नई दिल्ली,27 अक्टूबर 2026। हमें आज जो सफलताएं मिल रही हैं,वे पहले कभी नहीं मिलीं।‘विकसित भारत’की नींव वैज्ञानिक अनुसंधान पर टिकी होगी। भारत एक नई सोच और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य नई तकनीकें विकसित करना है। हमारा लक्ष्य महत्वपूर्ण तकनीकों के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का विस्तार करना है। भारत का लक्ष्य आत्मनिर्भर बनना है। ये बातें पीएम मोदी ने मंगलवार को दिल्ली के भारत मंडपम में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव के उद्घाटन में कहीं। ESTIC साइंस-इनोवेशन से जुड़ा एक राष्ट्रीय सम्मेलन है। यह 27-28 अक्टूबर तक चलेगा,इसमें 12 सेक्टरों पर चर्चा की जााएगी। तीन नोबेल विजेता इसके स्पीकर होंगे। इस साल की थीम है-रचनात्मक सोच से विज्ञान को गति देना और तकनीक को सशक्त बनाना। कार्यक्रम का आयोजन वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद कर रही है।
लगातार तीसरे इवेंट में पीएम का नारा-वी विल डू इट
पीएम मोदी ने कहा…हमें अपने वैज्ञानिकों और संस्थानों को आज की जरूरतों के साथ भविष्य के लिए भी तैयार करना है। एआई, स्पेस और सेमीकंडक्टर ऐसे सेक्टर हैं जो फ्यूचर को शेप और सेफ करेंगे। इसलिए नई-नई कोशिशें की जा रही हैं। इस दौर में साइबर सिक्योरिटी को लेकर भी नई परेशानियां आ रही हैं। हमारा लक्ष्य ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित करना है जो देश को आगे बढ़ाए। इस कॉन्क्लेव में मौजूद सभी लोगों से मेरा आग्रह है कि वो एक लक्ष्य लें कि वह कौन सा टैलेंट विकसित करेंगे जिससे दुनिया को फायदा हो। आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हमारे पास प्रतिभा और कुछ नया करने का संकल्प है। हमारा भाव हो वी विल डू इट,हमारा संकल्प हो वी विल डू इट।
एआई के दौर में साइंटिफिक टेम्प्रामेंट विकसित करना जरूरी
पीएम ने कहा…सरकार की ओर से 12 हजार करोड़ के कमिटमेंट के साथ प्राइवेट सेक्टर भी 12 हजार करोड़ इन्वेस्ट कर रहा है। भारत के रिसर्च इकोसिस्टम में भी निरंतर विस्तार दिख रहा है। 10 साल पहले साल में 50 हजार से कम पेटेंट दाखिल होते थे। लेकिन पिछले साल ये संख्या 1.5 लाख पहुंच गई। 21वीं सदी के इस दूसरे क्वार्टर में ये बहुत जरूरी हो गया है कि इस एआई के दौर में साइंटिफिक टेंपरामेंट कैसे विकसित होगा। वह उन पहलुओं को पहचानता है जिन पर दूसरों का ध्यान नहीं गया। लेकिन आज एआई के दौर में हमारे पास चुनौती भी है। एआई के दौर में रूटीन काम कर सकता है। लेकिन हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि इससे साइंटिफिक टेंपरामेंट पर कोई असर न हो।
रिसर्च वह शक्ति, जो किसी देश को समस्याओं को समझने में मददगार
पीएम ने कहा…कुछ दिन पहले ही मुझे चेन्नई जाने का मौका मिला। वहां मैंने आईआईटी मद्रास में एक आधुनिक ब्रेन सेंटर का उद्घाटन किया। ये दुनिया के लिए एक उदाहरण है,जहां दिमाग की 3डी तस्वीरें बनाई जा रही हैं। इससे दिमाग से जुड़ी बीमारियों का इलाज होगा। हम सब जानते हैं रिसर्च वो शक्ति है जो किसी देश को अपनी समस्याओं को समझने में मदद करती है। इसलिए हमने कहा है जय विज्ञान जय अनुसंधान। इसलिए हम इसे बढ़ावा दे रहे हैं। पिछले साल हमने इसी मंच से इसके लिए 1 लाख करोड़ दिया था।
हम ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे जो हेल्थ और एजुकेशन में काम आए…
आप सब जानते हैं साइंस और टेक्नोलॉजी को हमेशा से वेपन की तरह भी देखा जाता रहा है। लेकिन भारत के लिए इसका मतलब है आम जनता की सेवा। टेक्नोलॉजी सिर्फ इस बात से साबित नहीं होती कि वो कितनी एडवांस है,असली फर्क इस बात से पड़ता है कि वो कितने लोगों की जिंदगी में बदलाव लाती है। इसलिए हम ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं जो हेल्थ और एजुकेशन में काम आए।
भारत में बने शिपमेंट अब दुनिया में पहुंच रहे हैं…
मोदी ने कहा…इसी साल भारत ने एआई इंपैक्ट समिट होस्ट की और अपना भी लॉट तैयार किया। भारत में तैयार शिपमेंट अब दुनिया में पहुंच रहे हैं। न्यूक्लियर से स्पेस और एआई से सेमीकंडक्टर तक इन सबकी जरूरतें अलग हैं। लेकिन लक्ष्य एक है। भारत का एक और लक्ष्य है-सॉल्यूशन एट स्केल, यानी हमारे यहां ढूंढे गए सॉल्यूशन से दुनिया को फायदा होता है।
इंडियन स्टार्टअप ने पहली कोशिश में रॉकेट ऑर्बिट में पहुंचाया
प्रधानमंत्री ने कहा… 30 अक्टूबर को देश डॉक्टर होमी भाभा की जयंती मनाएगा। आप सभी जानते हैं कि विकसित भारत के लिए हमें बड़ी मात्रा में न्यूक्लियर एनर्जी की जरूरत होगी। इसलिए हम अपने फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तैयार कर रहे हैं। ये कुछ महीने पहले ही फर्स्ट क्रिटिकैलिटी तक पहुंच गया है। इसी साल भारत ने स्पेस सेक्टर में नई उपलब्धियां हासिल की हैं। मेड इन इंडिया स्टार्टअप ने पहली कोशिश में रॉकेट को ऑर्बिट में पहुंचाया। 21वीं सदी का भारत एक नई सोच और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब हमारा लक्ष्य नई तकनीकें बनाना, उनकी दिशा तय करना और वैश्विक चुनौतियों के समाधान देने की क्षमता विकसित करना है। पीएम ने कहा…आज हमारे सामने चुनौती है-नई टेक्नोलॉजी विकसित करना है। हमने कोरोना काल में देखा जब दुनिया के बड़े देश वैक्सीन के लिए स्ट्रगल कर रहे थे। तब भारत दुनिया के कई देशों को वैक्सीन दी। हम प्रथम कोशिश में ही मंगल पर पहुंच गए। हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक भी एक बार में ही पहुंच गए। 0 की खोज से लेकर नंबर सिस्टम तक भारत की परंपरा इनोवेशन की रही है।
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