फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
सरकार बोली…यूपीआई पर चार्ज विदेशी दबाव में नहीं लगाया
नई दिल्ली,16 सितम्बर 2026। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा…कि यूपीआई नियमों में बदलाव किसी विदेशी दबाव में नहीं लाया गया है। मंत्रालय ने कहा कि यूपीआईसे जुड़े फैसले भारत की घरेलू जरूरतों के आधार पर स्वतंत्र रूप से लिए गए हैं। एक अफसर ने बताया कि इस फैसले को पलटने का सवाल ही नहीं उठता। इससे पहले राहुल गांधी ने यूपीआईपर टैक्स लगाने के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने ङ्ग पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि इस फैसले से अमेरिका को फायदा होगा और सरकार को इसे वापस लेना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल….
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। इस याचिका में अदालत से सरकार के इस नए नियम को तुरंत रद्द करने की मांग की गई है। दरअसल,सरकार ने मंगलवार को आदेश दिया था कि 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 से ज्यादा के चुनिंदा यूपीआईमर्चेंट पेमेंट पर 0.4′ रूष्ठक्र लगेगा। इसकी अधिकतम सीमा 300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी। यह शुल्क मर्चेंट से लिया जाएगा, ग्राहक से नहीं। 2,000 तक के यूपीआईपेमेंट और व्यक्ति से व्यक्ति ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं होगा।
जिरोधा के फाउंडर बोले…मर्चेंट और ब्रोकर के बीच बड़ा फर्क है
भारत की सबसे बड़ी स्टॉक ट्रेडिंग कंपनी जिरोधा के फाउंडर और सीईओ नितिन कामथ ने कहा… कि यूपीआईका इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर होने लगा है, जिसके बाद एमडीआर शायद जरूरी हो,लेकिन इन्वेस्टिंग और ब्रोकिंग जैसे मामलों में मौजूदा एमडीआर फ्रेमवर्क प्रैक्टिकल नहीं लगता उनके मुताबिक,सामान्य मर्चेंट और ब्रोकर के बीच बड़ा फर्क है। नितिन ने उदाहरण देकर समझाया… अगर कोई ग्राहक 20,000 का सामान खरीदता है और यूपीआईसे भुगतान करता है,तो मर्चेंट को उसके बदले बिक्री से कमाई होती है। यानी पेमेंट सीधे कारोबार से जुड़ा है। लेकिन ब्रोकर के मामले में कस्टमर यूपीआईसे 2 लाख अपने ट्रेडिंग अकाउंट में डाल सकता है और उस दिन एक भी शेयर नहीं खरीद सकता। ऐसे में ब्रोकर को ट्रांजैक्शन से कोई ट्रेडिंग रेवेन्यू नहीं मिला,लेकिन यूपीआईपेमेंट से जुड़ा एमडीआर खर्च उसके ऊपर आ सकता है।
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