शिकायतकर्ताओं ने खुद मानी गलती,ग्रामीणों ने बताया प्रबंधक व्यवहार कुशल और ईमानदार
प्रतापपुर,21 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित चंदौरा के प्रबंधक विजय कुमार के विरुद्ध बीते दिनों लगाए गए दुर्व्यवहार एवं अवैध वसूली के आरोप अब स्वयं शिकायतकर्ताओं के बयान से फर्जी साबित हो चुके हैं। इस प्रकरण में हुई प्रशासनिक जांच ने सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए समिति प्रबंधक को निर्दोष पाया है। ज्ञात हो कि ग्राम चंदौरा निवासी मुकेश जायसवाल तथा कुछ अन्य किसानों द्वारा समिति प्रबंधक पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें गाली-गलौज और अवैध राशि मांगने की बात कही गई थी। मामला प्रकाश में आते ही तहसील प्रशासन द्वारा जांच कराई गई।
ग्रामीणों ने किया समर्थन
अनुविभागीय अधिकारी द्वारा की गई जांच के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने समिति में उपस्थित होकर अपने बयान दिए। सभी ने बताया कि वे विगत 5 वर्षों से समिति से खाद, बीज, नगद ऋण एवं धान विक्रय की सेवाएं ले रहे हैं और प्रबंधक विजय कुमार का व्यवहार सदैव अनुशासित एवं सहयोगात्मक रहा है। किसी भी प्रकार की अभद्रता या अवैध मांग का अनुभव नहीं हुआ है।
समिति प्रबंधक ने जताई पीड़ा
प्रबंधक विजय कुमार ने कहा, फर्जी आरोपों से मानसिक आघात जरूर पहुंचा, पर संतोष है कि प्रशासनिक जांच ने सच्चाई सामने ला दी। मैं वर्षों से निष्ठा से कार्य कर रहा हूँ और भविष्य में भी किसानों की सेवा करता रहूँगा। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि शिकायत पूर्व नियोजित थी और समिति प्रबंधक को जानबूझकर व्यक्तिगत रंजिश के चलते बदनाम करने का प्रयास किया गया। प्रशासन द्वारा समय पर की गई निष्पक्ष जांच और ग्रामीणों की स्पष्ट गवाही से सच्चाई सामने आ सकी, जिससे एक ईमानदार कर्मचारी की छवि बची रही।
नियम पालन पर भड़का था शिकायतकर्ता
प्रबंधक विजय कुमार ने स्पष्ट किया कि आरोप लगाने वाले मुकेश जायसवाल ने अन्य किसानों – सूर्यवंश एवं पंचन – के के.सी.सी. चेक की मांग की थी, लेकिन नियमानुसार किसान की उपस्थिति, ऋण चिट्ठा अदायगी और आवेदन पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी करने की बात कहने पर ही वह नाराज़ हो गया। उन्होंने बताया कि उसी रंजिश के चलते उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई।
शिकायतकर्ता सरपंच ने खुद स्वीकार की सच्चाई
शिकायत में हस्ताक्षरकर्ता ग्राम पकनी के सरपंच मंगल सिंह पिता रनसाय ने स्वयं लिखित वक्तव्य में बताया कि उन्होंने शिकायत पत्र पर मुकेश जायसवाल के कहने पर भूलवश हस्ताक्षर कर दिए थे, जबकि उनके स्वयं के साथ समिति प्रबंधक ने कभी कोई दुर्व्यवहार या वसूली नहीं की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब वे उस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं चाहते।
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