अंबिकापुर,26 सितम्बर 2023 (घटती-घटना)। इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने समय अवधि 15 जून की तुलाना में 8 दिन विलंब से 24 जून को उारी छाीसगढ़ में प्रभावी हुआ था। 82 दिनों तक प्रभावी रहने के बाद अपनी सामान्य तिथि 17 सितंबर की तुलना में 7 दिन विलंब से बंगाल की खाड़ी की ओर लौट रही है।
मौसम विज्ञानी एएम भट्ट के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून पर अरब सागर में मई के अंतिम दिनों में चक्रवाती समुद्री तूफान विपरजोय के व्यवधान के कारण 7 दिन के विलम्ब से सामान्य तिथि 1 जून की तुलना में 8 जून को केरल में प्रभावी हुआ था। जो आगे बढ़ता हुआ सामान्य तिथि 15 जून की तुलना में 8 दिन के विलम्ब से 24 जून को उारी छाीसगढ़ पर प्रभावी हुआ था। आगे बढ़ते हुए मानसून की गति बढ़ी थी जिससे यह पूरे भारत में प्रभावी होने की अपनी सामान्य तिथि 8 जुलाई की तुलना में 5 दिन पूर्व 2 जुलाई को पूरे भारत में पहुंचा था।
सम्पूर्ण भारत में 82 दिनों तक प्रभावी रहने के बाद अब सुदूर उार-पश्चिमी राजस्थान की ओर से इसकी विदाई प्रारम्भ हो चुकी है। हालांकि मानसून की वापसी की सामान्य तिथि 17 सितम्बर है परन्तु मानसून ने अपने विलम्ब से आने की भरपाई 7 दिन विलम्ब से लौटते हुए कर दी है। सामान्य वापसी की तिथि से 7 दिन के विलम्ब से 25 सितम्बर को मानसून राजस्थान के बाड़मेर के क्षेत्र से अब अपने मूल क्षेत्र बंगाल की खाड़ी की ओर लौटने लगा है। इस समय उार और दक्षिण छाीसगढ़ दोनों ओर एक एक चक्रवाती परिसंचरण और उनसे मिलती हुई और कोंकड कि ओर जाती हुई द्रोणिकाओं की सक्रियता अभी भी विद्यमान है, जिससे कुछ क्षेत्र में गरज चमक और हल्की से मध्यम वर्षा के लिए अनुकूल वातावरण बना हुआ है। कल से इन मौसमी तत्वों में शिथिलता आएगी जिससे वर्षा की गतिविधि में भी कमी देखी जाएगी, स्थानीय प्रभाव से कुछेक जगहों में गरज चमक की घटना अवश्य होती दिखेगी। आने वाले 29 सितम्बर के आसपास अंडमान सागर के पास एक न्यून वायुदाब के विकसित होने की संभावना जरूर है पर यदि यह प्रबल हो कर आगे बढ़ता है तो भी 30 सितम्बर के बाद ही इसके प्रभाव दिखेंगे। 30 सितम्बर को मानसून ऋतु की समाप्ति हो जाएगी। इसके बाद जो भी वर्षा दर्ज की जाएगी वह पोस्ट मानसून या मांसुनेार वर्षा कही जाएगी।
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