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अम्बिकापुर@विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका : शिक्षक राष्ट्र के निर्माता

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ब्रह्माकुमारीज के शिक्षा प्रभाग ने आयोजित की संगोष्ठी एवं शिक्षक सम्मान समारोह

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,07 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शिक्षा प्रभाग,अंबिकापुर द्वारा ‘विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका’ विषय पर संगोष्ठी एवं शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान,दीप प्रज्ज्वलन, स्वागत नृत्य, नाटिका,गीत एवं संगीत की प्रस्तुतियों के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय,सरगुजा के कुलपति डॉ. राजेन्द्र लखपाले ने शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक ही राष्ट्र का निर्माता होता है। शिक्षक विद्यार्थियों को ऐसा मार्गदर्शन देता है,जिससे वे आगे चलकर आईएएस,डॉक्टर,इंजीनियर के साथ-साथ अच्छे नागरिक बनते हैं। उन्होंने भारतीय गुरुकुल शिक्षा की विश्वव्यापी प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए शिक्षकों से राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने ‘आत्म दीपो भवः’ की भावना के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी। संयुक्त संचालक सरगुजा संभाग डॉ. राजेश कुमार सिंह ने कहा कि वर्ष 2037 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रत्येक शिक्षक को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निर्धारित करनी होगी। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा ने कहा कि बच्चों की गतिविधियों के साथ उनके संस्कारों पर ध्यान देना भी शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आधुनिक तकनीक के दौर में बच्चों में संस्कार और माता-पिता के प्रति सम्मान की भावना बनाए रखने पर भी उन्होंने जोर दिया।
शिक्षा के साथ आध्यात्मिक मूल्यों पर जोर : ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्र संचालिका एवं सरगुजा संभाग राजयोगिनी बीके विद्या दीदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए ज्ञानवान नागरिक,संस्कारवान युवा, ईमानदार नेतृत्व और चरित्रवान समाज आवश्यक है। शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश विद्यार्थियों को मूल्यवान एवं चरित्रवान बनाने में सहायक है। उन्होंने आध्यात्मिकता को अपनी वास्तविक पहचान एवं जीवन के उद्देश्य को समझने का माध्यम बताया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों को राजयोग का अभ्यास कराया गया तथा सामूहिक नशा मुक्ति प्रतिज्ञा भी दिलाई गई।
इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.एन. खरे ने शिक्षक को अहंकार से दूर रहते हुए विनम्रता के साथ अपने दायित्व का निर्वहन करने की बात कही। डाईट प्राचार्य के.सी. गुप्ता ने कहा कि शिक्षक जब विद्यार्थियों से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं और उन्हें अपने बच्चों के समान मानते हैं,तभी उनमें संस्कारों का विकास होता है। श्री साईं बाबा कॉलेज के प्राचार्य राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा से महान कुछ भी नहीं है। शिक्षक ही विद्यार्थियों की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन संवेदनशीलता और मानवीय भावनाएं विकसित करने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण है। पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार सिन्हा ने कहा कि शिक्षक का सम्मान किसी एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए। भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का विशेष महत्व रहा है। पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य आर.जे. पाण्डेय ने कहा कि तकनीकी साधनों के बढ़ते प्रभाव के बीच शिक्षक और विद्यार्थी के बीच बढ़ती दूरी को कम करने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षा के साथ जीवन मूल्यों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
शिक्षकों का किया सम्मान : कार्यक्रम में राष्ट्रीय एवं राजकीय पुरस्कार से सम्मानित कथक नृत्यांगना सृष्टि मिश्रा ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों को सम्मान पट्टिका, श्रीफल, प्रमाण-पत्र एवं ईश्वरीय सौगात भेंटकर सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक देवेंद्र नाथ दुबे को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। वहीं गिरीश गुप्ता को साक्षर भारत अभियान में विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता मंगल पाण्डेय एवं कवि-साहित्यकार संतोष दास ‘सरल’ की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी प्रतिमा बहन ने किया। इस अवसर पर अंबिकापुर के विभिन्न शासकीय एवं निजी विद्यालयों-महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


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