
- गोबरी नदी में पुल का इंतजार,डुमरिया-केवड़ा सड़क चौड़ीकरण का भूमिपूजन…
- डुमरिया-केवड़ा मार्ग पर विकास की प्राथमिकता पर सवाल…गोबरी नदी के स्थायी पुल का इंतजार जारी…
- पुल अधूरा,रपटा बहा… करोड़ों की सड़क का भूमिपूजन…
- पहले पुल संभालते तो बात बनती,अब करोड़ों की सड़क का भूमिपूजन…
- गोबरी नदी का पुल सवालों में,डुमरिया-केवड़ा सड़क का भूमिपूजन चर्चा में…
- सड़क चौड़ी होगी,गोबरी नदी कैसे पार होगी? पुल टूटने के डेढ़ साल बाद बड़ा सवाल…
- करोड़ों की सड़क,नदी पर टूटा पुल—डुमरिया-केवड़ा विकास मॉडल पर सवाल…
- पुल टूटा,रपटा बहा…फिर भी सड़क चौड़ीकरण का भूमिपूजन…
- गोबरी नदी का पुल अब भी इंतजार में, डुमरिया-केवड़ा सड़क को मिली नई शुरुआत
- 15 लाख का रपटा नहीं टिका,अब करोड़ों की सड़क पर निगाहें…पुल कब बनेगा?
- डुमरिया-केवड़ा मार्ग पर विकास की प्राथमिकता पर सवाल,गोबरी नदी के स्थायी पुल का इंतजार जारी
- दैनिक घटती-घटना की पिछली खबर का बड़ा अपडेट : सड़क चौड़ीकरण शुरू होने से पहले ही सामने आई सबसे बड़ी चुनौती,करोड़ों की सड़क किस काम की जब नदी पर रास्ता ही अधूरा?
-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर/भैयाथान,16 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। डुमरिया से केवड़ा पहुंच मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर आखिरकार भूमिपूजन हो गया है,करोड़ों रुपये की इस सड़क परियोजना को क्षेत्र के आवागमन और विकास से जोड़कर देखा जा रहा है,लेकिन इस पूरे विकास कार्य के बीच एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है, जिसका जवाब सड़क का भूमिपूजन भी नहीं दे पा रहा है, सवाल है की डुमरिया-केवड़ा मार्ग की शुरुआत में ही गोबरी नदी पर करीब डेढ़ साल से टूटा पड़ा पुल आखिर कब बनेगा? जिस मार्ग को चौड़ा करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने हैं, उसी मार्ग पर गोबरी नदी ग्रामीणों के आवागमन की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। पुराना पुल टूटने के बाद ग्रामीणों की परेशानी कम करने के लिए करीब 15 लाख की लागत से अस्थायी रपटा बनाया गया, लेकिन वह भी बारिश की मार नहीं झेल सका और बह गया, इसके बाद भी स्थायी समाधान को लेकर ग्रामीणों की प्रतीक्षा खत्म नहीं हुई है,अब सड़क चौड़ीकरण का भूमिपूजन हो चुका है। ऐसे में दैनिक घटती घटना की पूर्व खबर का यह सीधा अपडेट है कि सड़क के विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है,लेकिन उसी सड़क की सबसे जरूरी कड़ी गोबरी नदी का स्थायी पुल अभी भी सवालों के घेरे में है।
15 महिना बाद भी सवाल वहीं खड़ा- पुल टूटने के बाद समय बीतता गया, दो बरसात आई, ग्रामीणों ने परेशानी झेली,अस्थायी रपटा बनाया गया,रपटा भी बह गया,लेकिन अब जब उसी मार्ग के चौड़ीकरण का भूमिपूजन हो गया है,तब सवाल यह है कि क्या स्थायी पुल को सड़क परियोजना के साथ प्राथमिकता मिलेगी या फिर ग्रामीणों को एक और अस्थायी व्यवस्था का इंतजार करना पड़ेगा? 15 महिना का समय किसी छोटी अवधि का नाम नहीं है, इस दौरान सड़क चौड़ीकरण की योजना आगे बढ़ सकती है,भूमिपूजन हो सकता है, टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सकती है,लेकिन जिस पुल के बिना यह मार्ग बरसात में बाधित हो सकता है,उसका स्थायी समाधान अभी भी ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा प्रश्न बना हुआ है।
30.41 करोड़ का टेंडर, 25 करोड़ में काम मिलने की चर्चा-डुमरिया-केवड़ा मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर स्थानीय स्तर पर करीब 30.41 करोड़ के टेंडर की चर्चा है,वहीं यह भी कहा जा रहा है कि यह काम करीब 25 करोड़ में मिला है, यह पूरा आंकड़ा अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी के सवाल से भी जुड़ रहा है,यदि अनुमानित राशि और वास्तविक कार्यादेश राशि के बीच इतना अंतर है,तो स्वाभाविक रूप से यह जानना जरूरी होगा कि निविदा किस प्रक्रिया के तहत हुई, किस दर पर कार्य स्वीकृत हुआ और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग के पास क्या व्यवस्था है, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल है—इस सड़क परियोजना में गोबरी नदी का स्थायी पुल किस स्थिति में है? क्योंकि सड़क चौड़ीकरण का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब सड़क के साथ पुल और अन्य आवश्यक संरचनाएं भी उसी स्तर पर तैयार हों।
30 जून 2025 में टूटा था गोबरी नदी का पुल-गोबरी नदी पर बना पुराना पुल 30 जून 2025 को भारी बारिश के बाद गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था,उस समय जिला प्रशासन ने पुल का निरीक्षण कर सुरक्षा की दृष्टि से दोनों ओर बैरिकेडिंग कर आवागमन बंद कराया था,प्रशासन ने नए पुल के लिए प्राक्कलन तैयार करने और वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के निर्देश भी दिए थे,मामले की जांच के लिए तहसीलदार भैयाथान की अध्यक्षता में टीम गठित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी,यानी पुल टूटने की घटना अचानक सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर तत्काल कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी ग्रामीणों का मुख्य सवाल यही है कि स्थायी पुल आखिर कब बनेगा?
सड़क चौड़ी होगी तो क्या नदी पार करना आसान होगा?-सड़क विकास का उद्देश्य केवल सड़क की चौड़ाई बढ़ाना नहीं होता। सड़क तभी पूरी तरह उपयोगी होती है जब उस पर आने वाले प्रमुख नदी-नाले,पुल-पुलिया, एप्रोच रोड और कनेक्टिविटी भी सुचारु हों, डुमरिया-केवरा मार्ग के मामले में स्थिति कुछ अलग दिखाई देती है,एक तरफ 30.41 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना स्वीकृत,दूसरी तरफ गोबरी नदी का पुराना पुल जून 2025 में क्षतिग्रस्त,फिर 15 लाख के आसपास का अस्थायी रपटा,इसके बाद रपटा और एप्रोच रोड को लेकर भी समस्याएं, और अब सड़क चौड़ीकरण का भूमिपूजन,ऐसे में ग्रामीणों के बीच स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठ रहा है कि परियोजना की प्राथमिकता में सड़क और नदी के पुल को किस क्रम में पूरा किया जाएगा?
भूमिपूजन से आगे अब काम की निगरानी की जरूरत-सड़क का भूमिपूजन किसी भी विकास परियोजना की शुरुआत का प्रतीक हो सकता है,लेकिन ग्रामीणों के लिए असली परीक्षा उसके बाद शुरू होती है, डुमरिया-केवरा मार्ग पर लोगों की अपेक्षा अब यह है कि सड़क चौड़ीकरण के साथ-साथ गोबरी नदी का स्थायी पुल,एप्रोच रोड, पुल-पुलिया और पूरी सड़क परियोजना एक समन्वित योजना के तहत समयबद्ध तरीके से पूरी हो,साथ ही निर्माण की गुणवत्ता की नियमित निगरानी हो और कार्य की प्रगति सार्वजनिक की जाए,क्योंकि यदि सड़क चौड़ी हो गई, लेकिन गोबरी नदी पर स्थायी पुल नहीं बना,तो ग्रामीणों के लिए करोड़ों रुपये की सड़क परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फिर भी अधूरा ही रहेगा।
भूमिपूजन सड़क के बीच में,सवाल पुल के बीच में-डुमरिया से केवड़ा जाने वाली सड़क के चौड़ीकरण का भूमिपूजन हुआ, लेकिन भूमिपूजन स्थल को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है,सड़क की शुरुआत डुमरिया से होती है,लेकिन भूमिपूजन गांव के बीच में किया गया। न सड़क के शुरुआती बिंदु पर और न अंतिम छोर पर,इसको लेकर विरोधियों ने सवाल उठाए हैं। स्थानीय स्तर पर इसे वर्चस्व की लड़ाई से जोड़कर भी देखा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक चर्चा से अलग यदि पूरे मामले को सड़क और जनता की जरूरत के नजरिए से देखा जाए तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल फिर वही है…भूमिपूजन स्थल चाहे जहां हो, गोबरी नदी पर पुल कब बनेगा? जनता के लिए कार्यक्रम की जगह से ज्यादा महत्वपूर्ण वह रास्ता है, जिस पर उन्हें रोजाना चलना है।
सड़क चौड़ी होगी,लेकिन नदी पर क्या होगा?-डुमरिया-केवड़ा मार्ग चौड़ा होने के बाद निश्चित रूप से यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा सकती है,लेकिन सड़क का एक हिस्सा चौड़ा कर देने मात्र से पूरा संपर्क मार्ग मजबूत नहीं हो जाता,सड़क की उपयोगिता उसके पूरे नेटवर्क पर निर्भर करती है, यदि एक जगह पुल टूट जाए तो पूरी सड़क की कनेक्टिविटी प्रभावित होती है,गोबरी नदी इसी मार्ग की ऐसी कड़ी है,जहां पुराना पुल पहले ही टूट चुका है,ऐसे में सवाल है कि क्या सड़क चौड़ीकरण के साथ पुल निर्माण को समान प्राथमिकता दी गई है? क्या सड़क निर्माण और पुल निर्माण की समयसीमा एक-दूसरे से जुड़ी है? क्या सड़क पूरी होने से पहले पुल भी तैयार होगा? या फिर सड़क तैयार होने के बाद भी ग्रामीणों को नदी के पास पहुंचकर वही पुरानी समस्या झेलनी पड़ेगी?
15 लाख के रपटा पर भी जवाबदेही जरूरी-दैनिक घटती-घटना द्वारा पहले उठाए गए सवालों में 15 लाख के रपटा का मुद्दा भी प्रमुख रहा है,जब स्थायी पुल नहीं था तो अस्थायी रपटा ग्रामीणों के लिए तत्काल राहत का माध्यम था। लेकिन यदि वह बारिश में बह गया,तो उसकी तकनीकी मजबूती, निर्माण की गुणवत्ता और डिजाइन पर सवाल उठना स्वाभाविक है,यहां किसी व्यक्ति या संस्था पर सीधे दोष लगाने के बजाय जिम्मेदार विभाग से दस्तावेजी जवाब अपेक्षित है,रपटा किसके तकनीकी परीक्षण के बाद बनाया गया? उसकी डिजाइन किसने तैयार की? निर्माण की निगरानी किस अधिकारी ने की? भुगतान से पहले गुणवत्ता का परीक्षण हुआ या नहीं? रपटा बहने के बाद क्या विभागीय जांच हुई? और यदि जांच हुई तो उसकी रिपोर्ट क्या है? सबसे अहम सवाल अब तक जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई हुई? स्थानीय स्तर पर यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल निर्माण की तकनीकी विफलता का मामला नहीं है, बल्कि जनता के पैसे और जनता की सुविधा से जुड़ा विषय है।
पूर्व खबर से वर्तमान तक नहीं बदली मूल समस्या-दैनिक घटती-घटना ने जब पहली बार गोबरी नदी के टूटे पुल का मुद्दा उठाया था,तब सवाल था कि ग्रामीणों को आखिर कब स्थायी रास्ता मिलेगा,उसके बाद अस्थायी रपटा आया, रपटा भी चला गया, अब सड़क चौड़ीकरण का भूमिपूजन सामने है, लेकिन मूल समस्या अभी भी वही है की गोबरी नदी पर स्थायी और सुरक्षित पुल,यानी घटनाक्रम जरूर आगे बढ़ा है, लेकिन ग्रामीणों की सबसे बड़ी जरूरत का अंतिम समाधान अभी उनके सामने दिखाई नहीं दे रहा, यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण अपडेट है।
विकास के दो चेहरे-डुमरिया-केवड़ा मार्ग की मौजूदा स्थिति विकास के दो अलग-अलग चेहरों को सामने रखती है,एक तरफ—करोड़ों रुपये की सड़क परियोजना,चौड़ीकरण का भूमिपूजन और बड़े स्तर पर निर्माण की तैयारी,दूसरी तरफ—गोबरी नदी पर टूटा पुल, ?15 लाख का बह चुका रपटा और ग्रामीणों की आवागमन संबंधी परेशानी,यही विरोधाभास अब सवाल बनकर सामने आ रहा है,क्या विकास का मतलब केवल सड़क को चौड़ा करना है,या उस सड़क को पूरी तरह आवागमन योग्य बनाना भी उतना ही जरूरी है?
सड़क का भूमिपूजन हो गया, अब जनता काम देखना चाहती है-भूमिपूजन के बाद अब जनता की नजर निर्माण पर होगी, अब सवाल भाषणों का नहीं है,अब सवाल यह है कि सड़क का काम कब शुरू होगा? काम की गुणवत्ता कैसी होगी? निर्माण कितनी तेजी से होगा? 25 करोड़ में कार्य मिलने की बात की वास्तविक स्थिति क्या है? गोबरी नदी के स्थायी पुल का निर्माण कब शुरू होगा? पुल कब तक पूरा होगा? बारिश में ग्रामीणों के आवागमन की व्यवस्था क्या होगी? 15 लाख के रपटा के बहने के मामले में जवाबदेही किसकी तय होगी? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में इस परियोजना की वास्तविक तस्वीर सामने रखेंगे।
क्या सड़क से पहले पुल जरूरी नहीं था?-यह सवाल ग्रामीणों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में है,जब सड़क की शुरुआत में ही पुल नहीं है तो सड़क चौड़ीकरण की प्राथमिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है,सड़क के चौड़ीकरण का लाभ तभी मिलेगा,जब डुमरिया से केवड़ा तक आवागमन निर्बाध हो,यदि बीच में गोबरी नदी पर रास्ता बाधित है,तो चौड़ी सड़क भी अपनी पूरी उपयोगिता नहीं दे पाएगी, इसलिए अब ग्रामीण यह देखना चाहते हैं कि सड़क चौड़ीकरण की घोषणा और भूमिपूजन के साथ गोबरी नदी के स्थायी पुल की फाइल भी जमीन पर निर्माण तक पहुंचती है या नहीं।
दैनिक घटती-घटना का सवाल…अब जवाब चाहिए-दैनिक घटती-घटना ने पहले भी गोबरी नदी के टूटे पुल और अस्थायी रपटा को लेकर सवाल उठाए थे। अब उसी मामले का यह अगला अध्याय है,तब पुल टूटा था, फिर रपटा बनाया गया, रपटा बारिश में बह गया, अब सड़क चौड़ीकरण का भूमिपूजन हो चुका है,लेकिन जनता का सवाल आज भी वही है की गोबरी नदी का स्थायी पुल आखिर कब बनेगा? और इसके साथ दूसरा सवाल है की 15 लाख का रपटा अगर 15 दिन भी नहीं टिक पाया तो उसकी गुणवत्ता और जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई कहां तक पहुंची? तीसरा सवाल है की 30.45 करोड़ के टेंडर और करीब 25 करोड़ में काम मिलने की चर्चा के बीच सड़क निर्माण की गुणवत्ता की गारंटी कौन देगा?’और सबसे बड़ा सवाल‘क्या करोड़ों की सड़क से पहले उस सड़क की सबसे बड़ी बाधा गोबरी नदी के पुल को प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए थी? भूमिपूजन हो गया है। अब जनता शिलापट्ट नहीं, सड़क और पुल दोनों को जमीन पर देखना चाहती है, डुमरिया-केवड़ा मार्ग का असली विकास तभी माना जाएगा, जब चौड़ी सड़क के साथ गोबरी नदी पर स्थायी पुल भी खड़ा हो और ग्रामीणों को हर मौसम में सुरक्षित आवागमन मिल सके।
पहले टूटा पुल,फिर बना रपटा,अब रपटा भी नहीं…
गोबरी नदी पर पुल टूटने के बाद ग्रामीणों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हुआ था, उस समय तत्काल राहत के लिए अस्थायी रपटा तैयार करने की कवायद शुरू हुई, ग्रामीणों को उम्मीद थी कि कम से कम अस्थायी रास्ते से आवागमन की समस्या कुछ समय के लिए दूर हो जाएगी और इसी बीच स्थायी पुल का निर्माण शुरू हो जाएगा, लेकिन अस्थायी व्यवस्था भी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी, करीब 15 लाख की लागत से बनाया गया रपटा बारिश के पानी में बह गया, इससे यह सवाल और गंभीर हो गया कि आखिर अस्थायी व्यवस्था के नाम पर खर्च होने वाले लाखों रुपये का अपेक्षित लाभ ग्रामीणों को क्यों नहीं मिल पाया रपटा बहने के बाद फिर वही समस्या सामने है—नदी और उसके पार जाने का सुरक्षित रास्ता।
भूमिपूजन की जगह को लेकर भी चर्चा
डुमरिया से केवरा जाने वाले मार्ग के चौड़ीकरण का भूमिपूजन मार्ग के बीच के हिस्से में किए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा रही,सामान्य तौर पर बड़े सड़क प्रोजेक्ट के भूमिपूजन को लेकर लोगों की नजर परियोजना के आरंभिक बिंदु,प्रमुख पुल, पहुंच मार्ग और अंतिम छोर पर रहती है, स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यक्रम स्थल को लेकर भी क्षेत्र में अलग-अलग चर्चाएं हुईं,कुछ लोगों ने इसे स्थानीय राजनीतिक एवं सामाजिक प्रभाव से जोड़कर देखा,हालांकि इस संबंध में किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक रूप से ऐसी कोई वजह सामने नहीं आई है,इसलिए इसे फिलहाल स्थानीय चर्चा और राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में ही देखा जाना चाहिए,लेकिन कार्यक्रम स्थल से कहीं अधिक महत्वपूर्ण सवाल सड़क की उपयोगिता का है।
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