चंद्रगढ़ में 30 बिंदुओं पर हुई चर्चा; निजी भूमि पर शासकीय बोर को लेकर विवाद, रोजगार सहायक पर NMMS हाजिरी में लापरवाही के आरोप
राजपुर/बलरामपुर, 20 अगस्त 2026। ग्राम सभा को ग्रामीणों की समस्याओं और पंचायत की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठाने का सबसे बड़ा मंच माना जाता है। राजपुर जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत चंद्रगढ़ में आयोजित ग्राम सभा में भी कुछ ऐसे ही सवाल सामने आए, जिन्होंने पंचायत व्यवस्था और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बैठक में शासन के निर्देशानुसार 30 बिंदुओं पर चर्चा हुई, लेकिन मकान टैक्स, पेयजल व्यवस्था, प्रधानमंत्री आवास और नरेगा मजदूरी के भुगतान से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।
मकान टैक्स वसूली के लिए कर्मचारी रखने का प्रस्ताव
ग्राम सभा में पंचायत सचिव ने मकान टैक्स की वसूली से संबंधित शासकीय निर्देशों की जानकारी ग्रामीणों को दी। चर्चा के बाद ग्रामीणों की सहमति से मकान टैक्स वसूली के लिए स्थानीय कर्मचारी नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया। यह कर्मचारी साल में एक बार घर-घर जाकर टैक्स की वसूली करेगा। अब देखना यह होगा कि टैक्स वसूली की व्यवस्था तो नियमित होती है, लेकिन पंचायत के मूलभूत कार्यों की निगरानी और जवाबदेही भी उसी गंभीरता से सुनिश्चित की जाती है या नहीं।
शासकीय बोर निजी जमीन पर, पानी को लेकर विवाद
ग्राम सभा में वार्ड क्रमांक 3 की एक महिला ने निजी भूमि पर वार्डवासियों के लिए कराए गए बोर को लेकर शिकायत रखी। आरोप लगाया गया कि भू-स्वामी द्वारा बोर से पानी लेने से रोका जाता है। इस पर भू-स्वामी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने कभी पानी लेने से मना नहीं किया। उनका कहना था कि फसल के मौसम में खेत को नुकसान से बचाने के लिए केवल टोका-टाकी की गई थी। भू-स्वामी ने यह भी बताया कि पिछले गर्मी से पहले करीब तीन महीने तक बोर की मशीन खराब पड़ी थी। पंचायत द्वारा मरम्मत नहीं कराए जाने पर उन्होंने अपने खर्च से बोर की मशीन ठीक करवाई।
उन्होंने ग्राम सभा में यह प्रस्ताव भी रखा कि यदि ग्रामीणों को आपत्ति है तो बोर की मशीन निकालकर वहां हैंडपंप और चबूतरा बनवा दिया जाए।
सवाल यह भीः सरकारी बोर की मरम्मत ग्रामीण क्यों कराए?
यह मामला ग्राम सभा में सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक बनकर सामने आया। यदि पेयजल के लिए पंचायत स्तर पर शासकीय बोर कराया गया है, तो उसके रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी है? पंचायतों को 15वें और 16वें वित्त आयोग के माध्यम से मूलभूत सुविधाओं के लिए राशि मिलती है। ऐसे में यदि किसी शासकीय पेयजल स्रोत की मशीन खराब होने पर ग्रामीण या निजी भू-स्वामी को अपनी जेब से मरम्मत करानी पड़े, तो पंचायत की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए ग्रामीणों को आपसी विवाद में उलझने के बजाय पंचायत को स्पष्ट व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री आवास की ढलाई में देरी, नरेगा मजदूरी भुगतान का मामला गरमाया
ग्राम सभा में मुख्यमंत्री आवास योजना से जुड़े हितग्राही विमल मरकाम के पति से आवास की ढलाई में देरी को लेकर सवाल किया गया। पंचायत सचिव ने जनपद सीईओ के निर्देशों का हवाला देते हुए ढलाई में देरी पर नोटिस दिए जाने की बात कही। हितग्राही के पति ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि नरेगा मजदूरी का भुगतान लंबे समय से लंबित है। मजदूरों को भुगतान करने के लिए उन्हें मजबूरी में आवास निर्माण के लिए मिली राशि का उपयोग करना पड़ा। उन्होंने आश्वासन दिया कि अक्टूबर-नवंबर के बीच आवास की ढलाई का काम पूरा कर लिया जाएगा।
NMMS हाजिरी नहीं तो मजदूरी कैसे मिलेगी?
ग्राम सभा में रोजगार सहायक अंकिता वेक की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए गए। हितग्राही के पति ने आरोप लगाया कि रोजगार सहायक द्वारा समय पर हृरूरूस् के माध्यम से ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं की जाती। उनका दावा है कि आईडी खुलने के दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मास्टर रोल और हाजिरी पूरी नहीं की गई, जिसके कारण मजदूरी का भुगतान अटक गया है। यह आरोप यदि जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला गंभीर है, क्योंकि मनरेगा में मजदूरों की हाजिरी और समय पर भुगतान सीधे उनके रोजगार और आजीविका से जुड़ा विषय है।
सचिव के बचाव के बावजूद ग्रामीणों में असंतोष
रोजगार सहायक पर लगे आरोपों के दौरान सचिव द्वारा उनका बचाव किए जाने की बात भी सामने आई। हालांकि इसके बावजूद ग्रामीणों में रोजगार सहायक की कार्यशैली को लेकर असंतोष बना रहा।
अब आवश्यकता केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि हृरूरूस् रिकॉर्ड, मास्टर रोल और लंबित मजदूरी भुगतान की निष्पक्ष जांच कराने की है। रिकॉर्ड की जांच से ही स्पष्ट होगा कि मजदूरी भुगतान में देरी का वास्तविक कारण क्या है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
ग्राम सभा के सवालों का जवाब अब कार्रवाई से मिलना चाहिए
चंद्रगढ़ की ग्राम सभा में उठे मुद्दे केवल एक पंचायत की बैठक तक सीमित नहीं हैं। ये सीधे पेयजल, रोजगार, मजदूरी भुगतान, आवास और पंचायत की जवाबदेही से जुड़े सवाल हैं।
ग्राम सभा में ग्रामीणों ने अपनी बात रख दी है। अब जिम्मेदार विभागों की बारी है कि शासकीय बोर की स्थिति, उसकी मरम्मत पर हुए खर्च, NMMS हाजिरी, मास्टर रोल और लंबित नरेगा मजदूरी की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएं।
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