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रामानुजगंज @एनएच-343 पर ऑडियो बवाल…कंपनी ने पूर्व लेखापाल पर लगाया दो लाख की उगाही का आरोप,पुलिस चौकी पहुंचा मामला

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-संवाददाता-
रामानुजगंज,16 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
रामानुजगंज से बलरामपुर तक बन रहे एनएच-343 सड़क प्रोजेक्ट को लेकर विवाद अब पुलिस चौकी तक पहुंच गया है। जानकारों की मानें तो शिवालिक बिल्टेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विनोद लाम्बा ने तातापानी पुलिस चौकी में आवेदन देकर कंपनी के पूर्व लेखापाल सर्वेश शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कंपनी का आरोप है कि पूर्व कर्मचारी ने कुछ लोगों के साथ मिलकर कंपनी को बदनाम करने के उद्देश्य से भ्रामक ऑडियो तैयार कराया और उसे प्रसारित एवं प्रकाशित कराया। शिकायत में कथित रूप से दो लाख रुपये की उगाही का आरोप भी लगाया गया है।
पूर्व कर्मचारी पर डेटा नहीं लौटाने का आरोप : कंपनी के आवेदन के अनुसार, सर्वेश शर्मा को दिसंबर 2025 में लेखापाल के पद पर नियुक्त किया गया था। वह 30 अप्रैल 2026 तक कंपनी का लेखा संबंधी काम देख रहा था। कंपनी का कहना है कि उसके कार्य से कंपनी को नुकसान हो रहा था,जिसके आधार पर उसे पद से अलग कर दिया गया। शिकायत में आरोप है कि पद से हटाए जाने के बाद कंपनी का पूरा डेटा वापस नहीं किया गया। इसके बाद पूर्व कर्मचारी पर कुछ लोगों के साथ मिलकर कंपनी की छवि खराब करने के उद्देश्य से ऑडियो तैयार कराने का आरोप लगाया गया है। कंपनी ने दावा किया है कि वायरल ऑडियो में सुनाई देने वाली आवाज सर्वेश शर्मा की है। हालांकि,आवाज की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
ऑडियो और कैश-बुक के सवाल भी बरकरार : एनएच-343 को लेकर इससे पहले सामने आई मीडिया रिपोर्टों में सड़क की गुणवत्ता, कथित कैश-बुक और वायरल ऑडियो को लेकर सवाल उठाए गए थे। एक रिपोर्ट में 11 लाख 39 हजार रुपये की कथित कैश-बुक का उल्लेख किया गया था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब कंपनी की शिकायत के बाद मामला और गंभीर हो गया है। यदि ऑडियो भ्रामक है तो इसकी तकनीकी जांच होनी चाहिए। वहीं,यदि ऑडियो में सड़क निर्माण या भुगतान से जुड़े आरोप हैं,तो उनकी भी अलग से जांच जरूरी है। कंपनी की शिकायत से सड़क निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े मूल सवाल खत्म नहीं हो जाते।
मानहानि की धाराओं में कार्रवाई की मांग : विनोद लाम्बा ने 16 सितंबर को तातापानी पुलिस चौकी में आवेदन देकर भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(1) एवं 356(3) के तहत कार्रवाई की मांग की है। शिकायत की प्रतियां कलेक्टर बलरामपुर, पुलिस अधीक्षक बलरामपुर-रामानुजगंज और थाना प्रभारी रामानुजगंज को भी दिए जाने की बात कही गई है। फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज में एफआईआर दर्ज होने या आरोपों की जांच के परिणाम की जानकारी नहीं है। ऐसे में पूर्व लेखापाल पर लगाए गए आरोपों को शिकायतकर्ता का पक्ष माना जाना चाहिए, अपराध सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं।
सड़क की गुणवत्ता पर भी हो निष्पक्ष जांच : एनएच-343 क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है। सड़क निर्माण में गुणवत्ता,
सामग्री, भुगतान और तकनीकी निगरानी से जुड़े सवालों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड और तकनीकी जांच से मिलना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वायरल ऑडियो,कथित कैश-बुक और सड़क निर्माण की गुणवत्ता—तीनों की स्वतंत्र जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।
जनता को सड़क चाहिए, आरोप-प्रत्यारोप नहीं। कंपनी की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन सड़क निर्माण से जुड़े जनहित के सवालों का जवाब भी सामने आना चाहिए।


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