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बैकुंठपुर@ आरक्षण तय होते ही बदली बैकुंठपुर-शिवपुर चरचा की सियासी तस्वीर

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बैकुंठपुर के 20 और शिवपुर-चरचा के 15 वार्डों का आरक्षण पूरा,अब भाजपा-कांग्रेस के सामने प्रत्याशी चयन की चुनौती…कई पुराने दावेदारों के समीकरण बदले,नए चेहरों के लिए खुला रास्ता
-संवाददाता-
बैकुंठपुर,29 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
कोरिया जिले में आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर अब चुनावी तस्वीर एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर चुकी है, बैकुंठपुर और शिवपुर-चरचा नगर पालिका के सभी वार्डों का आरक्षण तय हो गया है,लंबे समय से आरक्षण का इंतजार कर रहे संभावित पार्षद दावेदारों के सामने अब यह स्पष्ट हो गया है कि किस वार्ड से किस वर्ग का प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतर सकता है। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब राजनीतिक दलों के सामने अगला बड़ा सवाल उम्मीदवार चयन का है, खासकर भाजपा और कांग्रेस के लिए यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आरक्षण ने कई संभावित दावेदारों के पुराने वार्ड में चुनाव लड़ने की संभावनाओं को प्रभावित किया है,वहीं कुछ वार्डों में नए चेहरों के लिए अवसर भी बन गए हैं,कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में 28 सितंबर को दोनों नगर पालिकाओं के वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई।
बैकुंठपुर के 20 वार्डों में कौन-सा आरक्षण?
बैकुंठपुर नगर पालिका परिषद में कुल 20 वार्ड हैं, आरक्षण के बाद इनमें 1 वार्ड अनुसूचित जाति,2 वार्ड अनुसूचित जनजाति,7 वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग और 10 वार्ड अनारक्षित रखे गए हैं,इन वर्गों के भीतर महिला आरक्षण का भी प्रावधान किया गया है।
आरक्षण ने कई दावेदारों की तैयारी पर लगाया ब्रेक
आरक्षण से पहले संभावित प्रत्याशियों के बीच अपने-अपने वार्ड से चुनाव लड़ने को लेकर तैयारियां चल रही थीं, कई दावेदार लंबे समय से वार्ड में संपर्क, बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए अपनी जमीन तैयार कर रहे थे,लेकिन आरक्षण की तस्वीर सामने आते ही अब उन दावेदारों को अपनी रणनीति दोबारा देखनी होगी, जिनका वार्ड उनकी अपेक्षित श्रेणी में नहीं आया है, यहीं से राजनीतिक दलों की असली कवायद शुरू होगी, किस वार्ड में पार्टी का पुराना चेहरा फिट बैठता है,कहां नए चेहरे को मौका देना होगा, किस वार्ड में महिला उम्मीदवार की तलाश करनी होगी और किस आरक्षित वार्ड में संबंधित वर्ग के भीतर पार्टी के पास कितने विकल्प हैं—इन तमाम सवालों पर अब संगठन के भीतर चर्चा तेज होना स्वाभाविक है,आरक्षण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह जाता, बल्कि नगरीय चुनाव में यह सीधे तौर पर दावेदारियों और टिकट वितरण की दिशा तय करने वाला कारक बन जाता है।
अध्यक्ष पद की राजनीति पर भी पड़ेगा असर
बैकुंठपुर नगर पालिका में इस बार केवल पार्षदों के चुनाव को लेकर ही राजनीतिक हलचल नहीं है, नगरपालिका अध्यक्ष पद को लेकर भी कांग्रेस और भाजपा के भीतर अलग-अलग स्तर पर दावेदारियों और संभावित चेहरों की चर्चा चल रही है,वार्ड आरक्षण सामने आने के बाद अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों के लिए भी राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं,हालांकि अध्यक्ष पद का आरक्षण अलग प्रक्रिया का विषय था जो हो चूका है, लेकिन वार्डवार प्रत्याशियों की संरचना किसी भी दल की अध्यक्ष पद की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकती है,यानी अब चुनावी गणित दो स्तर पर चलेगा—एक तरफ वार्ड पार्षदों के टिकट, दूसरी तरफ नगरपालिका अध्यक्ष पद का चेहरा, यही वजह है कि आरक्षण की घोषणा को केवल वार्ड स्तर की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा रहा है।
पुराने चेहरों बनाम नए दावेदारों की लड़ाई- आरक्षण के बाद सबसे दिलचस्प स्थिति उन वार्डों में बनेगी जहां पहले से राजनीतिक रूप से सक्रिय चेहरों और नए दावेदारों के बीच टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा है, पुराने दावेदार अपने संगठनात्मक अनुभव और लंबे समय से किए जा रहे जनसंपर्क को आधार बनाएंगे, जबकि नए चेहरे पार्टी नेतृत्व के सामने नए विकल्प के रूप में अपनी दावेदारी रख सकते हैं,खासकर महिला आरक्षित वार्डों में राजनीतिक दलों को ऐसे चेहरों की तलाश करनी होगी जिनकी स्थानीय पकड़ और संगठन से जुड़ाव हो, वहीं एससी,एसटी और ओबीसी आरक्षित वार्डों में भी पार्टी के सामने संबंधित वर्ग के भीतर से उम्मीदवार चयन की चुनौती होगी,इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ आरक्षण ही टिकट का आधार नहीं होगा,बल्कि स्थानीय संगठन, दावेदार की सक्रियता,वार्ड में उसकी स्वीकार्यता और पार्टी की चुनावी रणनीति जैसे कई पहलू भी चर्चा में आ सकते हैं।
शिवपुर-चरचा में परिसीमन का मुद्दा भी चर्चा में- शिवपुर-
चरचा में वार्ड आरक्षण के साथ-साथ वार्डों की आबादी और क्षेत्रफल को लेकर परिसीमन का मुद्दा भी पहले से चर्चा में रहा है, उपलब्ध नगरपालिका आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट में 15 वार्डों के बीच जनसंख्या और क्षेत्रफल में अंतर का उल्लेख किया गया है,रिपोर्ट के अनुसार कुछ वार्डों की आबादी एक हजार से कम है, जबकि वार्ड क्रमांक 3 की आबादी 1,585 बताई गई है, इसी तरह वार्ड क्रमांक 1 का क्षेत्रफल 6.30 वर्ग किलोमीटर बताया गया है,जो पालिका के कुल क्षेत्रफल का बड़ा हिस्सा है,हालांकि वर्तमान चुनाव के लिए आरक्षण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है,इसलिए अब राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की निगाह चुनावी कार्यक्रम और टिकट वितरण की अगली प्रक्रिया पर होगी।
शिवपुर-चरचा में भी 15 वार्डों की तस्वीर साफ
बैकुंठपुर के साथ ही शिवपुर-चरचा नगर पालिका परिषद के 15 वार्डों का आरक्षण भी पूरा हो गया है, यहां 2 वार्ड अनुसूचित जाति, 2 वार्ड अनुसूचित जनजाति,3 वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग और 8 वार्ड अनारक्षित प्रवर्ग के लिए निर्धारित किए गए हैं,इन प्रवर्गों में महिला आरक्षण का प्रावधान भी शामिल है, इसका अर्थ है कि शिवपुर-चरचा में भी अब दावेदारों के सामने स्थिति पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट है, जो उम्मीदवार सामान्य वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे,उन्हें आरक्षण के बाद अपने विकल्पों को देखना होगा, वहीं एससी,एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों में संबंधित वर्ग के दावेदारों के बीच टिकट की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
अब भाजपा-कांग्रेस की रणनीति की बारी
आरक्षण की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर पूरी हो चुकी है,अब राजनीतिक दलों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, भाजपा और कांग्रेस दोनों को अपने-अपने संगठन के भीतर वार्डवार संभावित प्रत्याशियों पर विचार करना होगा,पार्टी के पास सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि आरक्षण के अनुरूप चेहरा कौन हो और उसे चुनाव मैदान में उतारने के पीछे स्थानीय समीकरण क्या हों, किसी वार्ड में पार्टी के पास पहले से सक्रिय नेता हो सकता है,लेकिन आरक्षण बदलने के कारण उसकी दावेदारी प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर जिस वार्ड में पहले किसी दावेदार को बहुत अधिक अवसर नहीं दिख रहा था,वहां आरक्षण अनुकूल होने पर उसकी दावेदारी अचानक महत्वपूर्ण हो सकती है,इसलिए आने वाले दिनों में वार्ड स्तर पर होने वाली बैठकों और पार्टी के अंदर होने वाली चर्चाओं पर निगाह रहेगी।
अब दावेदारों की अगली दौड़ शुरू
आरक्षण से पहले तक चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कई स्तरों पर चल रही थी,लेकिन आरक्षण के बाद अब संभावित प्रत्याशियों को अपने वार्ड की वास्तविक स्थिति पता है,अब दावेदारों के सामने तीन तरह की स्थिति बन सकती है,पहली,जिस वार्ड में वे तैयारी कर रहे थे,वही वार्ड उनके लिए अनुकूल आरक्षण में आ गया है,दूसरी,उनका वार्ड ऐसी श्रेणी में चला गया है जिसमें वे चुनाव नहीं लड़ सकते या उनकी दावेदारी प्रभावित हो गई है,तीसरी,आरक्षण के कारण उन्हें दूसरे वार्ड से राजनीतिक विकल्प तलाशना पड़ सकता है,इसी वजह से आरक्षण के बाद आने वाले दिन टिकट की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
अब चुनावी तस्वीर का अगला अध्याय टिकट से खुलेगा
बैकुंठपुर और शिवपुर-चरचा के वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी तैयारी अब अगले चरण में प्रवेश कर गई है, प्रशासन ने वार्डों की आरक्षण स्थिति स्पष्ट कर दी है,लेकिन राजनीतिक दलों के लिए असली चुनौती अब शुरू होगी,किस वार्ड में किसे उतारा जाए? किस पुराने चेहरे पर भरोसा किया जाए? कहां नया चेहरा सामने लाया जाए? किस महिला दावेदार को मौका मिले? और आरक्षित वार्डों में पार्टी की पसंद कौन बने? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में भाजपा और कांग्रेस की आंतरिक बैठकों से सामने आएंगे,बैकुंठपुर में 20 वार्ड और शिवपुर-चरचा में 15 वार्ड—कुल 35 वार्डों की आरक्षण तस्वीर साफ हो चुकी है,अब इन 35 वार्डों में टिकट के दावेदारों की दौड़ शुरू होगी,दिसंबर में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों के लिए समय भी सीमित है,आरक्षण ने वार्डों की तस्वीर साफ कर दी है,अब पार्टियों के टिकट तय करेंगे कि चुनावी मैदान में कौन-कौन चेहरे उतरते हैं,यही वह चरण होगा जहां संगठन की पसंद,स्थानीय समीकरण और दावेदारों की राजनीतिक सक्रियता आमने-सामने दिखाई देगी।


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