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सूरजपुर@ मिट्टी को आकार देते-देते मंगल ने संवारा परिवार का भविष्य

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हाथ के चाक से बिजली के चाक तक,मंगल प्रजापति की बदली जिंदगी
कुम्हार के हुनर को तकनीक का सहारा,अब दीयों के साथ चमक रहा परिवार का भविष्य
-संवाददाता-
सूरजपुर,07 नवम्बर 2026 (घटती-घटना)।
दीपावली की रोशनी में जब घर-आंगन मिट्टी के दीयों से जगमगाते हैं, तब उन दीयों के पीछे छिपी कुम्हारों की मेहनत और पीढि़यों से चली आ रही पारंपरिक कला भी याद आती है,मिट्टी को आकार देकर लोगों के घरों में खुशियां और उजाला पहुंचाने वाले कारीगरों के लिए यह कला केवल व्यवसाय नहीं,बल्कि उनकी पहचान और आजीविका का आधार है, सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंगोटी निवासी मंगल प्रजापति इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। मंगल प्रजापति पीढि़यों से चली आ रही कुम्हार कला के माध्यम से मिट्टी के दीये, बर्तन और दैनिक उपयोग की अन्य सामग्री तैयार करते हैं,पहले वे हाथ से चलने वाले पारंपरिक चाक पर मिट्टी को आकार देते थे। इस प्रक्रिया में शारीरिक मेहनत अधिक लगती थी और उत्पादन भी सीमित रहता था, दिनभर काम करने के बाद भी उतनी सामग्री तैयार नहीं हो पाती थी,जिससे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण बना रहता था।
बिजली के चाक ने मेहनत घटाई,उत्पादन को दी नई गति-छत्तीसगढ़ शासन की योजना के अंतर्गत बिजली से चलने वाला चाक मिलने के बाद मंगल प्रजापति के पारंपरिक व्यवसाय में महत्वपूर्ण बदलाव आया,अब उन्हें मिट्टी के बर्तन तैयार करने में पहले की तुलना में कम शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है,कम समय में अधिक सामग्री तैयार कर पाने से उनके काम की गति बढ़ी और व्यवसाय को विस्तार देने का अवसर मिला,आधुनिक तकनीक का यह सहयोग उनके लिए केवल एक उपकरण मिलने तक सीमित नहीं रहा,बल्कि इससे पीढि़यों से चले आ रहे हुनर को नई संभावनाएं मिलीं,पारंपरिक कला को बरकरार रखते हुए अब वे तकनीक की मदद से अपने उत्पादन और बिक्री को बेहतर बनाने में सक्षम हुए हैं।
गांव से जिला मुख्यालय तक पहुंचा कारोबार-व्यवसाय में सुधार और उत्पादन बढ़ने के साथ मंगल प्रजापति ने सूरजपुर जिला मुख्यालय में अपनी दुकान भी स्थापित कर ली है, यहां वे नियमित रूप से मिट्टी के बर्तनों की बिक्री कर रहे हैं,पारंपरिक कुम्हार कला को बाजार से जोड़ने की उनकी यह पहल उनकी आजीविका को मजबूती देने के साथ उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ा रही है।
बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य को मिली नई उम्मीद-मंगल प्रजापति बताते हैं कि व्यवसाय में बढ़ोतरी से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है, अब वे बच्चों की शिक्षा और परिवार की आवश्यकताओं को पहले से बेहतर ढंग से पूरा कर पा रहे हैं,उनका एक बेटा महाविद्यालय में अध्ययनरत है,जबकि दूसरा बेटा भी दोबारा पढ़ाई शुरू करने के लिए इच्छुक है, बेहतर आर्थिक स्थिति ने उन्हें बच्चों के भविष्य को लेकर नई उम्मीद दी है,उनके लिए यह बदलाव केवल आमदनी बढ़ने की कहानी नहीं,बल्कि अपने परिवार को बेहतर अवसर देने और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवारने का माध्यम भी है।
पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक का सहारा-मंगल प्रजापति का अनुभव बताता है कि यदि पारंपरिक कारीगरों को उनके काम के अनुरूप आधुनिक उपकरण और जरूरी सहयोग मिले तो सदियों पुरानी कला को नई पहचान मिल सकती है,बिजली से चलने वाले चाक ने उनकी मेहनत कम की, उत्पादन बढ़ाया और व्यवसाय को आगे बढ़ाने का रास्ता खोला,मंगल प्रजापति भावुक होकर कहते हैं कि बिजली से चलने वाला चाक मिलने के बाद उनका काम पहले से बेहतर हो गया है और परिवार की खुशहाली भी बढ़ी है,उन्होंने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया,मिट्टी से दीये और बर्तन गढ़ने वाले मंगल प्रजापति आज अपने हुनर के साथ परिवार का भविष्य भी गढ़ रहे हैं,उनकी कहानी बताती है कि पारंपरिक कला को यदि आधुनिक तकनीक का साथ मिले तो मिट्टी के दीयों की रोशनी केवल घरों को ही नहीं,बल्कि कारीगरों के जीवन को भी रोशन कर सकती है।


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