रायपुर @ गौठानों के रूरल इंडस्टि्रयल पार्क में लगेंगी धान कूटने और तेल िनकालने की मशीनें

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रायपुर 11 अक्टूबर 2021 (ए) । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की स्वावलंबी गांवों की परिकल्पना के अनुसार अब छत्तीसगढ़ के गांव आत्मनिर्भर बन रहे हैं। जल्द ही गोबर से बिजली उत्पादन कर अब छत्तीसगढ़ के गांव बिजली के मामले में भी आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने कहा कि गोबर से बिजली बनाने की शुरूआत तीन गौठानों रायपुर, बेमेतरा और दुर्ग जिले के एक-एक गौठान से की गई है। इसका विस्तार सभी गौठानों में करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। बघेल ने कहा कि अब प्रदेश में मिशन मोड में गोधन न्याय योजना का संचालन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री आज यहां अपने निवास कार्यालय में पशुपालकों, गोबर संग्राहकों को गोबर खरीदी, लाभांश के रूप में महिला स्व-सहायता समूहों तथा गौठान समितियों के खाते में कुल 7 करोड़ 36 लाख रूपए की राशि का ऑनलाईन अंतरण करने के बाद कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि विभाग के विशेष सचिव एवं गोधन न्याय योजना के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. एस. भारती दासन उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने 16 सितम्बर से 30 सितम्बर तक खरीदे गए गोबर के एवज में पशुपालकों और गोबर संग्राहकों के खाते में एक करोड़ 87 लाख रूपए, लाभांश की राशि के रूप में महिला स्व-सहायता समूह को 2 करोड़ 14 लाख रूपए तथा गौठान समितियों को 3 करोड़ 35 लाख रूपए की राशि का अंतरण किया। गोबर खरीदी के एवज में गोधन न्याय योजना शुरू होने के बाद अब तक 104 करोड़ 41 लाख रूपए, लाभांश राशि के रूप में महिला स्व-सहायता समूहों और गौठान समितियों को कुल 62 करोड़ 92 लाख रूपए की राशि का भुगतान किया गया है। इसमें से महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 25 करोड़ 2 लाख रूपए और गौठान समितियों को 37 करोड़ 90 लाख रूपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। गोधन न्याय योजना से प्रदेश के 84 हजार 469 भूमिहीन लोग भी लाभान्वित हो रहे है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि गौठानों में महिला स्व-सहायता समूह अब वर्मी कम्पोस्ट बनाने तक सीमित नहीं रहेंगे। गौठानों में राज्य और केन्द्र सरकार की योजनाओं की मदद से विभिन्न रोजगारमूलक गतिविधियां प्रारंभ की जाएंगी। गौठानों में धान कूटने, तेल पेराई की मशीनें लगाई जाएंगी और लोहारी तथा जूता निर्माण के उद्यम भी प्रारंभ किए जाएंगे।


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