जज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी दफ्तर जाएंगे,एजेंसी ने कहा था…एग्जाम सिस्टम फूलप्रूफ बनाया
नई दिल्ली,18 सितम्बर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जरूरत पड़ने पर नीट परीक्षा सिस्टम की जांच के लिए जज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के ऑफिस का दौरा करेंगे। वे देखेंगे कि परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के इंतजाम वास्तव में काम कर रहे हैं या नहीं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की बेंच यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट,FAIMA और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी सिस्टम की मांग की गई है। इससे पहले सरकार ने 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि नीट परीक्षा सिस्टम फूलप्रूफ है। इसमें सेंध लगाना मुश्किल है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश…नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को वेबसाइट पर ब्योरा देना होगा
- सुधारों की जानकारी दें-कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को अपने सुधारों और अब तक हुई प्रगति का ब्योरा वेबसाइट पर डालने का निर्देश दिया है। इससे परीक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों की जानकारी सार्वजनिक होगी।
- स्थायी कर्मचारी रखे जाएं-नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के लिए पर्याप्त स्थायी कर्मचारी और विशेषज्ञ स्टाफ रखने की जरूरत पर चर्चा हुई। कोर्ट ने बेहतर मैनपावर,प्रशिक्षण,इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को मजबूत कानूनी आधार देने के लिए वैधानिक व्यवस्था पर भी विचार किया गया।
- डिजिटल परीक्षा चरणबद्ध तरीके से होगी-कोर्ट ने कहा कि लिखित परीक्षा से डिजिटल परीक्षा की ओर बदलाव अचानक नहीं किया जा सकता। इसे धीरे-धीरे लागू करना होगा,ताकि नई व्यवस्था में परेशानी न हो।
- सुझाव भेजने की सुविधा-कोर्ट ने कहा कि परीक्षा सुधारों को लेकर वकील और राज्य अपने सुझाव तय ई-मेल के जरिए भेज सकते हैं। इन सुझावों को सुधार प्रक्रिया में शामिल किया जा सकेगा।
सरकार ने कहा…कमेटी सितंबर के अंत तक रिपोर्ट देगी…
केंद्र ने कोर्ट को बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड पैनल की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने में 2 बार कहा…यूपीएससी जैसा सिस्टम बनाएं….
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यूपीएससी जैसा मजबूत सिस्टम बनाना चाहिए,जिसमें परीक्षा कराने का अनुभव अधिकारियों के ट्रांसफर होने के बाद भी संस्था के पास बना रहे। कोर्ट ने कहा कि कागज पर प्रक्रिया बेहतर दिख सकती है, लेकिन असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि एक परीक्षा के बाद अगली परीक्षा तक व्यवस्था में वही कमजोरियां दोबारा न लौटें।
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