नई दिल्ली,31 मई 2025 (ए)। दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर जिस तरह से कहर बरपाया उसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। जब,इसने 100 घंटे की लड़ाई के दौरान पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को जिस तरह से ध्वस्त किया उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा कि इस मिसाइल ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की रातों की नींद हराम कर दी।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व महानिदेशक अतुल डी राणे ने बातचीत में ब्रह्मोस की ऐसी-ऐसी खूबियां गिनवाईं जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। उन्होंने सुखोई-30 एमके के साथ इसका एकीकरण और मिसाइल के भविष्य के बारे में जानकारी साझा की।
कैसे ब्रह्मोस रूसी से स्वदेशी बनता चला गया
उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल को बनाते समय, एक खास बात का ध्यान रखा गया। रूस के इंजन को आधार मानकर काम शुरू किया गया। शुरुआत में, मिसाइल का सिर्फ 7 प्रतिशत हिस्सा भारत में बना था। फिर इसे जल्दी ही 15त्न तक बढ़ा दिया गया। इसके बाद, भारतीय कंपनियों ने रूस में बनने वाले सामान को खुद बनाना शुरू कर दिया। इसे ही स्वदेशीकरण कहते हैं। पूर्व महानिदेशक राणे ने कहा कि धीरे-धीरे, वर्षों में,भारत में बने सामान की मात्रा बढ़ती गई। अलग-अलग चीजें भारत में बनने लगीं। भारतीय रक्षा उद्योग ने बहुत अच्छा काम किया है। आज, हम लगभग 84 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं। लेकिन अभी जो मिसाइलें उड़ रही हैं, उनमें लगभग 74 से 75 प्रतिशत सामान ही भारत में बना है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में बने सिस्टम को युद्ध में इस्तेमाल करने से पहले जांचना और पास करना होता है। इसका मतलब है कि मिसाइल का ज्यादातर हिस्सा अब भारत में ही बन रहा है। लेकिन कुछ हिस्से अभी भी जांच की प्रक्रिया में हैं। एक बार जब ये हिस्से पास हो जाएंगे, तो मिसाइल पूरी तरह से भारत में बनी हुई मानी जाएगी।
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