नई दिल्ली,13 मार्च 2024 (ए)। क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर साझा किए गए किसी पोस्ट पर थम्स अप इमोजी लगाना मुश्किलें पैदा कर सकता है। इस पर हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी भी पोस्ट पर थम्स अप इमोजी लगाना उस पोस्ट का समर्थन करना नहीं माना जा सकता है, बल्कि उसे सिर्फ उस सूचना की जानकारी मिलने की पुष्टि करने के तौर पर लिया जा सकता है। जस्टिस डी कृष्णकुमार और जस्टिस आर विजयकुमार की खंडपीठ ने कहा कि थम्स अप (अंगूठे वाले) इमोजी को ओके शब्द के विकल्प के रूप में माना जा सकता है, न कि हत्या के जश्न के रूप में उसे समझा जा सकता है। खंडपीठ ने इसके साथ ही रेलवे सुरक्षा बल के उस कॉन्स्टेबल को फिर से पद पर बहाल करने का आदेश दिया है, जिसे पद से हटा दिया गया था। इससे पहले सिंगल बेंच ने भी मेघालय में एक वरिष्ठ अधिकारी की हत्या से संबंधित व्हाट्सएप मैसेज पर थम्स अप इमोजी पोस्ट करने के आरोप में नौकरी से हटाए गए कॉन्स्टेबल को फिर से पद पर बहाल करने का आदेश दिया था। महानिदेशक रेलवे सुरक्षा बल बनाम नरेंद्र चौहान के मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा, मर्डर से जुड़े किसी भी पोस्ट पर थम्स अप इमोजी को किसी भी हाल में क्रूर हत्या का जश्न मनाने के तौर पर नहीं माना जा सकता है।
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