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अम्बिकापुर@सप्लायर से कैप्सूल के जखीरे तक…‘सुपरमैन’ रंजीत गुप्ता की लगातार कार्रवाई,लेकिन नशे के असली नेटवर्क पर अब भी बड़ा सवाल

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24 घंटे में सप्लायर की गिरफ्तारी के बाद अब 3,528 नशीले कैप्सूल जब्त,दो आरोपी जेल भेजे गए,आखिर इतनी बड़ी खेप गांव तक पहुंची कैसे?


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,10 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। संभागीय आबकारी उड़नदस्ता के प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन कहे जाने वाले रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में चल रहे ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत नशीली दवाइयों के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। श्याम लॉज से साहिल तिर्की की गिरफ्तारी, फिर उसके कथित सप्लायर नितीश गुप्ता तक 24 घंटे में पहुंचने के बाद अब टीम ने सीतापुर क्षेत्र से 3,528 नशीले कैप्सूल का बड़ा जखीरा बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आबकारी विभाग के अनुसार,10 जुलाई को सीतापुर क्षेत्र में गश्त के दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम केसला निवासी सजाद अली अपने घर में भारी मात्रा में नशीले कैप्सूल रखकर बिक्री कर रहा है। सूचना के आधार पर आबकारी उड़नदस्ता टीम ने उसके घर पर दबिश दी। तलाशी के दौरान शयन कक्ष से एक सफेद प्लास्टिक बोरी में रखी 441 स्टि्रप, कुल 3,528 नग SPASMO PROXYVON PLUS कैप्सूल बरामद किए गए। पूछताछ में सजाद अली ने बताया कि यह कैप्सूल धेलसरा निवासी उसके भांजे महबूब खान के हैं। इसके बाद टीम ने तत्काल धेलसरा पहुंचकर महबूब खान को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(सी) एवं 29 के तहत कार्रवाई कर विशेष न्यायालय नारकोटिक्स में पेश किया गया,जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
हर कार्रवाई के बाद अगली कड़ी तक पहुंच रही टीम : हाल के दिनों में आबकारी उड़नदस्ता की कार्रवाई का पैटर्न बदला हुआ नजर आ रहा है। पहले श्याम लॉज से साहिल तिर्की की गिरफ्तारी हुई। फिर उसके बयान के आधार पर नितीश गुप्ता तक टीम पहुंची। अब सीतापुर में सजाद अली की गिरफ्तारी के बाद उसके बताए अनुसार महबूब खान को भी गिरफ्तार कर लिया गया। यानी विभाग अब केवल बरामदगी तक सीमित न रहकर आरोपियों के बयान के आधार पर अगली कडि़यों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है।
लेकिन हर कार्रवाई के साथ बड़ा होता जा रहा नेटवर्क : लगातार हो रही गिरफ्तारियां एक ओर विभाग की सक्रियता दिखाती हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी बताती हैं कि नशीले पदार्थों का कारोबार अभी भी व्यापक स्तर पर फैला हुआ है। पहले इंजेक्शन, फिर महुआ शराब, फिर होटलों से अवैध शराब और अब हजारों नशीले कैप्सूल की बरामदगी यह संकेत देती है कि नशे का स्वरूप लगातार बदल रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गांव के एक घर तक 3,528 कैप्सूल पहुंचे कैसे? क्या यह केवल स्थानीय स्तर का कारोबार है या इसके पीछे कोई बड़ा सप्लाई नेटवर्क काम कर रहा है?
सप्लाई चेन की जांच सबसे अहम : अब तक की अधिकांश कार्रवाइयों में विभाग ने कैरियर,विक्रेता और कुछ कथित सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। लेकिन अब भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीले इंजेक्शन और कैप्सूल आखिर किस स्रोत से निकलकर सरगुजा संभाग के अलग-अलग इलाकों तक पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जब्त दवाओं के बैच नंबर, खरीद के दस्तावेज, वितरण श्रृंखला और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जाए तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
ऑपरेशन क्लीन की अगली परीक्षा सुपरमैन रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में चल रहा ‘ऑपरेशन क्लीन’ लगातार बड़ी बरामदगियां और गिरफ्तारियां दर्ज कर रहा है। लेकिन अब इसकी सफलता का वास्तविक पैमाना केवल जब्ती और गिरफ्तारी नहीं,बल्कि यह होगा कि क्या जांच उन लोगों तक पहुंचती है जो पर्दे के पीछे बैठकर इस पूरे अवैध कारोबार का संचालन कर रहे हैं।
क्योंकि हर नई कार्रवाई के साथ एक नया नाम सामने आ रहा है,लेकिन यह सवाल अब भी बाकी है …
आखिर सरगुजा संभाग में नशीली दवाओं की इतनी बड़ी खेप पहुंचा कौन रहा है,और इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कब बेनकाब होगा?


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