अंबिकापुर,12 फरवरी 2024 (घटती-घटना)। शहर के प्रसिद्ध समाजसेवी 85 वर्षीय डॉ. भागीरथी गौरहा का निधन के बाद उनके पूर्व इच्छा के अनुसार परिजन ने उनके शरीर को मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर को दान किया है। देहदान करने की सारी प्रक्रिया उनके डा. श्रीधर गौरहा द्वारा की गई।
डॉ. भागीरथी गौरहा मूलतः बिलासपुर के ग्राम सकरी के रहने वाले थे और अंबिकापुर उनका कर्मभूमि रहा है। वह 1961 में अंबिकापुर में एक शिक्षक के रूप में कार्य प्रारंभ किया था। ये एनसीसी अधिकारी, अग्निशमन अधिकारी, रेडक्रास कौंसलर एवं सचिव, आस्था निकुंज वृद्धाश्रम के फाउन्डर सहित उच्च कोटि के पौराणिक,भागवताचार्य, ज्योतिषाचार्य और संस्कृत भाषा के प्रकाण्ड विद्वान थे। ये पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। इन्हें इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जहां इलाज के दौरान सोमवार की अहले सुबह करीब 4 बजे उनका निधन हो गया। इसके बाद परिजन ने लोगों को अंतिम दर्शन करने के लिए उनके शव को बंगाली चौक स्थित निवास पर रखा गया।
इसके बाद परिजन ने उनके पूर्व इच्छा के अनुसार उनके मृत शरीर को मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर को दान करने का निर्णय लिया गया। परिजनों की सूचना पर मेडिकल कॉलेज के रचना विभाग की टीम ने उनके घर पहुंच कर सारी प्रक्रिया पूर्ण की। सारी प्रक्रिया स्व. भागीरथी गौरहा के पुत्र डॉ. श्रीधर गौरहा ने पूर्ण की।
डॉ. भागीरथी गौरहा का निधन के बाद उनके शव को अंतिम दर्शन के लिए बंगाली स्थित उनके निवास पर रखा गया था। इस दौरान शहर व आस पास के काफी लोग उनके शव का दर्शन करने पहुंचे। उनका शव यात्रा उनके घर से मरिन ड्राइव तक निकाला गया। इसके बाद उनके शरीर को मेडिकल कॉलेज के रचना विभाग को सौंप दिया गया। इस दौरान रचना विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रंनजना सिंह आर्या व टीम के अन्य लोग शामिल रहे। मेडिकल टीम ने स्व. भागीरथी गौरहा के शव को सहसम्मान फूूलों से सजित मुक्तांजली वाहन से मेडिकल कॉलेज ले गए।
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