महापौर पर 3 लाख रुपए लेने के आरोप, भाजपा जिलाध्यक्ष से कथित बातचीत ने बढ़ाई हलचल, मेयर ने बताया राजनीतिक साजिश,निष्पक्ष जांच की मांग…
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,22 जून 2026 (घटती-घटना)। नगर की राजनीति में सोमवार को उस समय नया विवाद खड़ा हो गया,जब महापौर मंजूषा भगत और भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया के बीच बातचीत का कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल ऑडियो को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि मेले की अनुमति से जुड़े मामले में 3 लाख रुपए के लेन-देन की चर्चा हुई। हालांकि वायरल ऑडियो की प्रमाणिकता और आवाज की पुष्टि अभी आधिकारिक रूप से नहीं हुई है। ऑडियो सामने आने के बाद भाजपा और कांग्रेस के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है,वहीं महापौर मंजूषा भगत ने पूरे प्रकरण को अपनी छवि खराब करने की कोशिश और राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने कहा है कि मामले की जांच होनी चाहिए,ताकि वास्तविकता सामने आ सके।
मेले की अनुमति को लेकर शुरू हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि पूरा मामला अंबिकापुर में लगने वाले मेले की अनुमति और उससे जुड़े विवाद से जुड़ा है। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर अनुमति प्रक्रिया और पैसों से संबंधित बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। ऑडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ऑडियो की जांच जरूरी मानी जा रही है,क्योंकि डिजिटल माध्यम से सामने आने वाले ऑडियो और वीडियो की सत्यता की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकती है।
महापौर का पलटवार…बदनाम करने की कोशिश
महापौर मंजूषा भगत ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से इस तरह की सामग्री वायरल की जा रही है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि अगर ऑडियो सही है तो उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए और अगर गलत है तो इसके पीछे के लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
भाजपा जिलाध्यक्ष का नाम आने से बढ़ी सियासी गर्मी
इस पूरे विवाद में भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया का नाम आने से राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। भाजपा और विपक्ष दोनों ही पक्षों में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निकाय राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

वायरल ऑडियो विवाद : महापौर मंजूषा भगत ने बताया राजनीतिक षड्यंत्र
आदिवासी महिला जनप्रतिनिधि को बदनाम करने की साजिश का आरोप,फर्जी ऑडियो की फोरेंसिक जांच की मांग..
नगर पालिक निगम अंबिकापुर की महापौर मंजूषा भगत से जुड़े कथित वायरल ऑडियो मामले ने शहर की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। वायरल ऑडियो में कथित रूप से मेले की अनुमति और 3 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। वहीं महापौर मंजूषा भगत ने पूरे मामले को सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए अजाक थाना अंबिकापुर में शिकायत दर्ज कराई है और कथित ऑडियो की तकनीकी व फोरेंसिक जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। महापौर ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 21 जून 2026 को अनुराग मिश्रा द्वारा सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से एक कथित ऑडियो क्लिप प्रसारित की गई, जिसमें कला केंद्र मैदान/मीना बाजार से संबंधित कथित भ्रष्टाचार और अवैध लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह निराधार, भ्रामक और मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि इस तरह की सामग्री उनकी सामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
लोकप्रियता से घबराए लोगों की साजिश : महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि वे अनुसूचित जनजाति समाज से आने वाली महिला जनप्रतिनिधि हैं और उनकी बढ़ती स्वीकार्यता व जनसमर्थन से घबराकर कुछ राजनीतिक तत्व उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत मानहानि का विषय नहीं है, बल्कि महिला जनप्रतिनिधि के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल : वायरल ऑडियो मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष और महापौर के बीच कथित बातचीत का दावा किए जाने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि ऑडियो की वास्तविकता और उसमें मौजूद आवाजों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। महापौर के समर्थन में निगम सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी,जिला महामंत्री विनोद हर्ष, मधुसूदन शुक्ला,पार्षद मनीष सिंह, रुपेश दुबे,एमआईसी सदस्य जितेंद्र सोनी सहित कई पार्षद और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
फिलहाल मामला पुलिस शिकायत तक पहुंच चुका है और अब सभी की नजर जांच की दिशा और रिपोर्ट पर टिकी है।
ऑडियो की हो तकनीकी जांच…
शिकायत में महापौर ने मांग की है कि वायरल ऑडियो की निष्पक्ष तकनीकी एवं फोरेंसिक जांच कराई जाए। जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाए कि ऑडियो किसने तैयार किया, किसके निर्देश पर बनाया गया और किन लोगों ने इसे सोशल मीडिया पर फैलाने में भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि जांच केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरे मामले के पीछे सक्रिय लोगों,समूहों या राजनीतिक संरक्षण देने वालों की भी जांच होनी चाहिए।
राजनीतिक विरोध स्वीकार,बदनाम करने की कोशिश नहीं…
महापौर ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन किसी महिला जनप्रतिनिधि को बदनाम करने के लिए फर्जी सामग्री तैयार करना और सोशल मीडिया का दुरुपयोग करना गंभीर अपराध है। उन्होंने प्रशासन से भारतीय न्याय संहिता,साइबर अपराध से जुड़े प्रावधानों और अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग की है।
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