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नई दिल्ली@ जीएसटी में बड़े बदलाव की तैयारी

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12 प्रतिशत टैक्स स्लैब खत्म करने की तैयारी…

अहम भूमिका में अमित शाह …
नई दिल्ली,14 जुलाई 2025 (ए)
। भारत के गुड्स एंड सर्विस टैक्स ढांचे में व्यापक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। केंद्र सरकार 12 प्रतिशत टैक्स स्लैब को पूरी तरह समाप्त करने पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिससे टैक्स प्रणाली को सरल और एकसमान बनाने का लक्ष्य है। इस महत्वपूर्ण सुधार की अगुवाई केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कर रहे हैं, जो राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ चर्चा शुरू करने जा रहे हैं ताकि इस प्रस्ताव पर सर्वसम्मति बनाई जा सके।
12 प्रतिशत स्लैब खत्म करने की जरूरत
जीएसटी परिषद पिछले चार साल से टैक्स स्लैब को सरल करने पर मंथन कर रही है। वर्तमान में 0 प्रतिशत, 5 प्रतिशत,12 प्रतिशत,18प्रतिशत और 28 प्रतिशत के स्लैब के साथ-साथ कुछ विशेष दरें (0.25 प्रतिशत और 3 प्रतिशत) लागू हैं, जिससे टैक्स प्रणाली जटिल हो गई है। 12 प्रतिशत स्लैब को खत्म कर इसके तहत आने वाली वस्तुओं को 5 प्रतिशत या 18 प्रतिशत स्लैब में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि मल्टी-रेट स्ट्रख्र में एकरूपता भी आएगी।
राजस्व पर संभावित प्रभाव
12 प्रतिशत स्लैब को खत्म करने से केंद्र और राज्य सरकारों को सालाना 70,000 से 80,000 करोड़ रुपये के
राजस्व नुकसान का अनुमान है। 2023-24 के आंकड़ों के मुताबिक,जीएसटी का 70-75 प्रतिशत राजस्व 18 प्रतिशत स्लैब से, जबकि केवल 5-6 प्रतिशत राजस्व 12 रप्रतिशत स्लैब से आता है। इस आधार पर सरकार का मानना है कि इस स्लैब को हटाना रणनीतिक रूप से उचित होगा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस सुधार को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की और अब राज्यों के साथ गहन चर्चा शुरू करने वाले हैं। जीएसटी परिषद में इस तरह के बड़े फैसले सर्वसम्मति से ही लिए जा सकते हैं, जिसके लिए शाह राज्यों के बीच सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। यह कदम जीएसटी प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और व्यवसाय-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्यों की मांगें और चुनौतियां
कई गैर-भाजपा शासित राज्यों ने लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने या पूरी तरह हटाने की मांग की है। हालांकि, राजस्व नुकसान के डर से सभी राज्य इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हैं। 12त्न स्लैब को खत्म करने का फैसला राज्यों के बीच मतभेदों को और उजागर कर सकता है, जिसे सुलझाने में शाह की कूटनीतिक भूमिका अहम होगी।
लंबे समय से चर्चा में
जीएसटी दरों को सरल करने की चर्चा सितंबर 2021 से चल रही है, जब 45वीं जीएसटी परिषद बैठक में इसकी जरूरत को स्वीकार किया गया था। फरवरी 2024 में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के समूह ने इस दिशा में काम शुरू किया था। अब इस प्रस्ताव पर तेजी से अमल की उम्मीद है, और संभावना है कि अगली जीएसटी परिषद बैठक में इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
प्रभावित होने वाली वस्तुएं
12 प्रतिशत स्लैब में शामिल कुछ प्रमुख वस्तुएं और सेवाएं हैं…
खाद्य उत्पादः- गाढ़ा दूध,ड्राई फू्र ट्स,फ्रूट जूस,सॉस,नमकीन
घरेलू सामानः- जूट/कपास के बैग,फर्नीचर,साइकिल,छाता
मेडिकल उत्पादः- डायग्नोस्टिक किट, ऑक्सीजन, पट्टियां
सेवाएंः- रेल माल ढुलाई,7,500 रुपये तक के होटल कमरे,गैर-अर्थव्यवस्था हवाई यात्रा इनमें से कुछ को 5 प्रतिशत और कुछ को 18 प्रतिशत स्लैब में स्थानांतरित किया जा सकता है,जिसका असर इन वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।


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