नई दिल्ली,16 जून 2026। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य, फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहेगा और यहां से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का टोल नहीं लगाया जाएगा। हालांकि, ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान की ओर से आई नई प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है। तेहरान का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का टोल नहीं लगाएगा। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कुछ विशेष सेवाओं के बदले शुल्क लिया जा सकता है। ईरान का तर्क है कि यह टोल नहीं बल्कि सेवा शुल्क होगा, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत वैध माना जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने टोल वसूली को नया नाम देते हुए इसे सुविधा शुल्क या सेवा शुल्क बताया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर टोल लगाना गैरकानूनी माना जा सकता है, इसलिए वह केवल उन सेवाओं के लिए शुल्क लेने की बात कर रहा है जो जहाजों को उपलब्ध कराई जाएंगी। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये सेवाएं क्या होंगी और उनका स्वरूप कैसा होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से पूरी तरह खुल चुका है और यह मार्ग टोल-मुक्त रहेगा। उन्होंने इसे अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते की एक बड़ी उपलब्धि बताया था।
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