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मनेंद्रगढ़ @ वन विभाग में टकराव के बाद पिघली बर्फ

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: प्रदेश अध्यक्ष को रेस्ट हाउस में कमरा देने से इनकार पर मचा बवाल
कर्मचारियों के आक्रोश के आगे झुके डीएफओ…लंबी चर्चा के बाद सुलझा विवाद
-रवि सिंह-
मनेंद्रगढ़ 22 जून 2026 (घटती-घटना)।
वन विभाग में सोमवार को उस समय अभूतपूर्व स्थिति निर्मित हो गई जब अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सीधा टकराव खुलकर सामने आ गया,छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष अजीत दुबे के प्रथम मनेंद्रगढ़ आगमन पर उन्हें विभागीय विश्राम गृह (रेस्ट हाउस) में कमरा उपलब्ध नहीं कराए जाने के मामले ने देखते ही देखते बड़ा विवाद खड़ा कर दिया,कर्मचारियों ने इसे केवल आवास का नहीं बल्कि पूरे कर्मचारी संगठन के सम्मान और अस्मिता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध का मोर्चा खोल दिया, स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि वन मंडल कार्यालय परिसर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शनों से गूंज उठा। अंततः कर्मचारियों के बढ़ते आक्रोश और संगठनात्मक दबाव के बीच वन मंडलाधिकारी चंद्र कुमार अग्रवाल को बातचीत करनी पड़ी और विवाद का पटाक्षेप हुआ।
प्रदेश अध्यक्ष के आगमन से पहले ही शुरू हुआ विवाद-जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष अजीत दुबे के मनेंद्रगढ़ आगमन को लेकर स्थानीय कर्मचारी संगठन काफी उत्साहित था, प्रदेश अध्यक्ष के ठहरने की व्यवस्था के लिए विभागीय विश्राम गृह में कमरा उपलब्ध कराने का अनुरोध भी पूर्व में किया गया था, कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि इसके बावजूद वन मंडलाधिकारी द्वारा रेस्ट हाउस में कमरा उपलब्ध नहीं कराया गया, जैसे ही यह जानकारी कर्मचारियों तक पहुंची, नाराजगी तेजी से फैल गई और जिलेभर के कर्मचारी वन मंडल कार्यालय पहुंचने लगे।
कर्मचारियों ने खोला मोर्चा,कार्यालय परिसर में गूंजे नारे- कुछ ही देर में वन मंडल कार्यालय का माहौल पूरी तरह बदल गया, बड़ी संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, कर्मचारी एकता जिंदाबाद‘,‘डीएफओ की तानाशाही नहीं चलेगी‘,‘कर्मचारी सम्मान से समझौता नहीं’ और ‘संगठन का अपमान बर्दाश्त नहीं’ जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा, कर्मचारी नेताओं ने कहा कि मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे कर्मचारी संगठन के सम्मान का है, उनका कहना था कि प्रदेश अध्यक्ष पूरे प्रदेश के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके साथ ऐसा व्यवहार कर्मचारियों की भावनाओं को आहत करने वाला है।
बढ़ते आक्रोश के बीच डीएफओ चैंबर में हुई निर्णायक बैठक-बाहर बढ़ती भीड़ और लगातार हो रही नारेबाजी के बीच प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे स्वयं जिला पदाधिकारियों के साथ वन मंडलाधिकारी के चैंबर पहुंचे, सूत्रों के अनुसार बंद कमरे में दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक गंभीर और तीखी चर्चा हुई,कर्मचारी प्रतिनिधियों ने पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी व्यक्त करते हुए भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने की मांग रखी,चर्चा के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण बताया गया,लेकिन दोनों पक्षों ने संवाद के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास जारी रखा।
डीएफओ ने कहा—पूरी जानकारी नहीं थी- बैठक के बाद बाहर आए प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने मीडिया को बताया कि वन मंडलाधिकारी ने इस मामले में जानकारी के अभाव की बात स्वीकार की है,उन्होंने कहा कि डीएफओ ने भविष्य में कर्मचारी संगठनों के साथ बेहतर समन्वय और संवाद बनाए रखने का आश्वासन दिया है,साथ ही उन्होंने सौहार्दपूर्ण वातावरण में विभागीय कार्य संचालन करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
तत्काल आवंटित किया गया रेस्ट हाउस का कमरा-बैठक समाप्त होने के तुरंत बाद वन विभाग के शासकीय विश्राम गृह में प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे के लिए कमरा आवंटित कर दिया गया,इसके साथ ही पूरे विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल आया और कर्मचारियों ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया, कर्मचारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं था,बल्कि संगठन के सम्मान से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात मजबूती से रखना था।
घटना ने उजागर की संवादहीनता की समस्या
हालांकि मामला सुलझ गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने वन विभाग के भीतर अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच संवाद और समन्वय की स्थिति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, कर्मचारियों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही संवाद स्थापित कर लिया जाता और संवेदनशीलता दिखाई जाती, तो इतनी बड़ी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। वहीं कई कर्मचारियों का मानना है कि विभाग में समय-समय पर संवाद की कमी के कारण छोटे मुद्दे भी बड़े विवाद का रूप ले लेते हैं।
भविष्य के लिए मिला बड़ा संदेश…
सोमवार का यह घटनाक्रम भले ही शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया हो, लेकिन इसने वन विभाग को एक बड़ा संदेश जरूर दिया है कि संगठन और प्रशासन के बीच बेहतर संवाद, आपसी सम्मान और समन्वय बनाए रखना आवश्यक है, कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर वे भविष्य में भी एकजुट रहेंगे, वहीं विभागीय अधिकारियों ने भी सहयोग और तालमेल के साथ कार्य करने का भरोसा दिलाया है, फिलहाल विवाद थम गया है, लेकिन मनेंद्रगढ़ वन मंडल में सोमवार को घटी यह घटना लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहने की संभावना है।


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