अंबिकापुर,04 अक्टूबर 2023 (घटती-घटना)। गरीब परिवारों को शासकीय अस्पतालों में बेहतर इलाज मिल सके इसके लिए प्रदेश सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है .. लेकिन अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर की मनमानी शासन की महती योजनाओं को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। चिकित्सकों ने पेट दर्द से पीडि़त महिला का इलाज करने के बजाए बेहतर इलाज का हवाल देकर निजी अस्पताल भेज दिया। परिजन महिला को आनन-फानन में निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। यहां इलाज में परिजन का 35 से 40 हजार रुपए खर्च हो गए। परिजन ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सक पर इलाज न करने का आरोप लगाया है।
शहर से लगे ग्राम लोधिमा की रहने वाली संतोषी बाई पिछले कुछ दिनों से पेट दर्द से पीडि़त थी। ज्यादा तबियत बिगडऩे पर परिजन 29 सितंबर की शाम को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। आपातकालीन ड्यूटी के डॉक्टर से इलाज के बाद उसे भर्ती कराया गया। दूसरे दिन सुबह महिला को सर्जरी विभाग के डॉक्टर से दिखाया गया। चिकित्सक ने पहले सोनोग्राफी करवाने की बात कही। परिजन सोनोग्राफी करवाने पहुंचे तो पता चला की केवल इमरजेंसी वालों को सोनोग्राफी किया जाएगा। अस्पताल में सोनोग्राफी नहीं होने पर परिजन निजी डाग्नोस्टिक सेंटर से सोनोग्राफी करवाकर रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने रिपोर्ट देखकर कहा कि महिला के बच्चेदानी में सुजन है। इसका इलाज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संभव नहीं है। अगर बेहतर इलाज करवाना है तो उसे रायपुर ले जाओ या फिर शहर के निजी अस्पताल में लेकर जाओ। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज नहीं होने पर परिजन शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां महिला का ऑपरेशन करवाया गया। इलाज में लगभग 35 से 40 हजार रुपए खर्च हुए हैं।
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