अंबिकापुर@क्या संयुक्त संचालक सरगुजा ने शिक्षकों की संशोधित पदस्थापना सूची जारी कर भ्रष्टाचार को अंतिम रूप दे दिया?

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  • पदस्थापना और संशोधित पदस्थापना की सूची एक साथ जारी क्यों नहीं की गई? सिंगल सिंगल आदेश क्यों?
  • क्या सिंगल सिंगल आदेश निकालने के पीछे भ्रष्टाचार को छुपाने का प्रयास ?
  • घटती घटना की खबर पर लगी मुहर,संयुक्त संचालक सरगुजा शिक्षा ने जारी की भ्रष्टाचार वाली शिक्षकों की संशोधित पदस्थापना सूची
  • पदोन्नति मामले की हो जा निष्पक्ष जांच तो संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा पर भी हो सकती है बड़ी कार्यवाही

अंबिकापुर 13 जून 2023 (घटती-घटना)। शिक्षकों की पदोन्नति व पदस्थापना को लेकर भ्रष्टाचार की गंध शुरू से ही आ रही थी, जिसे लेकर घटती-घटना ने लगातार खबर भी प्रकाशित किया था और अंदेशा भी जताया था की अंतिम दौर में भी संशोधन सूची जारी कर भ्रष्टाचार पर मुहर लगाई जा सकती है और अंततः वही हुआ, संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा ने भ्रष्टाचार वाली संशोधन सूची निकाल ही दी, इससे यह प्रतीत हो गया कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और जमकर पैसे वसूले गए हैं, इस मामले की यदि निष्पक्षता से उच्च स्तरीय जांच हो जाए तो संयुक्त संचालक जेल भी जा सकते हैं, लेकिन वर्तमान सरकार में ऐसा लगता नहीं कि उच्च स्तरीय जांच होगी जो कि विपक्षी दल भाजपा दिन प्रतिदिन भ्रष्टाचार का आरोप लगाते आ रही है और हो सकता है कि यह मामले में भी भ्रष्टाचार के आरोप आने वाले चुनाव से पहले मुद्दे में शामिल हो जाए।
बता दें की शिक्षक से प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक शाला साथ ही सहायक शिक्षक से शिक्षक पद पर पदोन्नति सरगुजा संभाग में भी सरकार की नीति अनुसार किया गया है। पदोन्नति की पूरी प्रकिया पर शुरू से ही भ्रष्टाचार का आरोप लगने लगा था, सरगुजा संभाग में और जिसे लेकर स्वयं शिक्षा मंत्री ने भी यह मांग की थी की पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया काउंसलिंग के माध्यम से की जाए, जिससे मामले में किसी भी तरह का अन्याय किसी के साथ न हो। पदोन्नति मामले में शासन ने शिक्षा मंत्री की बात संज्ञान में लिया और पदोन्नति में काउंसलिंग अनिवार्य कर दी वहीं काउंसलिंग में भी भ्रष्टाचार कैसे हो यह खेल पहले से ही संयुक्त संचालक सरगुजा ने तय कर लिया था और उन्होंने काउंसलिंग में पदों को छिपाकर काउंसलिंग प्रकिया पूर्ण की जिसका आरोप भी उनके ऊपर लगा, जिसमे आरोप लगाने वालों को संयुक्त संचालक ने धमकी बतौर निलंबित भी किया। कुछ शिक्षकों को निलंबित कर जब संयुक्त संचालक शिक्षा ने शिक्षकों के बीच भय कायम कर लिया तब उन्होंने संशोधन वाली भ्रष्टाचार की सूची जारी करनी शुरू कर दी है और जो लगातार जारी हो रही है जिसमे पैसे का लेनदेन बड़े स्तर पर हो रहा है।
शिक्षकों से ही पैसे वसूलकर कैसे उन्हे नियम कायदे में बांध सकेंगे संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा
पदोन्नति में पदस्थापना मामले में संयुक्त संचालक सरगुजा ने मनचाही पदस्थापना के लिए शिक्षकों से जमकर पैसे की वसूली की है। अब जब पदोन्नत शिक्षक जो पैसा देकर मनचाही पदस्थापना प्राप्त कर सकें हैं उनसे पैसा लेने वाले संकुक्त संचालक किस तरह नियम कायदों के अनुसार काम लेंगे यह बड़ा सवाल है। मामले में भ्रष्टाचार का स्तर बहुत बड़ा है और यह कई करोड़ों का खेल बताया जा रहा है। संयुक्त संचालक ने पूरा काम बड़ी निडरता से किया है यह भी मामले का वह पहलू है जो शासन को भी कटघरे में खड़ा करता है की किस तरह शिक्षकों का शोषण उच्च अधिकारी द्वारा किया गया है।
तय समय सीमा निर्धारित थी फिर भी कार्यभार ग्रहण करने पैसे जिन शिक्षकों से लिए गए उन्हे दिया गया संशोधन के लिए समय
विशेष सूत्रों की माने तो पदोन्नति मामले में जिन शिक्षकों को पदोन्नति मिली है उनके लिए कार्यभार ग्रहण करने के लिए समय सीमा निर्धारित थी लेकिन जिन शिक्षकों से संयुक्त संचालक कार्यालय ने पैसों की वसूली की थी उन्हे कार्यभार ग्रहण नहीं कर संशोधन के लिए आवेदन लगाने का समय दिया गया था और बाद में उनके आवेदन स्वीकार भी किए गए और संशोधन सूची भी जारी हुई। मामले में सबसे बड़ा विषय यह है की केवल जिसने पैसा दिया वही संशोधन के लिए पात्र माने गए और उन्ही का संशोधन भी किया गया जिन्होंने मुंह मांगी कीमत अदा की।
शिक्षक संघों की भूमिका भी मध्यस्थ वाली नजर आई
पूरे मामले में शिक्षक संघों की भूमिका भी अधिकारी और शिक्षकों के बीच मध्यस्थ वाली नजर आई और जिन्होंने पैसे दिए उन्ही के पक्ष में शिक्षक संघ भी खड़े नजर आए। शिक्षक संघ के कुछ ऐसे भी पदाधिकारी मामले में संलिप्त नजर आए जिन्होंने गलत का विरोध करने की बजाए शिक्षकों को पैसे देने के प्रति प्रोत्साहित किया और मनचाही पदस्थापना के लिए पैसों के लेनदेन में वह संयुक्त संचालक का महिमामंडन भी करते नजर आए। फूल गुलदस्ता देकर शिक्षक संघ के लोगों ने साबित किया की वह शिक्षकों के हित के लिए नहीं वरन वह भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों के साथ हैं और वही उनके अन्नदाता हैं। अधिकारियों की चापलूसी साथ ही खुद को शिक्षक हितैसी बताने वाले ऐसे संघ नेताओं को भी शिक्षक कोसते नजर आए जिन्होंने पैसा दिया है।
एक लाख से डेढ़ लाख के बीच खेला गया संशोधन का खेल
सूत्रों की माने तो संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा कार्यालय द्वारा शिक्षक पदोन्नति प्रक्रिया में जमकर भ्रष्टाचार का खेल खेला गया। एक एक शिक्षक से संशोधन के लिए डेढ़ से दो लाख रुपए तक को वसूली की गई। जिन शिक्षकों से पैसे लिए गए उन्हे कार्यभार ग्रहण करने के समय में छूट दी गई और जब अवसर मिला संशोधन कर दिया गया। सबसे ज्यादा संशोधन संभाग में सूरजपुर जिले में किया गया है यह भी सूत्रों का कहना है।
जिन्होंने पैसे नहीं दिए उन्हे मिली दूरस्थ पदस्थापना
जिन शिक्षकों ने पैसे नहीं दिए जिन्होंने प्रक्रिया को पूर्णतः सही मानकर काउंसलिंग में भाग लिया उन्हे दूरस्थ स्कूलों में पदस्थापना मिली। अब ऐसे शिक्षक खुद को ही कोसते नजर आ रहें हैं और वह कहते सुने जा सकते हैं की काश वह भी पैसे की बात कर लिए होते उन्हे भी मनचाही पदस्थापना मिल गई होती।
भय दिखाकर शिक्षकों के विरोध को संयुक्त संचालक ने दबाया
संयुक्त संचालक सरगुजा शिक्षा ने शिक्षकों के विरोध को जो की शिक्षकों ने दोषपूर्ण काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद दर्ज की थी दबा दिया और उसके बाद लेनदेन कर संशोधन सूची जारी कर भ्रष्टाचार के खेल को अमली जामा पहना दिया। संयुक्त संचालक सरगुजा शिक्षा से जारी संशोधन सूची की यदि जांच की जाए तो भ्रष्टाचार के इस बड़े खेल का पर्दाफाश हो सकेगा जो बड़े स्तर पर खेला गया।
संशोधन नहीं हुआ जिन शिक्षकों का उनमें है रोश
जिन शिक्षकों का संशोधन नहीं हो सका या जिन्होंने दूरस्थ पदस्थापना की वजह से पदोन्नति नही ली उनमें रोश देखा जा रहा है। उन्हीं में से एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की सबकुछ पहले से ही तय था की किस तरह पैसों का खेल होगा। जिन्होंने पैसा दिया उन्हे समय दिया गया और उनकी दूरस्थ हुई पदस्थापना में संशोधन कर उन्हे पास के स्कूलों में पदस्थ किया गया।
सब कुछ था यदि पारदर्शी तब क्यों नहीं सभी को मिला संशोधन का अवसर
पदोन्नति पदस्थापना मामले में यदि सभी कुछ पारदर्शी था तो क्यों नहीं सभी को संशोधन का मौका मिला। कार्यालय से कार्यभार ग्रहण करने के लिए निश्चित समय दिया गया सभी को और जिनसे कार्यालय की सेटिंग हुई उन्हे ही मात्र इस तय समय सीमा में कार्यभार ग्रहण करने मामले में छूट दी गई। और जब मामला ठंडा हुआ संशोधन सूची जारी कर दी गई। अब कई ऐसे शिक्षक हैं जो खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहें हैं और वह यह भी कह रहें हैं की पैसा देने से वह भी पीछे नहीं हटते लेकिन उन्हें पैसे के लेनदेन की सही तरीके से जानकारी ही नहीं मिल सकी।
शिक्षा मंत्री के क्षेत्र में हुआ उन्ही के विभाग में बड़ा भ्रष्टाचार का खेल
पूरे मामले में यह भी ध्यान देने वाला विषय है की शिक्षा मंत्री के ही क्षेत्र में शिक्षा विभाग में यह बड़ा भ्रष्टाचार का खेल खेला गया। शिक्षा मंत्री जिन्होंने इसकी आशंका भी जाहिर ही थी और काउंसलिंग के लिए उन्होंने पत्र भी लिखा था लेकिन उन्हें क्या पता था की काउंसलिंग प्रक्रिया में भी भ्रष्टाचार का खेल रच दिया जाएगा और यह संशोधन के खेल से सामने उजागर होगा।


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