
कागजों में दौड़ रहा जल जीवन मिशन,
ज़मीन पर बूंद-बूंद को तरसती जनता
वाह रे सुशासन! साल भर से रावतसरई में बोरिंग बनी ‘शोपीस’,
गड्ढों के भरोसे बुझ रही पारा डोल की प्यास

-राजन पाण्डेय-
कोरिया15 मई 2026(घटती-घटना)। एक तरफ प्रदेश सरकार सुशासन तिहार मनाकर विकास के ढोल पीट रही है,दूसरी तरफ गांवों की हकीकत उन दावों को खुलेआम चुनौती देती नजर आ रही है,सरकारी मंचों पर योज नाओं की सफलता के गीत गाए जा रहे हैं, लेकिन गांवों में लोग आज भी पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे हैं, कहीं करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई जल जीवन मिशन की पाइपलाइन हवा उगल रही है, तो कहीं एक साल पहले किए गए बोर आज भी बिना हैंडपंप के सरकारी शोपीस बनकर खड़े हैं, सवाल यह है कि आखिर हर घर जल का सपना कागजों से निकलकर जमीन तक कब पहुंचेगा?

तकनीकी लापरवाही या भ्रष्टाचार? सवालों के घेरे में पूरी योजना…
जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कई गांवों में व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। ऐसे में अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या पाइपलाइन बिछाते समय तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई? क्या टंकी की ऊंचाई और पानी के दबाव का सही आकलन नहीं किया गया? क्या घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग हुआ? या फिर पूरी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई? ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ कागजों में योजनाएं पूरी दिखाकर वाहवाही लूट रहे हैं, जबकि धरातल पर लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

सुशासन तिहार बनाम जल संकट सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई में बड़ा अंतर
प्रदेशभर में सुशासन तिहार के नाम पर सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं,मंचों से विकास और जनकल्याण की बातें हो रही हैं,लेकिन कोरिया जिले के गांवों की तस्वीर इन दावों की चमक फीकी कर रही है,एक ओर सरकार उपलब्धियों का उत्सव मना रही है,दूसरी ओर ग्रामीण पानी के लिए गड्ढों में बर्तन रख रहे हैं,सवाल यह है कि क्या सरकारी तंत्र को सिर्फ आंकड़े पूरे करने से मतलब है? क्या योजनाओं का उद्देश्य केवल उद्घाटन और फोटो सेशन तक सीमित रह गया है? ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजनाओं का लाभ जमीन तक नहीं पहुंच रहा,तो ऐसे उत्सव जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसे हैं।

पंच संघ ने दी चेतावनी…एक हफ्ते में काम नहीं हुआ…तो होगा घेराव…
पंच संघ अध्यक्ष प्रेम सागर तिवारी ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर रावतसरई में हैंडपंप स्थापना का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो समस्त पंच विभागीय कार्यालय का घेराव करेंगे,उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण बाल्टी,घड़ा और पानी भरने के बर्तन लेकर कार्यालय पहुंचेंगे और अनिश्चितकालीन धरना देंगे, उनका कहना है कि अब केवल ज्ञापन और आश्वासन से काम नहीं चलेगा। ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं और प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा।

रावतसरई में विकास का ‘ड्राई मॉडल’ साल भर पहले बोरिंग हुई,आज तक नहीं लगा हैंडपंप
रावतसरई ग्राम पंचायत के ग्राम सिंहपानी से जो तस्वीर सामने आई है,वह सरकारी कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है, पंच संघ अध्यक्ष प्रेम सागर तिवारी ने आरोप लगाया कि पंच दिल कुँवर के घर के पास लगभग एक वर्ष पूर्व दो बोरिंग कराई गई थी,उस समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब पानी की समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन विभाग की कार्यशैली ऐसी रही कि बोरिंग तो हो गई,मगर हैंडपंप आज तक नहीं लग पाया,अब हालात यह हैं कि गांव के बीचों-बीच खड़ी बोरिंग ग्रामीणों को पानी नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता की याद दिला रही है, वार्ड क्रमांक 8 की पंच दिल कुँवर का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत की,दफ्तरों के चक्कर लगाए,लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। काम शुरू होने के बजाय फाइलें इधर-उधर घूमती रहीं,ग्रामीणों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधियों की ही सुनवाई नहीं हो रही,तब आम जनता की परेशानी कौन सुनेगा?
जल जीवन मिशन की पाइपलाइन में हवा…पारा डोल में गड्ढों के भरोसे चल रही जिंदगी…
पारा डोल गांव में हर घर नल,हर घर जल का सपना पूरी तरह दम तोड़ता नजर आ रहा है,कागजों में गांव को नल कनेक्शन से जोड़ दिया गया है, लेकिन जमीनी स्थिति देखकर ऐसा लगता है जैसे योजना सिर्फ रिपोर्टों में सफल हुई हो,ग्रामीणों के अनुसार नलों में पानी का प्रेशर इतना कम है कि पानी ऊपर तक पहुंच ही नहीं पाता,मजबूरी में महिलाओं ने नलों के नीचे गहरे गड्ढे खोद लिए हैं,जहां बूंद-बूंद पानी जमा होता है और फिर उसी से बर्तन भरे जाते हैं, सुबह से शाम तक पानी भरने की जद्दोजहद में ग्रामीणों का आधा दिन निकल जा रहा है, कई महिलाओं ने बताया कि एक बाल्टी पानी भरने में घंटों लग जाते हैं,गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पहले कुएं और हैंडपंप से कम से कम पानी मिल जाता था,लेकिन अब पाइपलाइन बिछने के बाद भी लोग प्यासे हैं। योजना आई जरूर,लेकिन पानी नहीं आया,यह बात अब ग्रामीणों की जुबान पर आम हो चुकी है।
महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान…पानी की तलाश में रोजाना बढ़ रही मुश्किलें…
जल संकट का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ रहा है,सुबह से लेकर देर शाम तक उन्हें पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कई बार दूर-दूर तक पानी ढूंढने जाना पड़ता है,ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि सरकार योजनाओं की बात करती है,लेकिन असल समस्या समझने कोई नहीं आता। गड्ढों में जमा पानी भरना मजबूरी बन चुकी है,बच्चों की पढ़ाई,घर का काम और रोजमर्रा की जिंदगी सब पानी की कमी से प्रभावित हो रहे हैं।
जवाब मांग रही जनता…
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर करोड़ों की योजनाओं के बावजूद गांव प्यासे क्यों हैं? यदि बोरिंग होने के बाद हैंडपंप नहीं लगना है,यदि पाइपलाइन बिछने के बाद पानी नहीं आना है, तो फिर इन योजनाओं का फायदा किसे मिल रहा है? रावतसरई और पारा डोल की तस्वीरें केवल दो गांवों की कहानी नहीं हैं,बल्कि ग्रामीण विकास के उन दावों की हकीकत हैं जो कागजों पर चमकते हैं लेकिन जमीन पर दम तोड़ देते हैं,ग्रामीणों की मांग साफ हैः— उन्हें भाषण नहीं,पानी चाहिए। उन्हें उत्सव नहीं,समाधान चाहिए।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur