीत अग्रवाल को पुलिस ने बिलासपुर से गिरफ्तार किया है और संजीत को न्यायालय पेश किया गया। सवाल यह है कि संजीत की गिरफ्तारी में आखिर पुलिस को इतना लंबा समय क्यों लग गया?
बता दे की रकम डबल करने व 12 प्रतिशत की दर से प्रतिमाह ब्याज राशि देने का झांसा देकर धोखाधड़ी करने वाले आरोपी संजीत अग्रवाल को थाना सूरजपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार,स्थानीय एक निवासी ने थाना सूरजपुर में दिनांक 21.07. 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराया कि संजीत अग्रवाल के द्वारा शुभ निवेश कोचिंग सेन्टर चलाने के दौरान माह अप्रैल-मई 2024 में यह स्टॉक मार्केट का क्लास करता था इसी दौरान संजीत अग्रवाल द्वारा इसे प्रलोभन दिया कि 10 लाख रूपये लगाने पर हर महीने 12 प्रतिशत की दर से ब्याज राशि दिया जायेगा तथा अंत में मूल रकम वापस कर दिया जायेगा, जिसके झांसे में आकर यह दिनाँक 12/04/2024 को अपने एसबीआई खाता से संजीत अग्रवाल के खाता 10 लाख रूपये दिया। इसके कुछ दिन बाद पुनः 90 दिन में रकम दुगुना करने का प्रलोभन दिया गया जिस कारण यह पुनः 11 लाख रूपये संजीत अग्रवाल के खाता में दिया इसके बदले में संजीत अग्रवाल के द्वारा इसे अपने बैक खाता का एक 10 लाख और एक 11 लाख रूपये का चेक दिया। 90 दिन की अवधि पूर्ण होने पर जब यह संजीत से पैसा की मांग किया तो यह बार बार टाल मटोल करने लगा और इसके बाद संजीत अग्रवाल अपने मोबाइल फोन को बंद करके फरार गया। संजीत अग्रवाल अपना कोचिंग सेन्टर को भी बंद कर दिया। संजीत अग्रवाल के द्वारा 12 प्रतिशत ब्याज प्रति माह व रकम दोगुना करने का झांसा देकर कुल 21 लाख रूपये का ठगी किया। प्रार्थी की रिपोर्ट पर थाना सूरजपुर में अपराध क्रमांक 365/25 धारा 420 भादसं. के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया। डीआईजी व एसएसपी सूरजपुर प्रशांत कुमार ठाकुर ने प्रकरण के आरोपी की पतासाजी कर जल्द पकड़ने के निर्देश दिए थे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष महतो व सीएसपी एस.एस.पैंकरा के मार्गदर्शन में थाना सूरजपुर पुलिस के द्वारा मामले की विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलन कर प्राप्त सूचना के आधार पर बिलासपुर में दबिश देकर आरोपी संजीत अग्रवाल पिता कन्हैयालाल अग्रवाल उम्र 35 वर्ष निवासी भैयाथान रोड सूरजपुर को पकड़ा। पूछताछ पर उसने धोखाधड़ी को अंजाम देना स्वीकार किया जिसे गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया गया जहां से आरोपी को 3 दिन का पुलिस रिमाण्ड लिया गया है। प्रकरण के आरोपी के विरूद्ध पूर्व में 40 लाख रूपये लेकर धोखाधड़ी करने का भी अपराध पंजीबद्ध हो चुका है। इस कार्यवाही में थाना प्रभारी सूरजपुर विमलेश दुबे, एसआई अश्विनी पाण्डेय, प्रधान आरक्षक योगेन्द्र भगत, आरक्षक रविराज पाण्डेय, दशरथ राम, सोनू सिंह सक्रिय रहे।

आखिर लोगों का पैसा निवेश करने का अधिकार किसने दिया? कहां से इन्होंने मान्यता प्राप्त की…?
ठगने वाले जिस तरह से लोगों को लाभ व लालच देकर सोशल मीडिया में अपना प्रचार प्रसार करके वह कई लोगों को लाभ पहुंचाने का उदाहरण प्रस्तुत करके निवेश के नाम पर ठग रहे थे और उनका पैसा कुछ दिनों में ही दुगना करने का दावा कर रहे थे,आखिर इन्हें यह पैसा निवेश करने की मान्यता किसने दी थी? आखिर किस कानून के तहत यह पैसा निवेश कर रहे थे? यह अब जांच का विषय हो चला है वह इसलिए भी हो चला है क्योंकि अब मामला पुलिस के पास अपराध दर्ज हो गया है और पुलिस के लिए यह भी अब पता करना उतना ही जरुरी हो गया है कि आखिर यह लोग पैसे का निवेश नियम से कर रहे थे या फिर नियम विरुद्ध तरीके से कर रहे थे? और यदि नियम विरुद्ध तरीके से कर रहे थे तो आखिर कहां कर रहे थे? सट्टा व जुआ खेल रहे थे या फिर कोई और अवैध काम कर रहे? यदि सूरजपुर पुलिस पूरे मामले को निष्पक्ष जांच करके लोगों के सामने रखती है तो सूरजपुर पुलिस की भी एक बड़ी उपलब्धि होगी और लोगों को भी यह पता चलेगा कि आखिर यह दोनों ठग निवेशकों को ठग कर आखिर करना क्या चाहते थे और क्या हासिल किया और क्यों लोगों को इन्होंने कंगाल किया?

ठगी के मामले में असफाक व संजीत ने नटवरलाल को भी पीछे छोड़ा…
ठगी मामले में आज तक नटवरलाल को ही बादशाहत हासिल है क्योंकि वह ठगी के बाद भी न पकड़े जाने के लिए प्रसिद्ध था। अब सूरजपुर जिले के असफाक और संजीत भी नटवरलाल बनने की ओर अग्रसर थे, क्योंकि उन्हे यह आभास था की उन्हे कोई नहीं पकड़ सकता, क्योंकि कोई शिकायत ही नहीं करेगा और अपना पैसा वापस मिलेगा इस आस में वह बैठे रहेगे। वही ज्यादातर लोग जो दोनो से ठगी का शिकार हुए हैं वह इस इंतेजार में बैठे थे पर जैसे ही सब्र टुटा शिकायत की लाइन लग गई, एक की गिरफ्तारी भी हो गई, संजीत की गिरफ्तारी का इंतजार है।
असफाक व संजीत से आर्थिक नुकसान का झटका खाने वाले न घर के रहे और न घाट के
असफाक उल्लाह और संजीत ने कई लोगों को जिनकी संख्या सैकड़ों में भी हो सकती है वहीं कई सैकड़े हो सकती है ऐसा बताया जा रहा है को आर्थिक नुकसान बड़े आर्थिक नुकसान की ओर धकेल दिया है। पैसा दुगुना करने के नाम पर लाखों लेकर दोनों ने लोगों को ऐसा चुना लगाया की अब पैसा देने वाले लोग न घर के हैं न घाट के,इसका आशय इस तरह समझा जा सकता है की वह शिकायत कर असफाक और संजीत को कानूनी उलझनों में जरूर कुछ दिनों के लिए डाल सकते हैं लेकिन इससे भी उनको कोई लाभ नहीं होना है क्योंकि उनका लाखों डूबना तय है वहीं उन्हे यह मालूम होते हुए भी की अब उनका पैसा उन्हे नहीं मिलना है वह शिकायत दर्ज करने से बच रहे हैं और इसके पीछे की वजह एक ही है वह है की ठग बाहर रहेगें तो उनका पैसा उन्हे मिल सकता है वैसे यह भी उनकी कल्पना मात्र है इसलिए वह मौन हैं। खैर सब कुछ जानकर भी अनजान बनना ही असल मायने में ऐसे ठगों के लिए वरदान साबित होता है और ठगे जा चुके लोग न घर के रह जाते हैं न घाट के।
संजीत ने कई बार बदला ऑफिस नाम
क्या संजीत अग्रवाल शेयर मार्केट के आड़ में लोगों को ठग रहा था? एक आलीशान ऑफिस बनाकर क्या लोगों को यह विश्वास दिला रहा था कि वह शेयर मार्केट में पैसा लगा रहा है पर सवाल यह भी है कि आखिर शेयर मार्केट में ऐसा कौन सा प्रॉफिट हो रहा था कि वह 20 प्रतिशत अपने निवेशकों को दे रहा था और जब उसको शेयर मार्केट में इतना प्रॉफिट हो रहा था तो फिर 24 महीने से फरार था, ऑफिस में भी ताला लगा हुआ है थक कर ठगी के शिकार हुए लोग पुलिस के पास पहुचे समय-समय पर ऑफिस का नाम भी बदलता था कई बार ऑफिस का नाम बदल चुका है अभी जो वर्तमान में उसके ऑफिस का नाम स्टॉक सॉल्यूशन रखा गया था जो अंबिकापुर में होली क्रॉस के सामने था।
ट्रेडिंग कंपनी शेयर मार्केट में 72 दिनों में पैसा दोगुना करने का झांसा देकर संजीत ने प्रार्थी से ठगा था 40 लाख…
ठगी के एक और मामले में कोतवाली पुलिस ने पिता पुत्र समेत तीन पर अपराध दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार इम्तियाज खान ने आरोप लगाया है कि संजीत अग्रवाल, संदीप अग्रवाल, कन्हैयालाल अग्रवाल ने दिनांक 12 मार्च 2024 में रकम 72 दिनों में दोगुना करने का प्रलोभन देकर 40 लाख रूपये का ठगी किया था। पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया है। शिकायतकर्ता ने कहा शिकायत में बताया कि रकम दोगुनी करने का झांसा देकर 40 लाख रूपये की ठगी मेरे से संजीत व उसके परिवार के सदस्यों किया है।
पुलिस को सबसे पहले तो यह जानना होगा कि आखिर लोगों से ठगे हुए करोड़ों की राशि कहां खर्च की गई?
पुलिस भले ही शिकायत पर अलग-अलग अपराध दर्ज कर ली है पर इन दोनों शिकायतों व मामलों के आधार पर पुलिस बड़े घोटाले का भंडाफोड़ कर सकती है यह बड़ा घोटाला इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह घोटाला कम से कई करोड़ का मान जा रहा, आखिर यह दोनों ठगों ने इतना पैसा यदि लिया तो इन पैसों का उन्होंने किया क्या? आखिर यह पैसा वह कहां निवेश कर रहे थे? क्या लोगों को ठगने वाले खुद ठगा गए? या फिर सारा पैसा अंदर कर कुंडली मारकर बैठे हैं? या सारा पैसा ऐसो आराम में खर्च कर दिया? तमाम तरह के सवाल हैं जिसका पुलिस को जवाब भी इन ठगो से ही मिलेगा, इसके लिए पुलिस को कड़ा रुख अपनाना पड़ सकता है ताकि आने वाले समय में ऐसे ठगों से लोगों को बचाया जा सके।
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