सरकारी नीतियों से निजी कंपनियों को कैसे लाभ हुआ
सीएजी को इसकी करनी चाहिए ऑडिट
नई दिल्ली,13 अप्रैल 2025 (ए)। कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर लोगों को लूटने का आरोप लगाते हुए जवाबदेही तय करने का आह्वान किया है। पार्टी ने मांग की कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को यह ऑडिट करना चाहिए कि सरकारी नीतियों से निजी कंपनियों को किस तरह फायदा हुआ। विपक्षी दल ने यह मांग भी की कि केंद्रीय सतर्कता आयोग और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को यह भी पता लगाना चाहिए कि क्या इसमें जानबूझकर लापरवाही या मिलीभगत की गई थी।कांग्रेस के प्रभारी महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, भारत की जनता लूटी जा रही है—मोदी सरकार एक तरफ कर का बोझ बढ़ाकर जहां जनता की जेब काट रही है, वहीं दूसरी तरफ निजी व सरकारी तेल कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं! यह खुला आर्थिक शोषण है!”उन्होंने लिखा, सच्चाई यह है: मई 2014 में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.20 रूपये और डीजल पर 3.46 रुपये था, जो मोदी सरकार में पेट्रोल पर 19.90 रुपये और डीजल पर 15.80 रुपये है। 357 प्रतिशत और 54 फीसद बढ़ोतरी! कांग्रेस नेता ने दावा किया कि सरकार ने पिछले 11 वर्षों में पेट्रोलियम क्षेत्र से 39.54 लाख करोड़ रुपये कमाए, फिर भी उसने लोगों को कोई राहत नहीं दी।कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकारी कंपनियों के साथ-साथ निजी तेल कंपनियों को भी रिफाइनिंग और विपणन से मोटी कमाई हो रही है, जबकि आम आदमी महंगे पेट्रोल-डीजल के बोझ तले दबा है।रमेश ने कहा, मुद्दा गंभीर है! सीएजी को ऑडिट करना चाहिए कि किस तरह सरकार की नीतियों ने इन निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया। सीवीसी और सीबीआई को इसकी जांच करनी चाहिए कि क्या इसमें जानबूझकर लापरवाही या मिलीभगत थी?उन्होंने कहा, जनता के पैसे का हिसाब चाहिए—जवाबदेही तय होनी चाहिए! कांग्रेस महासचिव ने मीडिया में आई एक खबर साझा की, जिसमें कहा गया है कि तेल कंपनियां बड़ा लाभ कमा रही हैं, लेकिन फिर भी दाम नहीं घटा रही हैं।
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