अस्पताल परिसर के अंदरूनी सड़क का आम रास्ता की तरह उपयोग,भट्टापारा जाने का रास्ता हुआ आसान…
अंबिकापुर,१0 जनवरी 2024 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल की अंदरूनी सड़क को आम रास्ता के रूप में उपयोग में लाए जाने से आए दिन खतरे की स्थिति बनी रहती है। इधर अस्पताल परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार को खोल देने से इनके आने-जाने का रास्ता और आसान हो गया है। अस्पताल परिसर के अंदर मरीजों की भीड़ के बीच रोजाना भट्टापारा की ओर से दोपहिया चालक फर्राटा भरते पहुंचते हैं। अस्पताल प्रबंधन इस मार्ग से आवाजाही रोकने के उद्देश्य से मलबा का ढेर जमा कर रहा था, इसे हटवा दिया गया। इसके बाद अस्पताल परिसर के अंदर से भट्टापारा आने-जाने का मार्ग आबाद हो गया है। तेज रफ्तार में आने वाले दोपहिया चालकों के कारण कभी भी बड़ी घटना हो सकती है, इसे देखते हुए मुख्य अस्पताल परिसर के प्रथम प्रवेश द्वार को बंद रखने सहित इस मार्ग को बंद करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
बताया जा रहा है कि राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल में पहली बार औचक भ्रमण व निरीक्षण करने सरगुजा जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्र के विधायक एक साथ पहुंचे थे। इस दौरान इनके साथ पहुंचे भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर के बंद रहने वाले प्रथम प्रवेश द्वार को खोलने की बात कही थी। हालांकि विधायकों ने गेट खोलने को लेकर किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं की थी। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने इस प्रवेश द्वार को खोल दिया था। देखा जाए तो इस प्रवेश द्वार को खोलने का कोई औचित्य नहीं है। इस प्रवेश द्वार के खुलने से अस्पताल परिसर के अंदर की व्यवस्था बिगड़ती जा रही है, वहीं वाहनों की चोरी का खतरा भी बढ़ गया है। पूर्व में अस्पताल प्रबंधन के द्वारा इस प्रवेश द्वार को बंद रखा जा रहा था। अचानक इस गेट के खुलने से आम रास्ते के रूप में अस्पताल के अंदरूनी सड़क का उपयोग बढ़ गया है। दोपहिया के साथ ही चार पहिया वाहन भी अस्पताल के दूसरे और तीसरे नंबर के गेट का उपयोग करने के बजाए इस गेट से प्रवेश कर जाते हैं, जिससे अस्पताल के अंदर लैब में टेस्ट के लिए आने वाले व दवा लेने के लिए काउंटर की ओर जाने वाले लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। अस्पताल के चिकित्सकों व स्टाफ को वाहन निकालने ताकत झोंकनी पड़ती है। मरीजों को लाने-ले जाने में सहूलियत की दृष्टि से देखें तो अस्पताल में प्रवेश व निर्गम के लिए गेट नंबर दो और तीन काफी सुविधाजनक है। दोनों प्रमुख प्रवेश द्वार से अस्पताल के ओपीडी, पर्ची काउंटर, आपातकालीन चिकित्सा परिसर, सिटी स्कैन, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, ट्रामा सेंटर, सोनोग्राफी, एक्स-रे कक्ष, नेत्र अस्पताल, टीबी अस्पताल तक आना-जाना आसान है। मरीजों के लिए भटकाव की स्थिति भी नहीं बनती है।
दवा काउंटर व हमर
लैब में रहती है भीड़
अस्पताल के अंदर की जिस सड़क से भट्टापारा की ओर लोग आना-जाना कर रहे हैं, इसी सड़क मार्ग के किनारे दवा वितरण का काउंटर व हमर लैब है। दोनों ही विभाग अस्पताल की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जहां मरीजों की भीड़ लगी रहती है। दवा वितरण कक्ष की कतार कभी-कभी इतनी लंबी हो जाती है कि हमर लैब तक महिला-पुरूष दवा लेने कतारबद्ध नजर आते हैं। इन हालातों के बीच भट्टापारा की ओर आने-जाने वाले वाहन चालकों का पहुंचना और इन्हें आने-जाने के लिए अपना जगह छोड़कर हटना मरीजों को खलता है। इसके अलावा वायरोलॉजी लैब, चर्म रोग विभाग जाने के लिए भी इसी सड़क से आना-जाना होता है। मेडिकल कॉलेज के छात्र लेक्चर हॉल की ओर भी इस मार्ग से आना-जाना करते हैं।
मेडिकल कॉलेज के नार्म्स के अनुसार अस्पताल परिसर में एंट्री के लिए एक गेट का प्रावधान है। इससे चोरी की संभावना कम रहती है, वहीं अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनती है। आप लोगों की ओर से अस्पताल परिसर की सड़क का आम रास्ते की तरह उपयोग करने को संज्ञान में लाया गया है, ऐसी स्थिति न बने इसके लिए आवश्यक पहल करेंगे।
डॉ. आरसी आर्या, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल
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