- एक संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरवा के जमीन पर रसूखदार शिक्षक कई सालों से कब्जा किए बैठे रहा और आज प्रशासन मुआवजा दिलाने में असमर्थ क्यों?
- पहाड़ी कोरवा परिवार के जमीन पर कब्जा करने वाले रसूखदार शिक्षक के विरुद्ध पुलिस अपराध दर्ज करने से क्यों घबरा रही?
- दर-दर की ठोकरे खाता संरक्षित पहाड़ी कोरवा परिवार…



–सुदामा राजवाड़े –
रामानुजगंज/बलरामपुर 22 जून 2025 (घटती-घटना)। मौजूदा सरकार के प्रशासन से क्या निरही व गरीब व्यक्ति को न्याय की उम्मीद लगाना उनकी सबसे बड़ी भूल है? यह सवाल इसलिए हो रहा है क्योंकि एक संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार इस समय बड़ी मुसीबत से गुजर रहा है,उनकी जमीन को रसुखदार शिक्षक ने कई सालों तक फर्जी तरीके से अपने नाम दर्ज करवा कर कब्जे में रखा था,लगातार यह परिवार अपनी जमीन पाने के लिए अपनी शक्ति अनुसार भाग दौड़ कर रहा था पर उसे न्याय मिल नहीं पा रहा था,जैसे-तैसे मीडिया के संपर्क में आया पत्रकारों ने इस मुद्दे को उठाया तब जाकर प्रशासन ने उसकी जमीन रिकॉर्ड में तो वापस करा तो दी,पर उस जमीन की वजह से जो परेशानियां हुई उन परेशानियों की भरपाई कौन करेगा? अपनी जमीन रहते हुए मजदूरी के लिए विवस पहाड़ी कोरवा परिवार ने अपना एक सदस्य भी खो दिया, इन्हीं की जमीन पर कब्जा करके रसुखदार शिक्षक सालों तक धान बेचते रहे और कमाई करते रहे, वही निरीह परिवार परेशानियों से जूझता रहा आज जब वह मुआवजे की मांग कर रहा है पर मौजूदा प्रशासन उस पर सुनवाई नहीं कर रहा, जितने साल तक शिक्षक ने जमीन को अपने कब्जे में रखा और उस कमाए पर उसे मुआवजा दिलवाने में प्रशासन को तनिक भी रुचि नहीं है,यहां तक की अपराध भी दर्ज नहीं किया जा रहा, इन्हीं परेशानियों की वजह से कोरवा परिवार का एक सदस्य आत्महत्या कर लिया था अब प्रशासन से लेकर पुलिस प्रशासन दोनों ही कोरवा जनजाति परिवार को न्याय दिला पाने में असमर्थ दिख रही है, जबकि वह न्याय को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं और रसूखदार शिक्षक को बचाने का प्रयास हो रहा है,रसूखदार शिक्षक उन कोरवा जनजाति के लोगों को परेशान करके इस मामले से दूर करने का भी प्रयास कर रहा है पर वही न्याय के लिए बैठी पुलिस भी इस पर ध्यान नहीं दे रही है ऐसा लग रहा है कि पूरी परेशानी इस जनजाति के परिवार लिए ही बनी हो।
यह है पूरा मामला…
पहाड़ी कोरवा परिवार की सेटलमेंट की जमीन को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त शिक्षक बिहारी लाल भगत ने अधिकारियों से मिली भगत कर ऑनलाइन बी1 पर अपना नाम दर्ज करा लिया फिर उसमें सहकारी सोसायटी में धान का पंजीयन कराकर धान बेचा करते थे जिसकी शिकायत कोरवा परिवार ने कलेक्टर बलरामपुर को किया था,बलरामपुर शिकायत करने के बाद शिक्षक द्वारा पीडि़त परिवार पर दबाव बनाया जाने लगा परिवार वालो का आरोप है कि शिक्षक बिहारी लाल भगत के दबाव से धनेश्वर पहाड़ी कोरवा ने आत्महत्या कर ली। बलरामपुर एसपी से पीडि़तों ने की थी कार्यवाही की मांग और बताया था कि दबंग शिक्षकों से है जान का खतरा लेकिन आज तक नही हुई शिक्षको पर कोई कार्यवाही। पीडि़त पहाड़ी कोरवा परिवार ने कार्यवाही नही होने व परिवार का एक सदस्य धनेश्वर ने शिक्षक के दबाव के कारण आत्महत्या कर लिया उसके कार्यवाही व पीडि़तों के खाते में फर्जी तरीके से बेचे गए धान के मुवावजा दिलवाने दुबारा बलरामपुर जाकर जनदर्शन में किया था आवेदन। पीडि़त परिवार की कही कोई सुनवाई नही हुई फिर आश लगाकर पहुचे कमिश्नर कार्यलय आवेदन के माध्यम से पूरी घटना बताते हुवे की थी जल्द कार्यवाही की मांग और बताया था कि जान का खतरा बना हुआ है।
शिकायत करते-करते कोरवा परिवार के साथ हो चुकी एक मारपीट की घटना…
आखिरकार पीडि़त हर अधिकारी से आवेदन में बताया कि जल्द कार्यवाही कराई जाए क्योंकि दबंगो से जान का खतरा बना हुआ है। और पीडि़त बनेश्वर के साथ 10 जून को दोपहर 1 बजे लगभग घटना घट ही गयी। जिसने घटना को अंजाम दिया वह शिक्षक का करीबी बताया जाता है सूत्र बताते है कि शातिर शिक्षक के कहने पर घर मे ढककर पीडि़त बनेश्वर को लाठी डंडे से मारकर पैर फेक्चर कर दिया गया है, लड़ाई के बाद पीडि़त को जिसने मार है वह शिक्षकों से मिलने गया था।
क्या फर्जी तरीके से किसी की जमीन अपने नाम कर फर्जी धान बेचना अपराध नहीं?
दो शिक्षक को आखिर कहां से हिम्मत मिली कि किसी गरीब की जमीन अपने नाम कराकर उस जमीन पर कई सालों तक धान उगाते रहे और धान खरीदी केंद्र में पंजीयन कर के धन बेचते रहे,एक तो दूसरे की जमीन फर्जी तरीके से हथियाली और फर्जी जमीन पर शासन को चूना लगाते रहे क्या यह मामला प्राधिक नहीं है और यदि अपराधिक है तो फिर पुलिस अपराध दर्ज करने से क्यों कतरा रही है क्या पुलिस भी उन दोनों शिक्षकों से डरी हुई है या फिर वह दोनों शिक्षक पुलिस को एक बहुत मोटी रकम उनके तक पहुंच चुके हैं जिसकी वजह से गरीब को न्याय नहीं मिल पा रहा उसे मुआवजा नहीं मिल पा रहा है? आखिर पुलिस कब तक उन दोनों शिक्षकों को अपराध से बचाते रहेंगे?
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