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जनकपुर/एमसीबी @ जनकपुर में दिनदहाड़े 4 लाख की चोरी ने उड़ाए होश

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स्टेट बैंक से कुछ कदम दूर कार का कांच फोड़कर रकम पार,आरोपी सीसीटीवी में कैद फिर भी पुलिस के हाथ खाली
पहले ही दिन इनाम की घोषणा से उठे सवाल,क्या आरोपियों के सामने पुलिस ने मान ली मजबूरी?
-रवि सिंह-
जनकपुर/एमसीबी,15 मई 2026 (घटती-घटना)।
एमसीबी जिले के जनकपुर में दिनदहाड़े हुई बड़ी चोरी की घटना ने पुलिस व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और कानून व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा जनकपुर से रकम निकालकर निकले एक व्यक्ति की कार का कांच तोड़कर बदमाश लाखों रुपये लेकर फरार हो गए,घटना इतनी तेजी और प्लानिंग के साथ अंजाम दी गई कि आसपास मौजूद लोगों को भनक तक नहीं लगी, सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घटना बैंक से महज कुछ दूरी पर हुई, आरोपी सीसीटीवी कैमरों में कैद भी हो गए, पुलिस ने आरोपियों की पहचान भी कर ली,लेकिन इसके बावजूद गिरफ्तारी नहीं हो सकी। अब पुलिस द्वारा घटना के तुरंत बाद आरोपियों पर इनाम घोषित किए जाने को लेकर जिलेभर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार,प्रार्थी ध्रुव यादव (निवासी खिरकी,थाना कोटाडोल) ने भारतीय स्टेट बैंक,शाखा जनकपुर से चेक के माध्यम से 4,25,000 रुपये निकाले थे। उन्होंने यह रकम अपनी कार की सामने वाली सीट पर रखी थी। इसी दौरान अज्ञात आरोपियों ने कार के दरवाजे का कांच तोड़कर नकदी से भरा बैग पार कर दिया, इस घटना पर थाना जनकपुर में अपराध क्रमांक 98/2026, धारा 305 (ख) (ग) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दिनदहाड़े हुई वारदात ने बढ़ाया डर का माहौल- जनकपुर जैसे अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र में दिनदहाड़े इस तरह की बड़ी चोरी ने आम लोगों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है,लोगों का कहना है कि जब बैंक क्षेत्र में,लोगों की आवाजाही के बीच और मुख्य इलाके में इस तरह की घटना हो सकती है तो फिर आम आदमी खुद को कहां सुरक्षित माने? स्थानीय लोगों का कहना है कि बैंक के आसपास सुरक्षा व्यवस्था अक्सर कमजोर रहती है। कई बार संदिग्ध लोग बैंक परिसर के आसपास घूमते दिखाई देते हैं,लेकिन उन पर कोई निगरानी नहीं होती। अब इस घटना के बाद लोग बैंक से रकम निकालने में भी डर महसूस कर रहे हैं।
सीसीटीवी में आरोपी कैद,पहचान भी हुई,फिर गिरफ्तारी क्यों नहीं? पुलिस ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि विवेचना के दौरान आरोपियों की पहचान पिंटू यादव निवासी कटिहार बिहार तथा सुमित सिसोदिया उर्फ बंदर निवासी अनूपपुर मध्यप्रदेश के रूप में हुई है,पुलिस का दावा है कि आरोपियों की तलाश में लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है, लेकिन यही बात अब सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है। जब आरोपी चिन्हित हैं,उनके नाम और पते पुलिस के पास हैं, सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं,तब आखिर गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है? लोगों के बीच चर्चा है कि तकनीक के इस दौर में पुलिस मोबाइल लोकेशन,सीसीटीवी नेटवर्क,टोल प्लाजा फुटेज और साइबर ट्रैकिंग के जरिए कई मामलों का कुछ ही घंटों में खुलासा कर देती है,फिर इस मामले में पुलिस की कार्रवाई इतनी धीमी क्यों नजर आ रही है?
पहले ही दिन इनाम की घोषणा,लोगों ने उठाए सवाल
घटना के बाद पुलिस अधीक्षक एमसीबी द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 5,000 के इनाम की घोषणा की गई, प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि जो भी व्यक्ति आरोपियों की गिरफ्तारी में सहायक सूचना देगा उसे पुरस्कार दिया जाएगा और उसकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी, लेकिन पुलिस की इस कार्रवाई ने उल्टा कई सवाल खड़े कर दिए हैं,लोगों का कहना है कि आमतौर पर इनाम की घोषणा तब की जाती है जब आरोपी लंबे समय तक फरार हों या पुलिस को कोई सुराग न मिल रहा हो, यहां तो घटना के शुरुआती दौर में ही इनाम घोषित कर दिया गया, ऐसे में चर्चा यह भी है कि क्या पुलिस ने शुरुआत में ही यह मान लिया कि आरोपी उसकी पकड़ से बाहर हैं? कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यदि पुलिस उसी तेजी से दबिश और तकनीकी जांच करती जिस तेजी से इनाम घोषित किया गया, तो शायद आरोपी अब तक गिरफ्त में आ चुके होते।
बैंक से निकाले थे लाखों रुपये, पहले से पीछा कर रहे थे आरोपी?
जानकारी के अनुसार प्रार्थी ध्रुव यादव निवासी खिरकी ने जनकपुर थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा जनकपुर से करीब 4,25,000 की रकम निकाली थी, रकम कार की सामने वाली सीट पर रखी गई थी, बताया जा रहा है कि बैंक से बाहर निकलने के बाद कुछ ही दूरी पर कार खड़ी थी और इसी दौरान अज्ञात आरोपियों ने बेहद शातिर तरीके से कार का कांच तोड़ा और रकम से भरा बैग लेकर मौके से फरार हो गए, घटना के तरीके को देखकर यह आशंका भी जताई जा रही है कि आरोपी बैंक से ही पीडि़त पर नजर बनाए हुए थे और रकम निकालने के बाद लगातार उसका पीछा कर रहे थे, जैसे ही मौका मिला, वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।


साइबर सेल और तकनीकी जांच पर टिकी उम्मीदें…
अब इस पूरे मामले में लोगों की उम्मीदें साइबर सेल और तकनीकी टीम पर टिक गई हैं,जानकारों का कहना है कि यदि पुलिस गंभीरता से तकनीकी जांच करे तो आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल नहीं होना चाहिए,बैंक के सीसीटीवी,आसपास लगे कैमरे, मोबाइल लोकेशन, बैंक ट्रांजैक्शन के समय की गतिविधियां और संभावित भागने के रास्तों की डिजिटल निगरानी के जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंच सकती है, अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस की साइबर टीम और जांच एजेंसियां इस मामले को कितनी तेजी से सुलझा पाती हैं।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सरकार को घेरा
घटना को लेकर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है,उन्होंने कहा कि जनकपुर में स्टेट बैंक से महज कुछ कदम दूरी पर दिनदहाड़े कार का कांच तोड़कर लाखों रुपये चोरी हो जाना बेहद चिंताजनक है,उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था कमजोर होती जा रही है और अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं,उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? यदि बैंक क्षेत्र में भी लोग सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी कहां जाए?
अब पुलिस के सामने प्रतिष्ठा का सवाल
जनकपुर की इस हाईप्रोफाइल चोरी की घटना ने अब पुलिस की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है, एक तरफ आरोपी सीसीटीवी में कैद हैं,दूसरी तरफ पुलिस अब तक उन्हें पकड़ नहीं सकी है,ऐसे में यह मामला अब केवल चोरी का नहीं,बल्कि पुलिस की कार्यक्षमता और तकनीकी क्षमता की परीक्षा बन चुका है,जनता अब केवल प्रेस विज्ञप्ति और इनाम की घोषणा नहीं,बल्कि आरोपियों की गिरफ्तारी देखना चाहती है, अब देखना यह होगा कि एमसीबी पुलिस इस मामले का खुलासा कितनी जल्दी कर पाती है और दिनदहाड़े हुई इस बड़ी चोरी के पीछे का पूरा नेटवर्क कब सामने आता है।


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