नई दिल्ली,23 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि वर्ष 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने के साथ ही चिन्मय मिशन भी अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने की दिशा में होगा। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन की शताब्दी यात्रा और विकसित भारत के निर्माण का अभियान एक साथ आगे बढ़ेंगे, क्योंकि दोनों के लक्ष्य और उद्देश्य एक हैं। मोदी ने यहां भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि देश को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ समाज को एकजुट करना, आत्मनिर्भरता के लिए लोगों को जागरूक करना और 2047 तक विकसित भारत के संकल्प से जन-जन को जोड़ना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं। इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सभी को और अधिक सक्रिय होना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है। इसकी स्थापना स्वामी चिन्मयानंद ने की थी और दशकों की इसकी यात्रा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संकल्पों से भरी रही है। उन्होंने दुनिया भर में मिशन से जुड़े संतों, आचार्यों, साधकों और अनुयायियों को अमृत महोत्सव की बधाई देते हुए विश्वास जताया कि वे विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मोदी ने आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम के दर्शन और संवाद के अनुभव को याद करते हुए कहा कि ऐसा लगा मानो वह 33 वर्ष पीछे पहुंच गए हों। वर्ष 1993 में बड़ौदा में गुरुदेव से हुई मुलाकात,उनके साथ बातचीत, स्नेह और आशीर्वाद की स्मृतियां फिर से जीवंत हो उठीं। एक पल के लिए उन्हें ऐसा लगा, जैसे वह गुरुदेव के साक्षात सानिध्य में आ गए हों। प्रधानमंत्री ने इस अनुभव के लिए चिन्मय मिशन के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1993 में वह स्वामी चिन्मयानंद को अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने गए थे। उस समय स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के 100 वर्ष पूरे हो रहे थे। स्वामी चिन्मयानंद ने निमंत्रण स्वीकार किया और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को इस समारोह के प्रति जागरूक किया तथा इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
मोदी बोले…विकसित भारत और चिन्मय मिशन का रास्ता एक
बीते दशकों में समय बदला है। देश के सामने नई चुनौतियां पैदा हुई हैं। आज उसके समाधान का काम हम सबके सामने है। आज हमें आत्मनिर्भरता के लिए देश को जागरूक करना है। हमें 2047 के विकसित भारत संकल्प से सबको जोड़ना है। जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, जब चिन्मय मिशन भी 100 साल पूरे करेगा। यानी विकसित भारत और चिन्मय मिशन का रास्ता एक है। मुझे विश्वास है,आप सब मिलकर विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे।
पीएम ने कहा…अब देश ऋषियों-राष्ट्रभक्तों की राह पर…
आज उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो रहा है। अयोध्या राम मंदिर हो, उज्जैन का महाकाल धाम हो या केदारनाथ या बद्रीनाथ हो,हर जगह ऐसा ही हो रहा है। एक समय भारत से बहुत सी मूर्तियां चोरी कर विदेश ले जाई गईं। इन्हें बेच दिया गया। कोई इन्हें पूछने वाला नहीं था। हम पिछले 12 साल में ऐसी 600 मूर्तियां वापस लाए हैं। देश अब उस राह पर आगे बढ़ रहा है, जिसका सपना हमारे ऋषियों और राष्ट्रभक्तों ने देखा था।
मोदी बोले…नई शिक्षा नीति में संस्कृति के साथ टेक्नोलॉजी सिखा रहे…
2015 में मुझे स्वामी जी की स्मृति में एक सिक्का जारी करने का मौका मिला था। मैंने कहा था कि स्वामी जी का जीवन एक प्रतीक है। उनके गुरु ने उन्हें आशीर्वाद दिया था…‘गो,रोर लाइक अ लॉयन’ यानी जाओ,शेर की तरह दहाड़ो। अब चिन्मय मिशन का अमृत महोत्सव भी भारत के अमृत काल से जुड़ रहा है। ये भारत के संकल्प की असली ताकत है। हमारे वेदों में लिखा है… राष्ट्र का हित चाहने वाले हम लोग राष्ट्र को महान बनाएं। स्वामी जी ने गीता ज्ञान के अभियान की शुरुआत की। आज इसी का परिणाम है कि लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर का काम कर रहे हैं।
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