अंबिकापुर,02 अक्टूबर 2023 (घटती-घटना)। इस वर्ष सरगुजा पर मानसून की वर्षाकालीन सम्पूर्ण गतिविधियों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि सामान्य तिथि से एक सप्ताह विलम्ब से मानसूनी हवाओं के सरगुजा संभाग पर दस्तक के बाद जून के अंतिम सप्ताह में यह अनुकूल रहा था। परन्तु मानसून के प्रबल सक्रियता वाले माह जिसमें मानसून की लगभग दो तिहाई वर्षा होती है उसमें इसकी सक्रियता निराशाजनक ही रही है। हालांकि अगस्त में वर्षा अपने सामान्य आंकड़े के बहुत नजदीक तक अवश्य पहुंचा था। अगस्त के उारार्ध में हुई मानसून भंग की अवधि लम्बी होने के कारण तथा बंगाल की खाड़ी से उत्पन्न सनचरणों के दक्षिणी झुकाव या फिर उारी विक्षेप के कारण मध्य भारत का सरगुजा क्षेत्र बार बार मानसून की व्यापकता के लिए सिर्फ इंतजार ही करता रहा। सितम्बर के मध्य में मानसून की पुनः सक्रिय होने से कुछ वर्षा सितम्बर में अवश्य हुई पर यह भी अपने सामान्य आंकड़ो से पीछे ही रही। समय समय पर या नियमित अंतराल में हुई वर्षा से कृषि अनुरूप संजीवनी अवश्य बरसती रही पर जल पिंडों की प्यास अधूरी रही। इस समय मानसून की अवधि के बाद पिछले वर्ष की तरह ही एक बार पश्चिम- उार बंगाल की खाड़ी में निर्मित हुआ अवदाब उार छाीसगढ़ और दक्षिणी झारखंड के रास्ते उारप्रदेश की ओर अग्रसर है जिससे पोस्ट मानसून अर्थात माँसुनेार अवधि के प्रारंभिक दो दिनों में अच्छी वर्षा हो रही है। सक्रिय मौसमी गतिविधियों से संभावना है कि अभी इस न्यून वायुदाब का प्रभाव आगे एक-दो दिन रह कर मानसून कालीन वर्षा में रही न्यूनता को कुछ कम कर देगा।
अम्बिकापुर की विगत 50 वर्षीय अक्टूबर की औसत वर्षा 58 मिमी है जबकि आज शाम 05.30 बजे तक 42.9 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है और उसके बाद भी लगातार मध्यम वर्षा हो रही है। इस बार खाड़ी में विकसित हुआ यह अवदाब अपनी पूरी सक्रियता के साथ सरगुजा संभाग पर मेहरबान है। कल कुसमी सामरी क्षेत्र में 24 घण्टों में 115 मिमी तक वर्षा दर्ज की गई है। निश्चित अनुमान है कि अक्टूबर में मासिक औसत से अधिक वर्षा का आंकड़ा कल प्रातः तक पार हो चुका होगा।
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