नई दिल्ली,20 अगस्त 2026। सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जांच के लिए हाई पावर इन्क्वायरी कमेटी गठित की है। अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। कमेटी का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करना है।
याचिकाओं में लगाए गए गंभीर आरोप
यह मामला शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस तथा सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया। शिकायतों में पैलेट गन, इलेक्टि्रक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है। महिलाओं और बच्चों के साथ कथित मारपीट तथा बदसलूकी के आरोप भी लगाए गए हैं।
सरकार ने हिंसा और पुलिसकर्मियों पर हमले का पक्ष रखा…
दूसरी ओर, सरकार और पुलिस की ओर से अदालत में अलग पक्ष रखा गया। उनका कहना है कि प्रदर्शन में कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसक घटनाएं हुईं और पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें भी आईं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गठित कमेटी केवल एक पक्ष की शिकायतों की जांच नहीं करेगी, बल्कि प्रदर्शन से जुड़े दोनों पक्षों के आरोपों और घटनाओं की निष्पक्ष पड़ताल करेगी।
पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी गठित…
सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए पांच सदस्यों वाली कमेटी बनाई है। इसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी होंगे। कमेटी में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी डॉ. एल.आर. बिश्नोई को सदस्य बनाया गया है।
कमेटी में शामिल प्रमुख सदस्य…
जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कमेटी के चेयरपर्सन होंगे। जस्टिस रवि शंकर झा,जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी डॉ. एल.आर. बिश्नोई जांच टीम में सदस्य के रूप में काम करेंगे। अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी अधिकारियों और न्यायाधीशों को शामिल किए जाने से जांच के व्यापक और निष्पक्ष तरीके से होने की उम्मीद है।
बल प्रयोग की जरूरत और तरीके की होगी जांच…
कमेटी यह जांच करेगी कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कितना बल इस्तेमाल किया और परिस्थितियों के हिसाब से वह उचित था या नहीं। पैलेट गन, इलेक्टि्रक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की परिस्थितियों की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मी निर्धारित वर्दी और नाम की प्लेट में थे या नहीं, इस पहलू को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों पर विशेष ध्यान…
सुप्रीम कोर्ट ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित हिंसा, बदसलूकी और छेड़छाड़ के आरोपों को गंभीरता से लिया है। अदालत ने कमेटी को इन शिकायतों पर प्राथमिकता के आधार पर जांच शुरू करने और पहली अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ सुरक्षा बलों के व्यवहार से जुड़े आरोपों की भी विस्तृत जांच की जाएगी।
पुलिस और सरकारी संपत्ति को नुकसान की भी जांच
अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच का दायरा केवल प्रदर्शनकारियों की शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगा। कमेटी पुलिसकर्मियों पर हुए कथित हमलों, सरकारी एवं निजी संपत्ति को नुकसान और ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को लगी चोटों की भी जांच करेगी। जरूरत पड़ने पर कमेटी फोरेंसिक, तकनीकी और अन्य विशेषज्ञों की सहायता ले सकती है।
डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और जांच एजेंसियों को प्रदर्शन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। इनमें सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा वीडियो, अन्य वीडियो सामग्री, वायरलेस रिकॉर्ड और पीसीआर कॉल रिकॉर्ड शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों और रिकॉर्डिंग को जांच कमेटी के सामने पेश करना होगा।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का रास्ता खुला
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कमेटी के गठन का मतलब पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय या अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक नहीं है। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। कमेटी अपनी जांच एक ही चरण में समाप्त करने के बजाय समय-समय पर अदालत को रिपोर्ट सौंपेगी।
अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी
सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े नए मामलों में नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। अब सभी की नजर हाई पावर कमेटी की जांच और उसकी पहली अंतरिम रिपोर्ट पर रहेगी, जिससे प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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