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रायपुर@साहब,खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनने की तैयारी करूं या पहले नमूना सहायक बनने का इंतजार करूं?

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  • केंद्रीय कानून से लेकर डीपीसी तक सवाल, नमूना सहायक से खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनने का वैधानिक आधार क्या?
  • नियमों की किताब में क्या है नमूना सहायक से खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनने का रास्ता? सरकार दे जवाब
  • सीधी भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं के बीच पदोन्नति से अधिकारी बने कर्मचारी, नियमों पर उठे गंभीर सवाल
  • खाद्य सुरक्षा अधिकारी की कुर्सी पर पदोन्नति का रास्ता कितना वैध? डीपीसी की नोटशीट से खुलेगा राज
  • क्या खाद्य सुरक्षा अधिकारी की सीधी भर्ती का रास्ता बंद हो रहा है? नमूना सहायकों की पदोन्नति ने बढ़ाई चिंता
  • केंद्रीय खाद्य सुरक्षा कानून,राज्य भर्ती नियम और डीपीसी—किस नियम के आधार पर हुई 13 पदोन्नतियां?
  • तकनीकी पद पर पदोन्नति का आधार क्या? डीपीसी की पात्रता जांच और नियमों की पारदर्शिता पर सवाल
  • हाईकोर्ट के मामलों से लेकर पदोन्नति नियमों तक…खाद्य सुरक्षा विभाग से जुड़े सवालों की लंबी फेहरिस्त
  • सरकार बताए…खाद्य सुरक्षा अधिकारी के कितने पद रिक्त, कितने पदोन्नति से और कितने सीधी भर्ती से भरेंगे?


न्यूज डेस्क
रायपुर,20 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और उसके अधीन बने नियमों में खाद्य सुरक्षा प्रशासन से संबंधित विभिन्न तकनीकी पदों और उनकी जिम्मेदारियों की व्यवस्था है, स्नस्स््रढ्ढ की आधिकारिक वेबसाइट भी खाद्य सुरक्षा से संबंधित अधिनियम, नियम और विनियमों को केंद्रीय नियामक ढांचे के रूप में प्रकाशित करती है, स्नस्स््रढ्ढ के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति और उससे जुड़ी व्यवस्था अधिनियम के प्रावधानों से जुड़ी है, जबकि अलग-अलग तकनीकी पदों की योग्यता समय-समय पर जारी अधिसूचनाओं से निर्धारित होती है। इसी कारण इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज राज्य का लागू भर्ती नियम होगा,यह देखना जरूरी है कि छत्तीसगढ़ में नमूना सहायक से खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति का स्पष्ट प्रावधान किस नियम में है,उसका कोटा कितना है,न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता क्या है,कितना अनुभव आवश्यक है और क्या कोई विभागीय परीक्षा या अन्य पात्रता शर्त निर्धारित है, उपलब्ध 11 अगस्त के आदेश में पदोन्नति का आधार विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा बताया गया है,लेकिन आदेश के इस हिस्से में पूरी पात्रता तालिका या डीपीसी की विस्तृत नोटशीट सार्वजनिक नहीं है।
दीपक अग्रवाल के स्तर पर लंबित पदोन्नति सूची का सवाल- पूर्व में लगाए गए आरोपों में यह भी कहा गया था कि नमूना सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनाने की एक और सूची स्थापना स्तर पर तैयार थी और दीपक अग्रवाल के स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी, अब 11 अगस्त को 13 नमूना सहायकों की पदोन्नति का आदेश सामने आने के बाद इस दावे की भी जांच जरूरी है कि पूरी प्रक्रिया कब शुरू हुई, डीपीसी कब बैठी, पात्रता सूची कब तैयार हुई, आपत्तियां कब आमंत्रित हुईं और अंतिम अनुशंसा कब की गई, यदि स्थापना शाखा की नोटशीट और डीपीसी की कार्यवाही सामने आती है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि निर्णय अचानक लिया गया या लंबे समय से चल रही प्रक्रिया का परिणाम था। यही दस्तावेज विवाद को आरोप से तथ्य की ओर ले जा सकते हैं।
नमूना सहायक की नई भर्ती और पुरानी पदोन्नति का विरोधाभास-मई 2026 के विज्ञापन में नमूना सहायक के 30 पदों पर सीधी भर्ती का प्रावधान है,विज्ञापन में लिखित परीक्षा, मेरिट और विभागीय चयन प्रक्रिया का उल्लेख है,नमूना सहायक के लिए विज्ञान संकाय से हायर सेकेंडरी उत्तीर्ण होना आवश्यक बताया गया है,अब कुछ ही महीनों बाद उसी संवर्ग के 13 कर्मचारियों का खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नत होना इस बात की ओर ध्यान खींचता है कि विभाग अपने कैडर को किस तरह व्यवस्थित कर रहा है, क्या नमूना सहायक संवर्ग को भविष्य में खाद्य सुरक्षा अधिकारी का पदोन्नति चैनल बनाया जा रहा है? यदि हां,तो इसकी स्पष्ट नियमावली क्या है? यदि नहीं,तो वर्तमान पदोन्नति किस विशेष प्रावधान के तहत हुई?
औषधि विभाग और खाद्य विभाग की स्थापना व्यवस्था पर सवाल-शिकायतों में यह सवाल भी उठाया गया है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन एक संयुक्त प्रशासनिक ढांचे में काम करता है,लेकिन खाद्य विभाग के तकनीकी पदों की स्थापना,भर्ती और पदोन्नति संबंधी निर्णय किस अधिकारी और किस शाखा के नियंत्रण में हैं,यह भी पूछा गया है कि क्या खाद्य विभाग की स्थापना शाखा में खाद्य सुरक्षा कानून और तकनीकी सेवा नियमों से परिचित अधिकारी पर्याप्त रूप से शामिल हैं? यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि खाद्य और औषधि दोनों क्षेत्र तकनीकी हैं और दोनों के पदों की योग्यता अलग-अलग होती है,औषधि निरीक्षक बनने के लिए निर्धारित तकनीकी डिग्री अलग है,जबकि खाद्य सुरक्षा अधिकारी के लिए अलग शैक्षणिक एवं वैधानिक मानदंड हैं,इसलिए दोनों संवर्गों की स्थापना प्रक्रिया में संबंधित तकनीकी विशेषज्ञता की भूमिका कितनी है,यह सार्वजनिक होना चाहिए।
अदालत में चल रहे मामलों की भी होगी पड़ताल-पदोन्नति आदेश स्वयं दो हाईकोर्ट प्रकरणों—ङ्खक्क(क्कढ्ढरु) हृश. 91/2019 और ङ्खक्क(स्) हृश. 9778/2019—में 16 अप्रैल 2024 के अंतिम निर्णय के अधीन रहने की बात कहता है,इसलिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन में पदोन्नति,भर्ती,वरिष्ठता और सेवा शर्तों से जुड़े न्यायिक मामलों की सूची तैयार करना जरूरी है, कौन सा मामला किस मुद्दे पर है, किस पद से संबंधित है,उसमें अदालत ने क्या निर्देश दिए हैं और वर्तमान पदोन्नति पर उनका क्या असर है—इन सभी बिंदुओं की अलग से जांच आवश्यक है।
आदेश में मंत्री और सचिव को भी प्रतिलिपि- 11 अगस्त के आदेश की प्रतिलिपि महालेखाकार छत्तीसगढ़ के अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मंत्री के निजी सहायक तथा विभागीय सचिव को भी सूचना के लिए भेजी गई है, इसका अर्थ यह है कि पदोन्नति आदेश शासन के संबंधित उच्च स्तर तक भी सूचना के रूप में भेजा गया है, अब यदि इस आदेश को लेकर शिकायतें पहले से लंबित थीं तो यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि पदोन्नति से पहले उन शिकायतों पर कोई जांच, आपत्ति, विधिक राय या विभागीय परीक्षण हुआ था या नहीं।
अब सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए डीपीसी का आधार-इस पूरे मामले का सबसे साफ समाधान यही है कि सरकार और विभाग निम्न दस्तावेज सार्वजनिक करें—लागू भर्ती एवं पदोन्नति नियम,खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद का स्वीकृत पदबल,रिक्तियों की स्थिति, पदोन्नति कोटा,डीपीसी की संरचना,डीपीसी की कार्यवाही, पात्रता सूची,संबंधित कर्मचारियों के अनुभव एवं शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के परीक्षण का रिकॉर्ड,स्थापना शाखा की नोटशीट और सीधी भर्ती से खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद भरने का प्रस्ताव, यदि इन दस्तावेजों से स्पष्ट हो जाता है कि 13 कर्मचारियों की पदोन्नति नियमों के अनुरूप हुई है तो विवाद समाप्त होना चाहिए, यदि नियमों में कोई विसंगति मिलती है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
अब गेंद सरकार के पाले में-11 अगस्त का आदेश अब जारी हो चुका है। उसमें 13 नमूना सहायकों की पदोन्नति स्पष्ट रूप से दर्ज है और आदेश पर आयुक्त,खाद्य सुरक्षा, छत्तीसगढ़ के हस्ताक्षर हैं, आदेश में यह भी कहा गया है कि यह तत्काल प्रभावशील होगा तथा पदोन्नत कर्मचारियों को 15 दिनों के भीतर नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करना होगा, इसलिए अब मामला केवल आरोप और प्रत्यारोप का नहीं रहा,एक तरफ विभाग का आधिकारिक आदेश है,दूसरी तरफ उसी विभाग की सीधी भर्ती का विज्ञापन है और तीसरी तरफ पदोन्नति की पात्रता एवं वैधानिक आधार को लेकर उठ रहे सवाल हैं,दैनिक घटती-घटना ने जिन बिंदुओं पर पहले सवाल उठाए थे,उनमें से कम से कम एक महत्वपूर्ण तथ्य अब दस्तावेज में सामने आ गया है, डॉ. अर्चना तिवारी का नाम वास्तव में 13 पदोन्नत कर्मचारियों की सूची में शामिल है, अब जरूरत इस बात की है कि सरकार केवल आदेश जारी करने तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी बताए कि इस आदेश के पीछे नियम क्या हैं,डीपीसी ने क्या परीक्षण किया और खाद्य सुरक्षा अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों को भरने की दीर्घकालिक नीति क्या है,क्योंकि खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति का विषय नहीं है,यह सीधे आम नागरिक के भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय है,इसलिए इस पूरे मामले में नियम,योग्यता,अनुभव और पारदर्शिता—चारों का स्पष्ट होना जरूरी है।
व्यंग्य का आखिरी सवाल-अगर नियम इतने साफ हैं तो उन्हें दिखाने में परेशानी क्या है? और अगर नियम दिखाने में परेशानी है तो सवाल पूछने वाले को दोष क्यों? सरकारी नौकरी में सीढि़यां होना अच्छी बात है, लेकिन सीढ़ी किसने बनाई, कितनी मंजिल तक जाती है और किसके लिए खुली है यह बताना भी जरूरी है,वरना कल कोई युवा यह न पूछ बैठे—साहब,खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनने की तैयारी करूं या पहले नमूना सहायक बनने का इंतजार करूं? और यही इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा व्यंग्य है—जनता की थाली की सुरक्षा करने वाले विभाग में इस समय सबसे ज्यादा सवाल थाली के नहीं,कुर्सियों के हैं।
नितेश कुमार मिश्रा को अंबिकापुर
के अधिकारी है या रायपुर के…

इस पूरे प्रकरण में खाद्य सुरक्षा अधिकारी से जिला अभिहित अधिकारी के स्तर तक पहुंचे नितेश कुमार मिश्रा की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं, पूर्व में सामने रखे गए तथ्यों के अनुसार दिसंबर 2015 में खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनने के बाद उनका मूल प्रभार बलरामपुर रहा और अलग-अलग अवधि में सरगुजा,सूरजपुर तथा कोरिया जैसे जिलों के अतिरिक्त प्रभार से उनका नाम जोड़ा गया, 2015 से 2025 के बीच सरगुजा संभाग में लंबे समय तक बने रहने,बाद में पदोन्नति के बाद अंबिकापुर मुख्यालय मिलने तथा 2024-25 में बलरामपुर के मूल दायित्व के साथ अन्य अतिरिक्त दायित्व संभालने को लेकर सवाल उठाए गए हैं,इन आरोपों में यह भी कहा गया कि वे विभागीय पदस्थापन, स्थानांतरण और पदोन्नति से जुड़े मामलों में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे, साथ ही एक कथित सिंडिकेट और अपने समाज के लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए थे, क्या ऐसे अधिकारियों की वजह से स्थापना में हो रही गतिविधियों में इनका नाम शामिल हो जाता है, अंबिकापुर में बैठकर रायपुर तक की दौड़ आखिर वजह क्या है? अपने कार्य स्थल पर कार्यवाही कम रायपुर अपने उच्च कार्यालय से सेटिंग के आरोप लगाते रहे, विभागीय सूत्रों का कहना है की मन चाह जगह पाना है या पदोन्नति में अड़चन आ रहे हैं तो नितेश मिश्रा से मिल लो काम हो जाएगा? क्या ऐसे अधिकारियों के भरोसे शुद्धता विभाग की खत्म होते जा रही है पारदर्शिता खत्म होते जा रही है यह बड़ा सवाल है? और संरक्षण कौन दे रहा है।
क्या पदोन्नति प्रतिशत बदला गया?
पूर्व में उठाए गए सवालों में यह भी कहा गया था कि पदोन्नति का प्रतिशत 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किए जाने के बाद नमूना सहायकों के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनने का रास्ता व्यापक हुआ, यह दावा अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन उपलब्ध 11 अगस्त के आदेश में इस प्रतिशत परिवर्तन का मूल आदेश या नियम संलग्न नहीं है, इसलिए सरकार को वह अधिसूचना या सेवा नियम सार्वजनिक करना चाहिए जिसके आधार पर पदोन्नति कोटा तय किया गया, यदि ऐसा कोई संशोधन हुआ है तो उसकी तारीख, प्रभावी अवधि और पात्र संवर्ग स्पष्ट होना चाहिए, यदि ऐसा संशोधन नहीं हुआ है तो 25 प्रतिशत का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत माना जाएगा, यही कारण है कि इस मामले में मूल राजपत्र और सेवा नियम देखना आवश्यक है।


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