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मनेंद्रगढ़,@ मनेंद्रगढ़ परियोजना में रेडी टू ईट आपूर्ति पर उठे सवाल

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आंगनबाडि़यों तक समय पर नहीं पहुंच रहा
पोषण आहार,स्व-सहायता समूह की कार्यप्रणाली और विभागीय निगरानी पर गंभीर आरोप…
-संवाददाता-
मनेंद्रगढ़,14 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
कुपोषण की समस्या को दूर करने और गर्भवती महिलाओं, शिशुवती माताओं, किशोरी बालिकाओं तथा छह वर्ष तक के बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित पोषण आहार योजना की जमीनी व्यवस्था को लेकर मनेंद्रगढ़ परियोजना में गंभीर सवाल उठ रहे हैं,आरोप है कि परियोजना क्षेत्र के कई सेक्टरों की आंगनबाडि़यों तक रेडी टू ईट पोषण आहार समय पर और निर्धारित मात्रा में नहीं पहुंच रहा है,जिसके कारण सैकड़ों हितग्राहियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार कई आंगनबाड़ी केंद्रों में निर्धारित समय पर पोषण आहार उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्यकर्ताओं को हितग्राहियों को खाली हाथ लौटाना पड़ता है,इससे ग्रामीणों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की स्थिति भी बन रही है, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि आपूर्ति में लगातार कमी या देरी हो रही है तो यह योजना के उद्देश्य और निगरानी व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर विषय है।
मंगलवार को वितरण, लेकिन समय पर नहीं पहुंचता आहार- बताया जा रहा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रत्येक मंगलवार को हितग्राहियों को रेडी टू ईट पोषण आहार वितरित किया जाना है, आरोप है कि संबंधित स्व-सहायता समूह द्वारा कई सेक्टरों में निर्धारित समय से पहले पर्याप्त मात्रा में पोषण आहार उपलब्ध नहीं कराया जाता, परिणामस्वरूप वितरण के दिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी समस्या उपलब्ध स्टॉक की होती है, नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि कई बार उन्हें दर्ज हितग्राहियों की संख्या के अनुरूप पूरा पोषण आहार प्राप्त नहीं होता, ऐसी स्थिति में सभी हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा में सामग्री देना मुश्किल हो जाता है, ग्रामीणों को जब पोषण आहार नहीं मिलता तो उनका आक्रोश कार्यकर्ताओं पर निकलता है और कई बार कार्यकर्ताओं पर ही गबन के आरोप लगाए जाने की स्थिति बनती है।
दर्ज संख्या से कम पैकेट मिलने का आरोप-कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कुछ मामलों में आंगनबाड़ी केंद्रों की दर्ज हितग्राही संख्या से भी कम पैकेट उपलब्ध कराए जाते हैं। यदि केंद्र पर जितने हितग्राही दर्ज हैं, उनकी संख्या के अनुपात में सामग्री उपलब्ध नहीं होगी तो वितरण के दौरान विवाद की स्थिति बनना स्वाभाविक है, यह समस्या विशेष रूप से दूरस्थ, वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों की आंगनबाडि़यों में अधिक गंभीर होने की बात कही जा रही है, ऐसे क्षेत्रों में समय पर आपूर्ति नहीं पहुंचने की स्थिति में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराना और भी कठिन हो जाता है।
परियोजना अधिकारी की निगरानी पर भी सवाल-इस पूरे मामले में मनेंद्रगढ़ परियोजना कार्यालय की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं, आरोप है कि संबंधित अधिकारी द्वारा मैदानी स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता,यदि नियमित निरीक्षण और हितग्राहियों से सीधे जानकारी ली जाती है तो पोषण आहार की आपूर्ति,मात्रा और वितरण में होने वाली संभावित गड़बडि़यां समय रहते सामने आ सकती हैं, सवाल यह भी है कि क्या परियोजना कार्यालय द्वारा स्व-सहायता समूह से प्राप्त स्टॉक और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाई गई सामग्री का नियमित मिलान किया जाता है? क्या केंद्रवार हितग्राही संख्या के आधार पर उपलब्ध कराए गए पैकेटों का सत्यापन होता है? यदि ऐसा सत्यापन हो रहा है तो कमी की शिकायतें लगातार सामने क्यों आ रही हैं?
जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
मामले में जिला प्रशासन द्वारा यदि निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो प्रत्येक सेक्टर में स्व-सहायता समूह से प्राप्त रेडी टू ईट की मात्रा, आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाई गई सामग्री,वितरण रजिस्टर और हितग्राहियों की वास्तविक संख्या का मिलान कराया जा सकता है,इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और हितग्राहियों से सीधे जानकारी लेने पर जमीनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है, पोषण आहार योजना का सीधा संबंध बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य से है,ऐसे में आपूर्ति में देरी या मात्रा में कमी को सामान्य प्रशासनिक समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करते हुए सुधारात्मक कार्रवाई जरूरी होगी,अब सवाल यह है कि मनेंद्रगढ़ परियोजना में रेडी टू ईट की आपूर्ति व्यवस्था को जिला प्रशासन कब गंभीरता से जांचेगा और क्या संबंधित अधिकारी तथा आपूर्तिकर्ता समूह की जवाबदेही तय होगी,समय पर और निर्धारित मात्रा में पोषण आहार पहुंचे,तभी कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ का लक्ष्य जमीन पर प्रभावी रूप से हासिल किया जा सकेगा।


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