-संवाददाता-
अम्बिकापुर,30 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)। अंबिकापुर के पास स्थित ग्राम सरगवां में एक अजीबो-गरीब घटना सामने आई,जिससे गांव में हडकंप मच गया। यहां परंपरागत पूजा के दौरान बकरों की बलि दी गई और उनका मांस गांववासियों को प्रसाद के रूप में खिलाया गया। लेकिन बाद में यह खुलासा हुआ कि जिन बकरों की बलि दी गई थी,उनमें से एक बकरा एक रेबीज संक्रमित कुत्ते द्वारा काटा गया था। यह खबर फैलते ही गांव में डर का माहौल बन गया, क्योंकि 400 से ज्यादा ग्रामीणों ने वह मांस खाया था। ग्राम सरगवां में 28 दिसंबर को परंपरागत पूजा का आयोजन किया गया था, जिसमें गांव के देवी-देवताओं की पूजा की जाती है और बकरों की बलि दी जाती है। इस पूजा में करीब 12 से 15 बकरों की बलि दी गई थी और इन बकरों का मांस प्रसाद के रूप में लगभग 400 ग्रामीणों को बांटा गया था। कुछ समय बाद यह जानकारी सामने आई कि इनमें से एक बकरा रेबीज संक्रमित कुत्ते द्वारा काटा गया था, जिससे गांव में चिंताएं बढ़ गईं। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच नारायण प्रसाद और उपसरपंच कृष्णा सिंह ने बकरों की खरीदारी गांव के ही नान्हू राजवाड़े से की थी। नान्हू को यह जानकारी थी कि एक बकरा रेबीज संक्रमित कुत्ते से प्रभावित हुआ था,लेकिन उसने इस बात को जनप्रतिनिधियों से छुपाया। अब इस बात का डर सता रहा है कि कहीं वे और उनके परिवार के लोग रेबीज की चपेट में न आ जाएं। इस भय के चलते गांव के लोग एंटी-रेबीज वैक्सीन लेने की तैयारी में हैं। इस डर के मद्देनजर, मंगलवार को गांव के लोग सीएमएचओ से मिले और स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की मांग की। प्रशासन ने इस मामले पर तुरंत कार्रवाई करते हुए 31 दिसंबर को एक स्वास्थ्य शिविर लगाने का निर्णय लिया, जिसमें ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी।
ग्राम सरगवां में यह पूजा हर तीसरे साल आयोजित की जाती है। यह एक धार्मिक परंपरा है, जिसमें बकरों की बलि दी जाती है और उनका मांस प्रसाद के रूप में गांव के पुरुषों को वितरित किया जाता है। हालांकि, इस बार यह परंपरा एक गंभीर समस्या का कारण बन गई,क्योंकि इस पूजा के दौरान मांस खाने से स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता था। पशु चिकित्सक डॉ. चंदू मिश्रा ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर बकरा रेबीज संक्रमित था, तो भी अगर उसका मांस अच्छी तरह से पकाया गया हो,तो उसमें रेबीज के वायरस के प्रभाव से बचाव होता है। उचित तापमान पर मांस पकाने से रेबीज के वायरस मर जाते हैं। हालांकि,एहतियात के तौर पर स्वास्थ्य जांच जरूरी है ताकि कोई भी संभावित खतरा टाला जा सके। इस घटना ने न केवल सरगवां गांव में बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी एक चेतावनी का संकेत दिया है कि धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। इस घटना के बाद से गांववाले अब इस बात को लेकर जागरूक हो गए हैं कि भविष्य में ऐसे किसी भी आयोजन में स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए।
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