रोजगार सहायक की देखरेख में शुरू हुआ था काम,आधी से अधिक राशि आहरित होने के बाद निर्माण ठप्प…
सुदामा राजवाड़े
कुसमी,16 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। ग्राम पंचायत कोरंधा के शासकीय हाईस्कूल परिसर में 15 वें वित्त आयोग की राशि से स्वीकृत शौचालय निर्माण प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर रहा है। करीब 3 लाख रुपए की लागत से प्रस्तावित शौचालय का निर्माण पिछले दो-तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है। निर्माण के लिए स्वीकृत राशि में से आधे से अधिक राशि आहरित होने की जानकारी है, इसके बावजूद विद्यार्थियों की सुविधा से जुड़ा यह काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। जानकारी के अनुसार शौचालय निर्माण का काम ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक अभिषेक साहू की देखरेख में कराया जा रहा था। निर्माण शुरू होने के बाद भवन का कुछ हिस्सा तैयार किया गया, लेकिन इसके बाद लंबे समय से काम बंद पड़ा है। स्कूल परिसर में अधूरी पड़ी संरचना अब जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
राशि निकली,फिर काम क्यों रुका? आरईएस विभाग के इंजीनियर अमरीश यादव से मिली जानकारी के अनुसार शौचालय निर्माण की स्वीकृत लागत करीब 3 लाख रुपए है। इसमें से आधे से अधिक राशि आहरित हो चुकी है। उनका कहना है कि शेष राशि आहरित नहीं होने के कारण फिलहाल निर्माण रुका हुआ है और जल्द काम शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि,सवाल यह है कि यदि निर्माण के लिए पर्याप्त राशि पहले ही आहरित हो चुकी थी,तो काम लंबे समय तक अधूरा क्यों पड़ा रहा? वहीं, निर्माण की प्रगति और खर्च की निगरानी किस स्तर पर की गई,यह भी जांच का विषय है।
निर्माण की गुणवत्ता भी घेरे में : अधूरे निर्माण के साथ मौके पर काम की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थल पर ईंटों की चिनाई और मसाले की भराई में अनियमितता, कंक्रीट में छिद्र व उखड़ाव,लोहे की छड़ों का खुला दिखाई देना तथा दीवार और छत के जोड़ में खामियां नजर आने की बात सामने आई है। हालांकि इन खामियों के आधार पर निर्माण को तकनीकी रूप से घटिया घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी वास्तविक गुणवत्ता और संरचनात्मक मजबूती का निष्कर्ष संबंधित तकनीकी विभाग की जांच और परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।
जिम्मेदारों ने जांच का भरोसा दिया : ग्राम पंचायत कोरंधा के सरपंच लालू राम ने बताया कि शौचालय निर्माण रोजगार सहायक अभिषेक साहू के माध्यम से कराया जा रहा है। उनसे काम पूरा कराने के लिए लगातार कहा जा रहा है और जल्द निर्माण शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। वहीं जनपद पंचायत के सीईओ मुन्नालाल ने कहा कि मामले की जानकारी उनके संज्ञान में आई है। राशि जारी होने के बाद भी निर्माण अधूरा है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
तीन साल की देरी पर उठ रहे ये सवाल
करीब 3 लाख रुपए का शौचालय निर्माण दो-तीन साल में पूरा क्यों नहीं हुआ?
आधी से अधिक राशि आहरित होने के बावजूद निर्माण कार्य क्यों बंद पड़ा रहा?
निर्माण की गुणवत्ता की नियमित तकनीकी निगरानी किसने की?
अधूरे निर्माण से विद्यार्थियों को हो रही परेशानी की जिम्मेदारी किसकी है?
यदि जांच में अनियमितता या घटिया निर्माण की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी?
अब निगाह जनपद प्रशासन की प्रस्तावित जांच पर है। जांच में यदि निर्माण की गुणवत्ता, राशि के आहरण और कार्य की प्रगति में गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा। फिलहाल विद्यार्थियों की सुविधा के लिए स्वीकृत शौचालय वर्षों से अधूरा पड़ा है और उसे पूरा कराने का इंतजार जारी है।
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