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खड़गवां@ सुबह 10 बजे खुलना चाहिए कार्यालय…लेकिन 12ः30 बजे तक गायब रहते हैं अधिकारी-कर्मचारी!

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खड़गवां में शासन के आदेश की उड़ रहीं धज्जियां,ग्रामीण यांत्रिकी विभाग का कार्यालय चपरासी के भरोसे, जनता भटक रही,जिम्मेदार नदारद,समयपालन और जवाबदेही पर उठा सवाल
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,22 जून 2026 (घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शासकीय कार्यालयों में समयबद्ध कार्य संस्कृति और आम जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। शासन के निर्देशानुसार सभी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति सुबह 10 बजे सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों के कार्य समय पर हो सकें,लेकिन खड़गवां मुख्यालय स्थित ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग के कार्यालय की स्थिति इन निर्देशों के बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है, स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में सामने आया कि दोपहर 12ः30 बजे तक कार्यालय में न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद था और न ही अधिकांश कर्मचारी,पूरे कार्यालय का संचालन केवल चपरासी के भरोसे चलता दिखाई दिया, ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद नहीं हैं तो जनता के कार्य कैसे हो रहे होंगे?
शासन के आदेश कागजों तक सीमित, जमीनी हकीकत कुछ और…
राज्य शासन ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि कार्यालय समय का कड़ाई से पालन किया जाए और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो, लेकिन खड़गवां स्थित ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के कार्यालय में यह व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित दिखाई दी, कार्यालय समय शुरू होने के ढाई घंटे बाद तक भी अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, कार्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ था और लोगों को यह जानकारी देने वाला भी कोई नहीं था कि अधिकारी कब आएंगे और उनके कार्य कब होंगे।
चपरासी के भरोसे चल रहा कार्यालय
निरीक्षण के दौरान कार्यालय में केवल चपरासी की मौजूदगी दिखाई दी,आमतौर पर किसी भी कार्यालय में चपरासी की भूमिका सहयोगात्मक होती है, लेकिन यहां पूरा कार्यालय उसी के भरोसे चलता नजर आया, कार्यालय में आने वाले लोगों को वही जानकारी दे रहा था और अधिकारियों की अनुपस्थिति के संबंध में पूछे जाने पर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा था, इससे यह प्रतीत होता है कि विभाग में प्रशासनिक अनुशासन और निगरानी की स्थिति बेहद कमजोर है।
यह एक दिन की नहीं… लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था?
स्थानीय नागरिकों और विभागीय गतिविधियों से जुड़े लोगों का कहना है कि यह स्थिति कोई नई नहीं है,आरोप है कि विभाग में लंबे समय से अधिकारियों और कर्मचारियों के आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं है,लोगों का कहना है कि कई बार कार्यालय खुला रहता है,लेकिन अधिकारी मुख्यालय में उपलब्ध नहीं होते। इससे आम लोगों के साथ-साथ विभागीय कार्य भी प्रभावित होते हैं,यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल समयपालन का मामला नहीं,बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी गंभीर प्रश्न है।
अधिकारी समय पर नहीं,तो कर्मचारियों से अनुशासन की उम्मीद कैसे?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि किसी भी कार्यालय में अनुशासन की शुरुआत शीर्ष स्तर से होती है, यदि विभाग के अधिकारी स्वयं समय पर उपस्थित नहीं होते तो अधीनस्थ कर्मचारियों से अनुशासन और समयपालन की अपेक्षा करना कठिन हो जाता है,स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग में कार्य संस्कृति प्रभावित हो चुकी है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है,शासन द्वारा निर्धारित नियम यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर ही लागू नहीं हो रहे हैं तो फिर नियमों का औचित्य क्या रह जाता है?
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान
ग्रामीण यांत्रिकी विभाग से जुड़े अधिकांश कार्य ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित होते हैं,ऐसे में दूर-दराज के गांवों से लोग अपनी समस्याओं और आवश्यक कार्यों को लेकर कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन जब कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद नहीं मिलते तो लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है,कई लोग परिवहन और समय खर्च करके कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन निराश होकर वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं, ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों की लापरवाही का सबसे अधिक नुकसान गरीब और ग्रामीण वर्ग को उठाना पड़ता है।
कलेक्टर से कार्रवाई की मांग…
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है, उनका कहना है कि सभी शासकीय कार्यालयों में समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नियमित और औचक निरीक्षण होना चाहिए, नागरिकों का कहना है कि यदि समयपालन और जवाबदेही तय नहीं की गई तो शासन की मंशा और जनता की उम्मीदों के बीच की दूरी लगातार बढ़ती जाएगी, लोगों ने मांग की है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए ताकि शासकीय कार्यालयों में अनुशासन और कार्य संस्कृति स्थापित हो सके।
सवाल सिर्फ एक कार्यालय का नहीं, व्यवस्था का है…
खड़गवां के ग्रामीण यांत्रिकी विभाग का यह मामला केवल एक कार्यालय तक सीमित नहीं माना जा रहा,यह उस व्यापक समस्या की ओर भी संकेत करता है जहां कई बार शासकीय कार्यालयों में समयपालन और जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न उठते रहे हैं,अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस मामले को किस गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में ऐसी व्यवस्था बनाई जाती है जिससे जनता को समय पर सेवाएं मिल सकें और शासन के आदेशों का पालन धरातल पर दिखाई दे।
कई सवालों के जवाब तलाश रही जनता
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं…
सुबह 10 बजे खुलने वाले कार्यालय में दोपहर 12ः30 बजे तक अधिकारी और कर्मचारी क्यों नहीं पहुंचे?
क्या शासन द्वारा जारी समयपालन संबंधी आदेश इस विभाग पर लागू नहीं होते?
कार्यालय में उपस्थिति की निगरानी कौन कर रहा है?
जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को है या नहीं?
आम जनता को हो रही परेशानी के लिए जवाबदेह कौन है?
क्या विभागीय स्तर पर कभी औचक निरीक्षण किया जाता है?
क्या जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा?


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