- अमेरिका में बसे चंद्रकांत पटेल का अपनी मिट्टी से प्रेम, जरूरतमंदों के आंगन में जगमगाएंगे दीप
- दूरियां हजारों मील की, दिल जुड़ा जन्मभूमि सेज् पंडो परिवारों तक दीपावली की खुशियां लेकर पहुंचीं छात्राएं
- किसी के आंगन में रंगोली, किसी की देहरी पर तोरण—चंद्रकांत पटेल की पहल से रोशन होंगे जरूरतमंदों के घर
- दीपावली की खुशियां बांटने दुर्गम गांवों तक पहुंचीं छात्राएं, पंडो परिवारों को दिए उपहार
- विदेश में रहकर भी नहीं भूले अपनी मिट्टी, चंद्रकांत पटेल ने जरूरतमंद परिवारों के लिए बढ़ाए मदद के हाथ
- दीयों के साथ बांटा अपनापन, मिठाइयों के साथ मुस्कान—पंडो परिवारों की दीपावली खास बनाने की पहल
- सात समंदर पार से आया स्नेह, छात्राओं ने दुर्गम गांवों में सजाए पंडो परिवारों के घर-आंगन
राजन पाण्डेय
एमसीबी 29 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। दीपावली का असली उजाला केवल घरों में जलने वाले दीयों से नहीं, बल्कि उन चेहरों की मुस्कान से भी फैलता है, जिनके जीवन में खुशियां पहुंचाने के लिए कोई संवेदनशील पहल करता है, चिरमिरी क्षेत्र में इस दीपावली कुछ ऐसा ही मानवीय प्रयास देखने को मिल रहा है, अमेरिका में रह रहे चंद्रकांत पटेल ने अपनी जन्मभूमि और यहां के लोगों से जुड़ाव बनाए रखते हुए जरूरतमंद परिवारों तक त्योहार की खुशियां पहुंचाने की पहल की है, इस प्रयास के तहत के.बी. पटेल कॉलेज की छात्राएं दूरस्थ और पहुंचविहीन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पंडो जनजाति के परिवारों के घरों तक दीपावली के उपहार लेकर पहुंच रही हैं।
इस पहल की खास बात केवल उपहार वितरण नहीं, बल्कि उसके साथ जुड़ा अपनत्व और सेवा का भाव है, छात्राएं परिवारों को मिठाई, दीये, तेल, बाती, लाई, बताशे, पटाखे और रंगोली की सामग्री सहित दीपावली में उपयोग होने वाली वस्तुएं दे रही हैं, इसके साथ ही घरों के द्वार पर आम के पत्तों से बने पारंपरिक तोरण लगाए जा रहे हैं और आंगन में रंगोली बनाकर घरों को सजाया जा रहा है, इस तरह यह प्रयास जरूरतमंद परिवारों तक त्योहार की सामग्री पहुंचाने के साथ उन्हें दीपावली के उत्सव में सहभागी बनाने का माध्यम भी बन रहा है।
उपहारों के साथ घर-आंगन में सज रही दीपावली- दीपावली पर घर की साफ-सफाई, द्वार पर तोरण, आंगन में रंगोली, दीयों की रोशनी और मिठाइयों की मिठास त्योहार की पहचान मानी जाती है, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे परिवारों के लिए इन तैयारियों के लिए जरूरी सामग्री जुटाना कई बार चुनौती बन जाता है, ऐसे में जब कोई उनके घर तक पहुंचकर त्योहार की आवश्यक वस्तुएं भेंट करता है, तो वह सहायता केवल सामान देने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसमें संवेदना और सम्मान का भाव भी जुड़ जाता है, चंद्रकांत पटेल की पहल के तहत तैयार किए गए दीपावली उपहारों में मिठाई, दीये, तेल, बाती, लाई, बताशे, पटाखे और रंगोली बनाने की सामग्री शामिल है, इन वस्तुओं के जरिए परिवारों को त्योहार मनाने के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। छात्राएं जब घरों तक पहुंचती हैं, तो वे उपहार सौंपने के साथ पारंपरिक सजावट में भी भागीदारी निभाती हैं, घर के दरवाजे पर तोरण और आंगन में रंगोली सजने से त्योहार का माहौल और आत्मीय बन जाता है, यह पहल इस विचार को सामने लाती है कि त्योहार की खुशियां समाज के हर वर्ग तक पहुंचनी चाहिए, दीपावली की रौनक केवल बड़े शहरों, बाजारों या संपन्न परिवारों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ गांवों के उन घरों तक भी पहुंचे, जहां छोटी-छोटी खुशियों का इंतजार रहता है।
दुर्गम रास्तों पर पैदल चलकर परिवारों तक पहुंच रहीं छात्राएं– इस अभियान को जमीन पर साकार करने में के.बी. पटेल कॉलेज की छात्राओं की भूमिका महत्वपूर्ण है, दूरस्थ और पहुंचविहीन ग्रामीण इलाकों तक पहुंचने के लिए छात्राएं पैदल रास्ते तय कर रही हैं, उनका प्रयास केवल उपहार देकर लौटना नहीं, बल्कि परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां साझा करना भी है, छात्राएं पंडो परिवारों के घरों तक पहुंचकर द्वार पर आम के पत्तों से बने तोरण लगाती हैं और अपने हाथों से रंगोली बनाकर आंगन सजाती हैं, इन छोटी-छोटी गतिविधियों से उपहार वितरण में आत्मीयता जुड़ जाती है, परिवारों के साथ समय बिताना और उनके घरों में दीपावली का माहौल तैयार करना इस पहल को एक सामान्य वितरण कार्यक्रम से अलग स्वरूप देता है, छात्राओं के लिए भी यह अनुभव सामाजिक जिम्मेदारी को समझने का अवसर है, शिक्षा के साथ समाज के विभिन्न वर्गों की परिस्थितियों को करीब से जानना और जरूरतमंद परिवारों के साथ संवेदनशीलता से जुड़ना विद्यार्थियों में सहयोग, सहानुभूति और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने में सहायक हो सकता है, यह पहल संदेश देती है कि समाज के लिए योगदान देने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती, इच्छाशक्ति, समय और संवेदनशील व्यवहार भी किसी के जीवन में खुशी ला सकते हैं।
अमेरिका में रहते हैं चंद्रकांत पटेल, जन्मभूमि से जुड़ाव बरकरार- विदेश में रहने के बावजूद अपनी जन्मभूमि और वहां के लोगों के प्रति जुड़ाव बनाए रखना इस पहल का प्रमुख पक्ष है, अमेरिका में रह रहे चंद्रकांत पटेल ने दीपावली जैसे सांस्कृतिक और पारिवारिक त्योहार को जरूरतमंद परिवारों के साथ खुशियां साझा करने का माध्यम बनाया है, भौगोलिक दूरी हजारों किलोमीटर की हो सकती है, लेकिन अपनी मिट्टी और समाज के प्रति लगाव व्यक्ति को अपनी जड़ों से जोड़े रख सकता है, चंद्रकांत पटेल की पहल इसी भावना को दर्शाती है, स्थानीय स्तर पर छात्राओं की भागीदारी के माध्यम से इस प्रयास को ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है, इसका संदेश यह भी है कि सामाजिक योगदान के लिए किसी व्यक्ति का अपने क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से मौजूद होना ही एकमात्र रास्ता नहीं है, स्थानीय लोगों और संस्थाओं के सहयोग से भी अपने क्षेत्र के जरूरतमंद परिवारों तक मदद और खुशियां पहुंचाने के प्रयास किए जा सकते हैं।
कॉलेज की छात्राओं की भागीदारी से पहल को मिला मानवीय स्वरूप– के.बी. पटेल कॉलेज की छात्राएं इस पहल में उपहार वितरण के साथ घरों की सजावट में भी योगदान दे रही हैं, कॉलेज के प्रबंधक विश्वजीत बारीक के अनुसार, इस प्रयास के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों के घरों तक दीपावली की खुशियां पहुंचाने और उनके चेहरों पर मुस्कान लाने की कोशिश की जा रही है, शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल कक्षा में शिक्षा देने तक सीमित नहीं होती, विद्यार्थियों को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर उन्हें समाज की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और अपनी जिम्मेदारी पहचानने का अवसर मिलता है, इस पहल में छात्राओं की सहभागिता इसी दिशा में एक उदाहरण है, वे अपने समय और श्रम के माध्यम से दूरस्थ परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां साझा कर रही हैं।
जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच रही त्योहार की रौनक- दूरस्थ गांवों में रहने वाले पंडो परिवारों तक दीपावली की सामग्री पहुंचाने और घर-आंगन सजाने का यह प्रयास त्योहार की तैयारियों में सहयोग देने के साथ सामाजिक जुड़ाव को भी महत्व देता है, मिठाई, दीये, तेल और बाती जैसी वस्तुएं जहां दीपावली मनाने में मदद करती हैं, वहीं तोरण लगाने और रंगोली बनाने जैसी गतिविधियां इस प्रयास को भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं, इस तरह की पहल समाज में सहयोग की भावना को बढ़ावा दे सकती है, जब जरूरतमंद परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां साझा की जाती हैं, तो सहायता देने और पाने के बीच केवल वस्तुओं का आदान-प्रदान नहीं रहता, बल्कि आपसी सम्मान और अपनत्व का संबंध भी मजबूत होता है।
दूसरों के घर तक खुशियों की रोशनी पहुंचाना ही दीपावली का संदेश- चंद्रकांत पटेल की पहल और के.बी. पटेल कॉलेज की छात्राओं का सेवाभाव दीपावली के उस संदेश को सामने लाता है, जिसमें अपनी खुशियों को दूसरों के साथ साझा करने का महत्व है, घरों में दीये जलाना त्योहार की परंपरा है, लेकिन किसी ऐसे परिवार के घर तक खुशियां पहुंचाना, जिसके लिए त्योहार की तैयारियां कठिन हों, इस परंपरा को मानवीय अर्थ भी देता है, अमेरिका में रहकर अपनी जन्मभूमि के जरूरतमंद परिवारों के लिए पहल करना और छात्राओं का दुर्गम रास्तों से होकर उन परिवारों तक पहुंचना इस प्रयास के दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं। एक ओर अपनी मिट्टी से जुड़ाव है, तो दूसरी ओर युवाओं का सेवा और संवेदना के साथ समाज से जुड़ना, संदेश साफ है—दीपावली की रोशनी तभी और व्यापक होती है, जब वह अपने घर की देहरी से आगे बढ़कर दूसरों के आंगन तक पहुंचे, चिरमिरी क्षेत्र में चल रही यह पहल इसी सोच को साकार करने का प्रयास है, जहां उपहारों के साथ अपनत्व, रंगोली के साथ सम्मान और दीयों के साथ उम्मीद बांटने की कोशिश की जा रही है।
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