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रायपुर/बिलासपुर@हाईकोर्ट ने 2015 और 2016 भर्ती को एक साथ जोड़ने पर उठाए सवाल, वरिष्ठता सूची निरस्त

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  • सर्वेश यादव, सिद्धार्थ पांडे सहित निजी प्रतिवादियों से जुड़ा मामला, नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन को 60 दिन में पुनर्विचार के निर्देश
  • 28 अप्रैल 2026 के आदेश ने खाद्य विभाग की नियुक्ति और पदोन्नति प्रक्रिया पर खड़े किए नए सवाल, खोजी खबरों का आधार बना न्यायालय का रिकॉर्ड

-न्यूज डेस्क-
रायपुर/बिलासपुर,07 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में नियुक्तियों,वरिष्ठता और पदोन्नति को लेकर उठे विवाद को उस समय नया मोड़ मिला,जब छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने WPS क्रमांक 3163/2022(Aparna Arya एवं अन्य बनाम राज्य शासन एवं अन्य) में 28 अप्रैल 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए विभाग द्वारा जारी वरिष्ठता सूची पर गंभीर आपत्ति दर्ज की,माननीय न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने पाया कि वर्ष 2015 और 2016 की अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं से नियुक्त खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को एक ही वरिष्ठता सूची में सम्मिलित कर दिया गया था,जो प्रथम दृष्टया छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सामान्य सेवा शर्तें) नियम, 1961 के नियम 12 के अनुरूप नहीं था।
क्या था पूरा मामला?- याचिका खाद्य सुरक्षा अधिकारी अपरना आर्या,राखी ठाकुर और सरिता पटेल द्वारा दायर की गई थी, याचिका में कहा गया था कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2015 में हुई थी,जबकि निजी प्रतिवादी सर्वेश यादव, सिद्धार्थ पांडे एवं अजय सिंह की नियुक्ति वर्ष 2016 में हुई,इसके बावजूद विभाग ने वरिष्ठता सूची में वर्ष 2016 में नियुक्त अधिकारियों को वर्ष 2015 के अधिकारियों से ऊपर स्थान दे दिया, जिससे उनकी वरिष्ठता और भविष्य की पदोन्नति प्रभावित हुई।
राज्य सरकार ने क्या कहा?-राज्य शासन की ओर से न्यायालय में यह तर्क दिया गया कि वरिष्ठता सूची छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सामान्य सेवा शर्तें) नियम,1961 के नियम 12 के अनुसार तैयार की गई है तथा निजी प्रतिवादी चयन सूची में ऊपर होने के कारण उन्हें वरिष्ठता सूची में भी ऊपर रखा गया।
लीगल नोटिस के बाद फिर चर्चा में आया मामला-इसी विषय पर प्रकाशित समाचारों के बाद दो अधिकारियों की ओर से दैनिक घटती-घटना को 50 लाख की क्षतिपूर्ति मांगते हुए कानूनी नोटिस भेजा गया है,नोटिस में समाचारों को मानहानिकारक बताया गया है, जबकि समाचार पत्र का कहना है कि उसके समाचार न्यायालयीन रिकॉर्ड,उपलब्ध दस्तावेजों और सार्वजनिक महत्व के विषयों पर आधारित खोजी रिपोर्टिंग का हिस्सा हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल-
क्या उच्च न्यायालय के आदेश के बाद विभाग ने वरिष्ठता सूची और उससे जुड़े पदोन्नति संबंधी निर्णयों की पूरी तरह समीक्षा की? यदि समीक्षा हुई तो उसका परिणाम क्या रहा? यदि नहीं हुई,तो क्या न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया? और यदि पालन किया गया,तो उससे जुड़े अभिलेख सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए?
जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
यह पूरा मामला अब केवल वरिष्ठता सूची का विवाद नहीं रह गया है,बल्कि विभागीय पारदर्शिता,भर्ती प्रक्रिया और पदोन्नति व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है,विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विभाग के सभी निर्णय नियमों के अनुरूप हैं तो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा,वहीं यदि कहीं प्रक्रिया में त्रुटि हुई है,तो उसका निराकरण भी आवश्यक है,दैनिक घटती-घटना का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं,बल्कि न्यायालयीन अभिलेखों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सार्वजनिक महत्व के विषयों को सामने लाना है,लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे प्रश्नों का उत्तर जांच और पारदर्शिता से दिया जाना चाहिए,ताकि तथ्य जनता के सामने स्पष्ट रूप से आ सकें।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
न्यायालय ने अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद पाया कि वर्ष 2015 और 2016 की नियुक्तियां अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं से हुई थीं,इसलिए दोनों को एक ही वरिष्ठता सूची में क्लब करना नियमों के विपरीत है,इसी आधार पर न्यायालय ने 18 नवंबर 2021 को नियंत्रक,खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर दिया तथा याचिकाकर्ताओं को नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता देते हुए नियंत्रक को 60 दिनों के भीतर पूरे मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।
यहीं से शुरू हुआ बड़ा विवाद
दैनिक घटती-घटना द्वारा प्रकाशित खोजी समाचारों में इसी न्यायालयीन आदेश और उपलब्ध विभागीय दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियों,वरिष्ठता सूची,पदोन्नति तथा भर्ती नियमों के पालन को लेकर प्रश्न उठाए गए थे,समाचारों में यह नहीं कहा गया था कि कोई अधिकारी दोषी है,बल्कि यह प्रश्न उठाया गया था कि यदि स्वयं उच्च न्यायालय ने वरिष्ठता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज की है, तो उसके आधार पर आगे हुई पदोन्नतियों और प्रशासनिक निर्णयों की भी निष्पक्ष समीक्षा होना आवश्यक है।


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