- वाहन का फिटनेस करने के लिए देर रात तक अधिकारी का इंतजार…फिर भी नहीं पहुंचते अधिकारी बिना जांच फिटनेस के लौटती है वाहन
- अंबिकापुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में मनमानी खत्म होने का नहीं ले रहा नाम
- क्या संभागीय उड़न दस्ता दल सिर्फ वसूली में व्यस्त,वाहनों की जांच करने की बजाए वसूली ही उद्देश्य?
- उड़न दस्ता दल क्यों नहीं करता यात्री बसों व टैक्सी परमिट गाडि़यों की जांच?
- अंतरराज्यीय यात्री बस बारात परमिट पर दौड़ रहे क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को है जानकारी फिर भी नहीं होती कार्यवाही
- परमिट किसी भी राज्य के बॉर्डर तक पर राज्य के कई जिलों में बिना परमिट यात्रियों को लेने पहुंच जाती हैं अंतरराज्यीय बस
- परमिट किसी अन्य वाहन की और उसी परमिट पर दौड़ती है कोई अन्य वाहन पर उड़न दस्ता प्रभारी नहीं पकड़ पाते ऐसे वाहनों को

–भूपेन्द्र सिंह –
अंबिकापुर 31 जनवरी 2024 (घटती-घटना)। अंबिकापुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में मनमानी खत्म होने का नहीं ले रहा नाम। पिछले एक हफ्ता से वाहन संचालक फिटनेस करने के लिए हो रहे परेशान। सूरजपुर के जिला परिवहन अधिकारी को बनाया गया है अंबिकापुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय प्रभारी अधिकारी पर समय पर नहीं पहुंचते अंबिकापुर। प्रतिदिन फिटनेस करने बस व ट्रक पहुंचती है कार्यालय पर बिना फिटनेस लौटना पड़ता है वापस। उड़न दस्ता दल क्यों नहीं करता यात्री बसों व टैक्सी परमिट गाडि़यों की जांच? अंतरराज्यीय यात्री बस बारात परमिट पर दौड़ रहे क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को है जानकारी फिर भी नहीं होती कार्यवाही। परमिट किसी भी राज्य के बॉर्डर तक पर राज्य के कई जिलों में बिना परमिट यात्रियों को लेने पहुंच जाती हैं अंतरराज्यीय बस।
जानकारी के अनुसार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अंबिकापुर में अव्यवस्था का आलम परेशानियों का अंबार है और वसूली का अड्डा बना हुआ है, यहां पर पदस्थ कर्मचारी व अधिकारी बेलगाम है मनमानी उनका काम है, पिछले एक हफ्ता से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अंबिकापुर वाहन मालिकों को परेशान कर रहा है उसकी वजह यह है कि क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी 7 दिनों से छुट्टी में है और आगे कई दिनों तक छुट्टी में रहेंगे, जिस वजह से सूरजपुर के जिला परिवहन अधिकारी को वहां का प्रभार दिया गया है, पर वह वहां पर समय पर नहीं पहुंचते जबकि फिटनेस के लिए वहां वाहन सुबह से ही आकर खड़ी हो जाती है और प्रभारी परिवहन अधिकारी के आने का इंतजार होता है पर अधिकारी पहुंचे नहीं पाते और वाहन फिटनेस के लिए सुबह से रात तक खड़ी हो जाती हैं और फिर शाम को उन्हें बिना फिटनेस जाना पड़ता है यह समस्या पिछले एक हफ्ते से देखी जा रही है पर इस और किसी का भी ध्यान नहीं है, बस से लेकर व्यावसायिक गाडि़यां फिटनेस के लिए यह तो आ जाती है क्यों की उनकी यह मजबूरी है कि अपना काम धाम सब छोड़कर सड़क पर चलने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट की जरूरत है जो सर्टिफिकेट कार्यालय से मिलेगा पर कार्यालय की स्थिति यह है की अधिकारी समय पर पहुंचते नहीं और फिटनेस होता नहीं जबकि वाहन मालिकों का कहना है की फिटनेस के लिए जिस तिथि को निर्धारित किया जाता है इस तिथि पर हम वाहन लेकर पहुंचते हैं पर इसके बावजूद उसे तिथि पर फिटनेस ना होना हमारे समय के साथ-साथ हमारे व्यापार का भी नुकसान है।
उड़न दस्ता जांच में नहीं वसूली में व्यस्त
सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग द्वारा संभागीय स्तर पर उड़न दस्ता दल गठित कर रखा गया है ताकि सड़क सुरक्षा पर ध्यान दिया जा सके पर क्षेत्रीय कार्यालय अंबिकापुर का संभागीय उड़न दस्ता दल इस समय अलग ही दास्तान बयां कर रहा है, इन्हें वाहन जांच करने में दिलचस्पी नहीं है सिर्फ उगाही में इनका ध्यान है यही वजह है कि यात्री बसें बिना परमिट की दौड़ रही हैं और जो बस दौड़ भी रही है तो परमिट किसी और का और चल रही है कोई और बस यहां तक की कंडम बसें भी सड़कों पर दौड़ रही हैं पर उड़न दस्ता प्रभारी को जांच करने की फुर्सत नहीं सूत्रों की माने तो उड़न दस्ता दल प्रभारी के गाड़ी में दो अन्य निजी व्यक्ति बैठे रहते हैं और वह हमेशा उस गाड़ी में उनके साथ मिल जाएंगे ऐसा बताया जाता है कि जांच के एवज में सिर्फ उगाही होती है और उगाही का पैसा उन दोनों निजी लोगों के खाते में अलग-अलग माध्यम से जाता है फिर उनके खाते से प्रभारी साहब के खाते में जाता है यदि जांच हो जाए तो उगाही की असलियत ही खुल जाएगी पर सवाल यह है कि आखिर जांच करें तो करेगा कौन क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी का काम नहीं है जांच करना फिर भी उड़न दस्ता दल सही तरीके से काम ना कर पाने की वजह से शिकायतों पर उन्हें खुद उतरना पड़ता है जांच में। जांच में निष्पक्षता नहीं सिर्फ दिखती है तो वसूली।
यात्री बसों की परमिट में सबसे बड़ा झोल
छत्तीसगढ़ में अंतरराज्यीय यात्री बसों के परमिट में सबसे बड़ा झोल देखने को मिलता है, वह झोल है कि यात्री बसें टूरिस्ट परमिट पर एक राज्य से दूसरे राज्य यात्रियों को लेकर जा रहे हैं, सबसे बड़ा आश्चर्य की बात तो यह है कि संभागीय उड़नदस्ता दल मौजूद होने के बाद आखिर ऐसा कैसे हो रहा है? सूत्रों की माने तो कुछ ऐसी भी यात्री बसें हैं जो छत्तीसगढ़ के बाहर से आती हैं और छत्तीसगढ़ के बॉर्डर के जिले का परमिट लाते हैं और छत्तीसगढ़ के कई जिलों से यात्री भरकर रोज आती है और जाती हैं। पर यह सब जानकारी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में पदस्थ अधिकारियों व उड़न दस्ता दल को है पर कार्यवाही नहीं है।
कंडम बसें दौड़ रही सड़कों पर
यात्री बसें जो यात्रियों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही है उसमें से लगभग यात्री बस कंडम हालत में है किसी का हेडलाइट टूटा है तो किसी का सामने का कांच टूटा है तो किसी का ब्रेक लाइट टूटा है यदि देखा जाए तो यात्रियों को बिना सुविधा वाली वाहनों में सफर करना पड़ रहा है, जो खतरे से खाली नहीं है फिर भी उड़ान दस्ता दल इन वाहनों पर कार्यवाही कर पाने में असमर्थ दिख रहा है। कई यात्री बस तो ऐसी हैं जिसमें यात्री बरसात में बैठकर जाते तो जरूर है पर टपकती बस की छतो की वजह से भीग भी जाते हैं। बस से पानी टपकने के बावजूद यात्रियों को पैसा देने के बाद बस में यात्रा करना मजबूरी बन जाता है।
दुर्घटना होने पर भी नहीं पहुंचते उड़न दस्ता दल प्रभारी,दुर्घटना स्थल पर
उड़न दस्ता दल का यह भी काम है कि यदि यात्री बस है या स्कूल बस कभी कोई हादसा होता है तो वहां पर पहुंचकर जांच परख करना चाहिए पर ऐसा करने से भी उड़न दस्ता दल परहेज करता है ,किसी भी गंभीर दुर्घटना में उड़न दस्ता दल नहीं पहुंचता जिस वजह से दुर्घटना की वजह का पता नहीं चलता ,कई बार दुर्घटना यात्री बसों की कमियों की वजह से भी हो जाती है जिसे उड़न दस्ता दल नजअंदाज करता है।
यात्री बसें बन गई है माल वाहक बसें
यात्री बसों का काम है यात्रियों को लेकर चलना पर अधिकांश यात्री बसें यात्रियों से ज्यादा माल वाहक बनकर दौड़ रहीं हैं, यात्रियों से ज्यादा कमाई उन्हें माल ढोने में हो रही है जिस वजह से वह माल वाहक यात्री बसें बनकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं,पर उड़न दस्ता दल को जांच करने की फुर्सत नहीं।
20 प्रतिशत बस बिना परमिट की दौड़ रही हैं,वहीं 60 प्रतिशत कंडम बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं
पूरे संभाग में यदि यात्री बसों की हालत की बात की जाए तो 20 प्रतिशत यात्री बसें बिना परमिट के यात्रियों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं जिसकी सुध लेने की फिक्र उड़न दस्ता दल को नहीं है वहीं 60 प्रतिशत बसें कंडम हालत में हैं जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकती हैं यात्रियों की जान को खतरा हो सकता है,लेकिन उड़नदस्ता दल को कोई वास्ता नहीं इन सभी चीजों से उसे केवल समय पर वसूली से मतलब है जो वह कर रहा है। आज यात्री बसों को देखकर ही जाना जा सकता है किस बस की कैसी हालत है फिर भी उड़नदस्ता दल इस देखकर अनदेखा कर रहा है यात्रियों की जान जोखिम में डाल रहा है।
आखिर दो निजी व्यक्ति उड़नदस्ता दल प्रभारी के साथ प्रतिदिन क्यों दिखते हैं उनकी गाड़ी में?
एक सवाल यह भी है जो लगातार उठ रहे हैं की उड़नदस्ता दल प्रभारी की गाड़ी में दो निजी लोग क्या करते रहते हैं। वह किस काम के लिए उनकी गाड़ी में नियुक्त हैं। लोगों का कहना है की उड़न दस्ता दल प्रभारी जब भी जांच में निकलते हैं उनकी गाड़ी में दो उनके निजी लोग सवार रहते हैं जिसकी जांच किए जाने की बात भी लोग कह रहे हैं।
यात्री व स्कूल बसों के दुर्घटना पर भी नहीं पहुंचता उड़नदस्ता दल
कभी कोई यात्री बस या कोई स्कूल बस जब दुर्घटना ग्रस्त होती है तब भी उड़नदस्ता दल प्रभारी दुर्घटना स्थल पर नहीं पहुंचते हैं जबकि उन्हे पहुंचना चाहिए और कारण की जांच की जानी चाहिए की आखिर क्यों दुर्घटना हुई क्या दुर्घटना का कारण बस की कोई कमी है या अन्य कोई कारण। कुल मिलाकर उड़नदस्ता दल प्रभारी अपने कर्तव्य से लगातार मुंह मोड़ते नजर आ रहे हैं।
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