16.60 किमी कुसमी-सामरी मार्ग पर करोड़ों खर्च,बारिश ने खोली निर्माण की परत,गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर सवाल…
सुदामा राजवाड़े
कुसमी,14 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़क यदि कुछ ही महीनों में उखड़ने लगे और उसके खराब हिस्सों को दोबारा जेसीबी से खोदकर सुधारना पड़े, तो सवाल केवल सड़क की मरम्मत का नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी का भी उठता है। कुसमी-सामरी मार्ग पर मौजूदा स्थिति कुछ ऐसे ही सवाल खड़े कर रही है। लोक निर्माण विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार कुसमी-सामरी मार्ग के 16.60 किलोमीटर हिस्से के उन्नयन एवं मजबूतीकरण पर 33.10 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन निर्माण कार्य के कुछ ही महीनों बाद सड़क के कई हिस्सों में ऊपरी परत उखड़ने,सड़क क्षतिग्रस्त होने और जगह-जगह गड्ढे बनने की स्थिति सामने आई है।
नई सड़क फिर जेसीबी से खोदी जा रही…
सबसे चौंकाने वाली स्थिति यह है कि सड़क के जिन हिस्सों में निर्माण के बाद खराबी सामने आई है,वहां अब संबंधित ठेकेदार द्वारा जेसीबी मशीन लगाकर सड़क को दोबारा खोदा जा रहा है। खराब हिस्सों में सुधार के लिए पीसीसी कार्य कराए जाने की जानकारी है। यानी जिस सड़क को करोड़ों रुपये खर्च कर मजबूत और बेहतर आवागमन के लिए तैयार किया गया, उसके कुछ हिस्सों में निर्माण के महज 4 से 6 महीने के भीतर ही दोबारा हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सड़क का निर्माण निर्धारित तकनीकी मापदंडों और गुणवत्ता के अनुरूप किया गया था तो इतनी कम अवधि में सड़क की परत उखड़ने और उसे खोदकर सुधारने की जरूरत क्यों पड़ी?
बारिश ने खोली सड़क निर्माण की परत?
बारिश के बाद मार्ग के कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत उखड़ने,धंसने और गड्ढे बनने की स्थिति सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क बनने के बाद उन्हें बेहतर और टिकाऊ आवागमन की उम्मीद थी,लेकिन कुछ ही महीनों में सड़क के खराब हिस्से सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि सड़क खराब होने का वास्तविक तकनीकी कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। यह भी संभव है कि किसी विशेष हिस्से में जल निकासी, आधार परत, सामग्री या अन्य तकनीकी कारणों से सड़क क्षतिग्रस्त हुई हो। इसलिए दृश्य स्थिति के आधार पर सीधे भ्रष्टाचार या घटिया निर्माण का निष्कर्ष निकालने के बजाय तकनीकी जांच जरूरी है।
ठेकेदार सुधार कर रहा है…लेकिन सवाल विभाग से भी…
निर्माण एजेंसी द्वारा खराब हिस्सों को सुधारना अपने आप में सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन इससे मूल सवाल खत्म नहीं होता।
क्या निर्माण के दौरान प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता परीक्षण किया गया था?
क्या सड़क की आधार परत और ऊपरी परत की तकनीकी जांच हुई थी?
निर्धारित मानक के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल हुआ या नहीं?
निर्माण के दौरान विभागीय इंजीनियरों ने गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की?
बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों की विभागीय तकनीकी जांच कराई गई या नहीं?
यदि निर्माण में कमी पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
इन सवालों का जवाब इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मामला केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि 33.10 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन से जुड़े निर्माण कार्य का है।
मरम्मत से ज्यादा जरूरी कारण की जांच : सड़क खराब होने के बाद उसे जेसीबी से खोदकर पीसीसी करना तत्काल समाधान हो सकता है, लेकिन यदि सड़क खराब होने के मूल कारण की पहचान नहीं की गई तो भविष्य में वही समस्या फिर सामने आ सकती है। इसलिए स्थानीय स्तर पर केवल मरम्मत कार्य को पर्याप्त मानने के बजाय क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्वतंत्र तकनीकी जांच,गुणवत्ता परीक्षण और निर्माण सामग्री की जांच कराई जानी चाहिए। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क की खराबी सामान्य तकनीकी समस्या है या निर्माण में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है।
एसडीओ से पक्ष जानने का प्रयास,कॉल रिसीव नहीं हुआ : मामले में लोक निर्माण विभाग के संबंधित एसडीओ ज्योतिष तिग्गा से सड़क के खराब होने,जेसीबी से सड़क खोदकर सुधार कार्य कराए जाने तथा विभागीय जांच के संबंध में उनका पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया,लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
आप ने उठाई जांच की मांग
आम आदमी पार्टी के संगठन मंत्री शकील ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सड़क यदि कुछ ही महीनों में खराब होने लगे और उसे दोबारा खोदकर सुधारना पड़े तो निर्माण की गुणवत्ता की जांच आवश्यक है। उन्होंने सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और तकनीकी गुणवत्ता की जांच कर जिम्मेदारी तय करने तथा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि उचित कार्रवाई नहीं होने पर संगठन द्वारा आंदोलन और विभाग का घेराव किया जाएगा। अब असली सवाल यह है कि करोड़ों की सड़क को बचाने के लिए जेसीबी चल रही है या निर्माण की खामी को ढकने के लिए? इसका जवाब सड़क की तकनीकी जांच से ही सामने आएगा।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur