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कोरिया@स्कूल में खुली अंतरिक्ष की दुनिया…कोरिया के नवाचार को राष्ट्रीय सम्मान

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बच्चों की जिज्ञासा को मिली उड़ान,कोरिया के शैक्षणिक नवाचार को राष्ट्रीय पहचान

  • किताबों से निकलकर स्कूल की लैब तक पहुंचा अंतरिक्ष…कोरिया के नवाचार को राष्ट्रीय पहचान
  • किताब से आगे बढ़ी पढ़ाई,स्पेस लैब ने कोरिया को दिलाई राष्ट्रीय पहचान
  • स्पेस लैब से साइंस लर्निंग तक,कोरिया की नई शिक्षा पद्धति का राष्ट्रीय सम्मान
  • रॉकेट साइंस सेएआई तक,कोरिया के स्कूलों में बदली विज्ञान की पढ़ाई
  • जहां बच्चे पढ़ते थे अंतरिक्ष की कहानी, अब वहीं लैब में समझ रहे उसकी तकनीक
  • स्पेस लैब बनी बच्चों की जिज्ञासा की प्रयोगशाला,कोरिया को राष्ट्रीय पहचान
  • प्रयोग से सीखने की
  • पहल रंग लाई,कोरिया के शैक्षणिक नवाचार को राष्ट्रीय सम्मान
  • स्पेस लैब,साइंस लर्निंग लैब और आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा ने बदली सीखने की तस्वीर,शैक्षणिक प्रशासन एवं नवाचार के लिए जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित


-रवि सिंह-
कोरिया,07 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। अंतरिक्ष की दुनिया हमेशा से बच्चों के लिए कौतूहल और कल्पना का विषय रही है। चांद, तारे,ग्रह,रॉकेट और अंतरिक्ष मिशन के बारे में अब तक अधिकांश बच्चे किताबों,तस्वीरों और समाचार चैनलों के माध्यम से ही जानकारी हासिल करते रहे हैं,लेकिन कोरिया जिले में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों ने इस सोच को बदलने की कोशिश की है,यहां अंतरिक्ष विज्ञान को केवल किताब के अध्याय तक सीमित रखने के बजाय बच्चों की जिज्ञासा और प्रयोग आधारित सीखने से जोड़ने की पहल की गई है,स्पेस लैब और साइंस लर्निंग लैब जैसी पहल ने विद्यार्थियों को विज्ञान एवं तकनीक को करीब से समझने का अवसर दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में किए गए इन्हीं नवाचारों, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए कोरिया के जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है,3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया, जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता ने यह सम्मान राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित पद्मश्री डॉ. जे.एस. राजपूत के हाथों प्राप्त किया, कार्यक्रम में कार्यक्रम निदेशक श्रीमती विनीता सिरोही,वाइस चांसलर श्रीमती शशिकला वंजारी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए शैक्षणिक प्रशासन एवं नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया है,इस सम्मान के साथ कोरिया जिले में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयोगों और नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
विज्ञान प्रदर्शनियों से बढ़ी बच्चों की भागीदारी-जिले में विज्ञान प्रदर्शनियों, साइंस सेमिनार और साइंस कॉन्फ्रेंस के आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान से जोड़ने के प्रयास किए गए,इन गतिविधियों में बच्चों को अपने विचार प्रस्तुत करने,वैज्ञानिक प्रयोगों को समझने और नए विषयों पर चर्चा करने का अवसर मिला,इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों में मंच पर अपनी बात रखने का आत्मविश्वास भी विकसित करती हैं,साथ ही किसी समस्या को समझकर उसके समाधान के बारे में सोचने की आदत विकसित होती है, शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भी विज्ञान को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय गतिविधि आधारित बनाने से विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि पैदा होती है। कोरिया में किए जा रहे प्रयास इसी दिशा में दिखाई देते हैं।
एआई,रॉकेट साइंस और 3डी प्रिंटिंग से परिचय-आज की दुनिया तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,रोबोटिक्स,स्पेस टेक्नोलॉजी और 3डी प्रिंटिंग जैसे क्षेत्र आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार और उद्योग की दिशा बदलने वाले हैं, कोरिया जिले में विद्यार्थियों को इन आधुनिक विषयों से परिचित कराने का प्रयास किया गया,एआई,रॉकेट साइंस, स्पेस टेक्नोलॉजी और 3डी प्रिंटिंग जैसे विषयों को बच्चों की सीखने की प्रक्रिया से जोड़ना इस नवाचार की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है,इसका उद्देश्य बच्चों को भविष्य की तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करना है,शुरुआती उम्र में ही यदि विद्यार्थी इन विषयों के बारे में जानें तो उनके सामने विज्ञान और तकनीक आधारित करियर की संभावनाओं की जानकारी भी विकसित हो सकती है।
वैज्ञानिक सोच विकसित करना बना प्रमुख लक्ष्य-कोरिया के शैक्षणिक नवाचारों का एक महत्वपूर्ण पहलू केवल विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ाना नहीं,बल्कि उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है,वैज्ञानिक सोच का अर्थ केवल विज्ञान की किताब पढ़ना नहीं है, सवाल पूछना,किसी तथ्य को तर्क के आधार पर समझना,प्रयोग के माध्यम से परिणाम देखना और समस्या का समाधान खोजने का प्रयास करना भी वैज्ञानिक सोच का हिस्सा है,स्पेस लैब और साइंस लर्निंग लैब जैसी पहल बच्चों को इसी दिशा में आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकती हैं,इससे विद्यार्थियों में जिज्ञासा पैदा होती है और वे किसी विषय को केवल याद करने के बजाय उसके पीछे के कारणों को समझने का प्रयास करते हैं।
संस्थाओं की सहभागिता ने भी बढ़ाई गतिविधियां-जिले में विज्ञान शिक्षा को मजबूत बनाने में विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता भी रही है,रेड क्रॉस सोसाइटी एवं ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी जैसे संस्थानों की सहभागिता से विज्ञान आधारित गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहयोग मिला,साइंस कॉन्फ्रेंस और अन्य वैज्ञानिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की भागीदारी ने उन्हें अपने स्कूल और कक्षा से बाहर निकलकर व्यापक वैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर दिया,इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि के साथ-साथ संवाद, प्रस्तुति और समस्या समाधान जैसी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर मिला।
राज्य में शैक्षणिक गुणवत्ता में कोरिया का प्रथम स्थान-कोरिया जिले में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह भी बताया गया है कि जिले ने शैक्षणिक गुणवत्ता के मामले में राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है,विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार, नवाचार आधारित शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीक के प्रति रुचि विकसित करने और विद्यालयों में नई गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासों को इस उपलब्धि से जोड़ा गया है, राष्ट्रीय स्तर पर जिला शिक्षा अधिकारी को मिला सम्मान इस उपलब्धि के साथ कोरिया की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।
सम्मान केवल अधिकारी का नहीं, पूरी टीम का-जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता ने राष्ट्रीय सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में लेने के बजाय इसे शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग की पूरी टीम का सामूहिक प्रयास बताया,उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित करना और उन्हें भविष्य की तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करना भी जरूरी है, यही सोच शिक्षा में नए प्रयोगों और नवाचारों को आगे बढ़ाने का आधार बन सकती है।
दूरस्थ जिले से राष्ट्रीय मंच तक पहुंची पहल-कोरिया जैसे जिले में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे इन प्रयोगों की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि आधुनिक तकनीक और विज्ञान आधारित सुविधाओं को लेकर आम धारणा अक्सर बड़े शहरों और महानगरों तक सीमित रहती है, लेकिन यदि जिले के विद्यालयों में बच्चों को स्पेस टेक्नोलॉजी, एआई, 3डी प्रिंटिंग और प्रयोग आधारित विज्ञान शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जाता है तो यह ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोल सकता है,यह पहल बच्चों को यह अहसास भी दिला सकती है कि विज्ञान और तकनीक की दुनिया उनके लिए भी उतनी ही खुली है जितनी किसी बड़े शहर के विद्यार्थी के लिए।
किताब से लैब तक और जिज्ञासा से नवाचार तक-कोरिया में किए गए शैक्षणिक प्रयोगों की सबसे बड़ी खासियत यही दिखाई देती है कि यहां ‘क्या पढ़ना है’ के साथ-साथ ‘कैसे सीखना है’ पर भी ध्यान देने का प्रयास किया गया है,स्पेस लैब इसका सबसे रचनात्मक उदाहरण है, जिस अंतरिक्ष को बच्चे अब तक किताबों, तस्वीरों और समाचार चैनलों में देखते थे,उसे स्कूल की लैब के माध्यम से समझने का अवसर मिलना उनके लिए अलग अनुभव है, एक बच्चा जब रॉकेट,अंतरिक्ष या किसी तकनीकी मॉडल को देखकर सवाल करता है तो वही सवाल उसके भीतर सीखने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। यही जिज्ञासा आगे चलकर वैज्ञानिक सोच और नवाचार की नींव बन सकती है।
राष्ट्रीय सम्मान के बाद बढ़ी जिम्मेदारी
जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता को मिला राष्ट्रीय सम्मान कोरिया जिले के लिए गौरव का विषय जरूर है, लेकिन इसके साथ शिक्षा व्यवस्था के सामने आगे की चुनौती भी है, नवाचारों को केवल पुरस्कार तक सीमित रखने के बजाय उन्हें लगातार विकसित करना और अधिक से अधिक विद्यालयों एवं विद्यार्थियों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा,स्पेस लैब, साइंस लर्निंग लैब,विज्ञान प्रदर्शनियां, साइंस कॉन्फ्रेंस और आधुनिक तकनीक से जुड़े विषयों को यदि निरंतरता के साथ विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाता है तो इसका प्रभाव आने वाले वर्षों में और व्यापक हो सकता है, कोरिया की यह पहल एक संदेश देती है कि यदि बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा को सही दिशा,प्रयोग का अवसर और आधुनिक तकनीक से परिचय मिले,तो दूरस्थ क्षेत्र के स्कूलों से भी विज्ञान और नवाचार की नई कहानी लिखी जा सकती है।
अंतरिक्ष अब केवल किताब का विषय नहीं…
स्कूली बच्चों के लिए स्पेस यानी अंतरिक्ष हमेशा से सबसे रोमांचक विषयों में शामिल रहा है, बच्चे रॉकेट की तस्वीर देखते हैं,अंतरिक्ष यात्रियों के बारे में पढ़ते हैं और टीवी पर अंतरिक्ष मिशन देखते हैं,लेकिन इन चीजों को प्रत्यक्ष रूप से समझने और उनके पीछे काम करने वाली तकनीक को जानने का अवसर सीमित होता है,कोरिया जिले में इसी दूरी को कम करने का प्रयास किया गया, स्पेस लैब की अवधारणा ने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी जानकारी को केवल पढ़ने के बजाय उसे समझने,सवाल पूछने और उसके पीछे की तकनीक को जानने का अवसर दिया,यह पहल बच्चों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरिक्ष विज्ञान में उनकी स्वाभाविक जिज्ञासा को शिक्षा के साथ जोड़ा गया है, रॉकेट कैसे उड़ता है,अंतरिक्ष तकनीक किस तरह काम करती है,उपग्रहों का क्या महत्व है और विज्ञान एवं तकनीक भविष्य को किस तरह बदल सकती है—ऐसे विषय विद्यार्थियों के लिए सीखने का नया अनुभव बनते हैं।
साइंस लर्निंग लैब से बदला पढ़ाई का तरीका
कोरिया जिले में साइंस लर्निंग लैब विकसित करने के प्रयास भी शैक्षणिक नवाचार की महत्वपूर्ण कड़ी रहे हैं,इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तक और रटने की पद्धति तक सीमित रखने के बजाय प्रयोग एवं अनुभव आधारित शिक्षा से जोड़ना है,कक्षा में किसी वैज्ञानिक सिद्धांत को पढ़ना एक बात है और उसी सिद्धांत को प्रयोग के माध्यम से समझना दूसरी,प्रयोगशाला आधारित शिक्षा बच्चों को यह समझने का अवसर देती है कि किताब में पढ़ाया गया सिद्धांत वास्तविक परिस्थितियों में किस तरह काम करता है,इसी सोच के साथ विद्यालयों में विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया गया,विद्यार्थियों को प्रयोग करने, अपनी जिज्ञासा व्यक्त करने और वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने के अवसर दिए गए, इससे विज्ञान को केवल परीक्षा का विषय मानने के बजाय उसे आसपास की दुनिया को समझने का माध्यम बनाने की कोशिश हुई।
एक नजर में उपलब्धियां
– जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान।
– 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में सम्मान समारोह।
– NIEPA द्वारा शैक्षणिक प्रशासन एवं नवाचार के लिए सम्मान।
– वर्ष 2024-25 के लिए राष्ट्रीय सम्मान।
– विद्यालयों में साइंस लर्निंग लैब विकसित करने की पहल।
– स्पेस लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने का प्रयास।
– एआई, रॉकेट साइंस,स्पेस टेक्नोलॉजी और 3डी प्रिंटिंग से विद्यार्थियों का परिचय।
– विज्ञान प्रदर्शनियों,सेमिनार और साइंस कॉन्फ्रेंस को बढ़ावा।
– रेड क्रॉस सोसाइटी एवं ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी की सहभागिता।
– शैक्षणिक गुणवत्ता के मामले में कोरिया जिले के राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने का दावा।


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