मुंबई,29 सितम्बर 2026। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रही बहस के बीच महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर में कई बदलाव करने की मांग की है। 24 सितंबर को भेजे गए पत्र में उन्होंने विशेष रूप से निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को उन मामलों में अधिक निर्णय लेने की स्वतंत्रता देने का आग्रह किया है, जिनमें सॉफ्टवेयर द्वारा मतदाता की जानकारी में ‘तार्किक विसंगति’ चिन्हित की जाती है। महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण के नोटिस चरण के दौरान यह मांग सामने आई है। 31 अगस्त को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में राज्य के मतदाताओं की संख्या में 21.1 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई थी। अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को जारी की जानी है। चोकलिंगम ने पत्र में चार प्रमुख बदलावों की मांग की है। इनमें निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को तार्किक विसंगति वाले मामलों में सुनवाई की आवश्यकता तय करने, संतोषजनक दस्तावेज मिलने पर स्वयं मामले का निपटारा करने और उपयुक्त दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेने के लिए अधिक विकल्प देने की मांग शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई मतदाता वैध और संतोषजनक दस्तावेज जमा कर देता है, तो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी उसे व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में उपस्थित होने से छूट देने में सक्षम होना चाहिए। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगों और अन्य संवेदनशील वर्गों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दस्तावेजों के संबंध में भी अधिक लचीलापन देने की मांग की है। उनके अनुसार, नोटिस के साथ दिए गए दस्तावेजों की सूची संकेतात्मक है और अंतिम नहीं। इसलिए ऐसे लोगों के लिए अन्य समकक्ष दस्तावेज जमा करने का विकल्प होना चाहिए, जिनके पास सूची में शामिल दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। सॉफ्टवेयर द्वारा चिन्हित ‘तार्किक विसंगति’ का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति मतदाता नहीं है। यह मुख्य रूप से वर्तमान मतदाता विवरण और पिछली मतदाता सूची के बीच किसी जानकारी के मेल नहीं खाने का संकेत है। मसलन, माता-पिता या दादा-दादी के नाम में अंतर,उम्र से संबंधित असंगति या पिछली सूची से संबंधित जानकारी का ठीक से मिलान न होना ऐसी विसंगति के रूप में चिन्हित हो सकता है।
चोकलिंगम ने ऐसे मामलों में स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों को उपलब्ध दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेने की पर्याप्त स्वतंत्रता देने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि हर मामले में पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण सूची का अंश अनिवार्य रूप से अपलोड करने की व्यवस्था को वैकल्पिक बनाया जाना चाहिए। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की मांगें उन चिंताओं से भी मेल खाती हैं, जिन्हें निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पहले दर्ज कराया था। संधू ने 14 अगस्त को सॉफ्टवेयर के नियंत्रण को महानिदेशक (सूचना प्रौद्योगिकी) स्तर पर अत्यधिक केंद्रीकृत किए जाने पर सवाल उठाया था।
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